जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी डील होने जा रही है। जिसकी कुल लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है। यह डील भारत और फ्रांस के बीच होगी। इस डील से भारतीय वायुसेना को 114 राफेल लड़ाकू विमान मिलेंगे। यह फैसला फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की दिल्ली यात्रा से ठीक पहले लिया जा सकता है।
वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा
भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट योजना के तहत किया जा रहा है। इसका मकसद वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को मजबूती देना है। इस डील के जरिए भारत न सिर्फ अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हासिल करेगा, बल्कि देश में फाइटर जेट निर्माण की क्षमता भी कई गुना बढ़ेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस डील की सबसे अहम शर्त यह है कि करीब 96 राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसके तहत फ्रांस भारत को उच्च स्तर की फाइटर जेट तकनीक ट्रांसफर करेगा। इसके बाद दोनों देशों के बीच एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी बनेगी। इससे मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बड़ी मजबूती मिलेगी। साथ ही भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाएगा।
3.25 लाख करोड़ रुपये की डील
करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील न केवल सरहदों की सुरक्षा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि आधुनिक युद्ध कला के क्षेत्र में भारत का दबदबा भी कायम करेगी। यह डील महज एक खरीद नहीं है, बल्कि एक गहरी रणनीतिक साझेदारी भी है। जिस पर इस महीने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान मुहर लगने की पूरी संभावना है। इस सौदे के पूरा होते ही भारत के पास कुल 176 राफेल विमानों का बेड़ा होगा। यह सौदा भारत को दुनिया में फ्रांस से भी बड़ा राफेल आपरेटर बना देगा।
भारत आने वाले हैं मैक्रों
बता दें कि 18 से 20 फरवरी तक होने वाले एआई समिट में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आने वाले हैं। इस दौरान यह डील फाइनल हो सकती है। रक्षा खरीद बोर्ड की मंजूरी मिल चुकी है। अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में मंजूरी मिलने के बाद यह डील फाइनल हो जाएगी। इस मेगा-डील के तहत वायुसेना को 88 सिंगल-सीट और 26 ट्विन-सीट फाइटर जेट्स मिलेंगे। ये सौदा अब तक के सबसे उन्नत विमान एफ-4 स्टैंडर्ड के होंगे। नए राफेल नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर में बेजोड़ हैं। इस समझौते में एक और सबसे बड़ी बात यह है कि इसके तहत मिले विमानों को 2030 तक एफ-5 के स्तर का अपग्रेड किया जाएगा। जिससे ये विमान लॉयल विंगमैन जैसे घातक लड़ाकू ड्रोन्स के साथ मिलकर युद्धक मिशन को अंजाम दे सकेंगे। इस सौदे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका इंडस्ट्रियल मॉडल है। शुरुआती 18 विमान फ्रांस से सीधे रेडी-टू-फ्लाई हालत में आएंगे। वहीं 96 विमानों का निर्माण नागपुर में किया जाएगा।
भारतीय कंपनियों की अहम हिस्सेदारी
विमान निर्माण में भारतीय कंपनियों की अहम हिस्सेदारी होगी। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि टाटा, महिंद्रा और डायनेमैटिक टेक्नोलॉजीज जैसी 40 से अधिक भारतीय कंपनियां इस प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगी। शुरुआती दौर में विमान निर्माण में स्वदेशी तकनीक का हिस्सा 30 प्रतिशत होगा। इसके बाद यह हिस्सा 60 प्रतिशत तक पहुंचेगा। इसके अलावा, डसॉल्ट और सफरान भारत में मेंटेनेंस और इंजन की मरम्मत के लिए एक बड़ा सेंटर बनाएंगे, जिससे भारत पूरी दुनिया के राफेल विमानों के लिए एक ग्लोबल सर्विस हब बन जाएगा। फिलहाल, भारतीय वायुसेना अपने स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों के मुकाबले महज 29 स्क्वाड्रनों के साथ काम कर रही है। चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य गठजोड़ और लद्दाख में जारी तनाव को देखते हुए यह डील संजीवनी की तरह है। जहां एक ओर भारत अपने स्वदेशी तेजस एमके-2 और पांचवीं पीढ़ी के एएमसीए विमानों पर काम कर रहा है, वहीं राफेल तब तक भारत की हवाई सुरक्षा की रीढ़ बना रहेगा। राफेल फाइटर जेट लंबी दूरी की मीटियोर एयर टू एयर मिसाइल, हैमर स्टैंड आफ स्ट्राइक वेपन और स्पेक्ट्रा एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस है। इसके साथ इसमें अत्याधुनिक रडार और टारगेटिंग सिस्टम लगे हैं, जो इसे आधुनिक युद्ध के लिए बेहद प्रभावी बनाते हैं। इसकी मारक क्षमता इतनी है कि यह दुश्मन के इलाके में घुसे बिना ही उनकी मिसाइलों और विमानों को हवा में ही ढेर कर सकता है।





