जन प्रवाद, ब्यूरो।
इस बार के केंद्रीय बजट में बांग्लादेश के साथ तनावपूर्ण संबंधों के चलते उसके विकास के लिए दी जाने वाली धनराशि को पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले आधी कर दी गई है। बजट के अनुसार बांग्लादेश के लिए इस बार केवल 60 करोड़ रुपये की धनराशि ही आवंटित की गई है। जबकि, भूटान को पिछले साल के मुकाबले ज्यादा राशि देने का ऐलान किया गया है। ब उसे कास सहायता के रूप में सबसे अधिक 2,288 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। बात अगर नेपाल की करें तो उसके लिए 800 करोड़ रुपये और मालदीव और मॉरीशस के लिए 550-550 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

चाबहार के लिए कोई धनराशि नहीं
चालू वित्तीय वर्ष के आम बजट मेें ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए एक कोई भी धनराशि आवंटित नहीं की गई है। जबकि, भारत चाबहार बंदरगाह का हिस्सेदार रहा है इसलिए हर साल 100 करोड़ की मदद दी जा रही थी। बता दें कि भारत के लिए चाबहार बंदरगाह बहुत ही अहम है। खासबर अफगानिस्तान, मध्य एशिया और आगे के क्षेत्र में व्यापार के लिए यह बेहद जरूरी माना जाता है। यह ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है जो वैश्विक समुद्री मार्गों को सीधे जोड़ता है। चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान की सीमा से लगे ग्वादर पोर्ट के पास स्थित है। चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को विकसित कर रहा है। इस स्थिति के हिसाब से देखा जाए तो भारत के लिए चाबहार बंदरगाह बहुत ही अहम है। जानकारों की माने तो अमेरिका और ईरान में चल रहे तनाव के बीच भारत ने चाबहार परियोजना के लिए कोई भी धनराशि नहीं दी है।

चाबहार के विकास के लिए अप्रैल में छूट खत्म
बता दें कि भारत हर वर्ष चाबहार परियोजना पर 100 करोड़ रुपये खर्च कर रहा था। ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित तिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में जारी वृहद संपर्कपरियोजना पर काफी काम भी किया गया। चूंकि, इस बंदरगाह के विकास में भारत प्रमुख साक्षेदार है। बीते वर्ष सितंबर माह में अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे। वहीं, चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए अमेरिका ने भारत को छह माह की छूट दी थी। अब वह छूट 26 अप्रैल को खत्म हो रही है।
गौरतलब है कि व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारत और ईरान मिलकर चाबहार बंदरगाह का विकास कर रहे हैं। इसे उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे का अभिन्न अंग बनाने के लिए भी पुरजोर प्रयास किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय के आवंटन के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल विदेश साझेदारी विकास के मद में 6,997 करोड़ था जो विदेश मंत्रालय के आवंटन का 31 प्रतिशत से भी अधिक है।





