जनप्रवाद ब्यूरो। समंदर की गहराई में एक ऐसा जीव मिला है जो लाखों सालों से सो रहा है। यह जीव अब जागने वाला है। वैज्ञानिक इस बात से हैरान है कि आखिरकार ये जीव पृथ्वी की किस हलचल कर इंतजार कर रहे थे। जब ये जागेंगे तो दुनिया में कौन सा परिवर्तन लाने वाला है इसको लेकर भी वैज्ञानिक परेशान हैंँ। इस जीवों को इंट्राटरेस्ट्रियल्सका नाम दिया गया है।
लाइव साइंस में छपी रिपोर्ट
लाइव साइंस में छपी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार शोधकर्ताओं को जीवों की नई प्रजाति का पता लगा है। ये लाखों सालों से पृथ्वी के बहुत नीचे सोया हुआ यानी छिपा हुआ जीव है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि ये जीव एक ऐसी चीज का इंतजार करते हैं जो हजारों साल बाद होती है। इसके बाद ये जीव जाग जाते हैं। इन जीवों को इंट्राटरेस्ट्रियल्सका नाम दिया गया है। अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार पृथ्वी की सतह के नीचे अनदेखे माइक्रोस्कोपिक जीवन का एक साम्राज्य है। ये इंट्राटरेस्ट्रियल्स ग्रह की कुछ सबसे कठिन परिस्थितियों में जीवित रहते हैं। बता दें कि समुद्री तलछट की गहराई में दबे रोगाणु और जीवाणुओं को इंट्राटरेस्ट्रियल्स कहा जाता है। दुनिया भर में पृथ्वी की पपड़ी के अंदर रहने वाले छोटे सूक्ष्मजीव कहलाते हैं। ये इतनी गहराई में दबे हैं कि सूरज की रोशनी तक नहीं पहुंच पाती है। सतह के नीचे के माइक्रोब्स में ऐसे अनुकूलन भी होते हैं जो बहुत धीमी मेटाबॉलिज्म और सेल डिवीजन को मुमकिन बनाते हैं।
बाहर आ रहे हैं सूक्ष्मजीव
शोध में पता चला है कि जैसे-जैसे समुद्र की गहराई में रेत और मिट्टी जमा होती है, तो उसके साथ ये सूक्ष्मजीव भी दबते चले जाते हैं। ये जीव वहां लाखों सालों तक निष्क्रिय अवस्था में पड़े रहते हैं। इसके बाद जैसे-जैसे समय बीतता है ये जीव बाहर आने लगते हैं। बता दें कि ये जीव प्रक्रियागत तरीके से बाहर निकलते हैं। हजारों सालों में जब टेक्टोनिक्स प्लेट में हलचल होती है यानी भूकंप, पहाड़ बनने या ज्वालामुखी विस्फोट जैसी घटनाएं होती हैं तो तलहटी में दबे ये सूक्ष्म जीव ऊपर आ जाते हैं। सतह पर आते ही ये तेजी से प्रजनन करते हैं और अपने जीन आगे बढ़ाते हैं। अब इनके जागने को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ी घटना का अनुमान लगाया है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे पृथ्वी पर टेक्टोनिक्स प्लेट में हलचल होने वाली है। धरती पर या तो कोई बड़ा भूकंप आ सकता है या ज्वालामुखी विस्फोट होने वाला है। वहीं कुछ वैज्ञानिक इसे ग्लोबल वार्मिंग से भी जोड़ रहे हैं। समुद्र में हलचल होने से दुनिया के कई शहर इसमें समा सकते हैं। जैसा कि वैज्ञानिकों ने अपने पिछले अनुमानों में यह संदेह जाहिर किया था।रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कई शहर 2050 और कुछ शहर 2100 तक पूरी तरह से पानी में डूब जाएंगे। इस लिस्ट में पहला नाम नीदरलैंड्स की राजधानी एम्स्टर्डम का है। इसके अलावा समुद्र के किनारे स्थित कई शहरों पर यह खतरा मंडरा रहा है।





