जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। साल 2025 को न केवल भारत के इतिहास में जगह मिलेगी बल्कि रक्षा, खेल, विज्ञान, धर्म, संस्कृति और आर्थिक उपलब्धि के रूप में भी जाना जाएगा। यह साल नीतिगत बदलाव के वर्ष के तौर पर भी देखा जाएगा। यह वह साल रहा जब देश की मोदी सरकार ने बड़े फैसले लेने के साथ सुधारों की हिचकिचाहट दूर की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2025 ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार अब सिस्टम बदलने वाले फैसले लेगी और पुराने ढांचों को ढोने के बजाय उन्हें तोड़कर नया बनाने के लिए तैयार है। यह बदलाव केवल नीतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने यह संकेत भी दिया कि भारत अपनी विकास यात्रा को अब छोटे कदमों से नहीं, बल्कि बड़े निर्णयों से आगे बढ़ाना चाहता है।
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दुनिया ने देखी भारत की सैन्य शक्ति
निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाने वाले बुजदिल आतंकवादियों की कायराना करतूत के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त एक्शन लिया। पहलगाम आतंकी हमले में 26 सैलानियों की क्रूरता के साथ की गई हत्या के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लांच किया। इसमें सैन्य ताकत के साथ प्रौद्योगिकी श्रेष्ठता की धमक देखने को मिली। ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक नई रणनीति, नया आत्मविश्वास और भारत की नई सैन्य नीति की घोषणा थी। यह शंखनाद था कि अब भारत सिर्फ रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक रणनीति के साथ आतंक के ठिकानों पर सर्जिकल प्रहार करेगा। यह आॅपरेशन हमेशा याद किया जाएगा। इस आॅपरेशन की कामयाबी ने दुनिया भर के देशों को स्पष्ट संदेश दिया कि अब परमाणु बम होने का दंभ भरने वाले पाकिस्तान की करतूतों को किसी हाल में सहन नहीं किया जाएगा। भारत ने 7 मई सुबह डेढ़ बजे पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकियों के 9 ठिकानों को ध्वस्त करते हुए आॅपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया। भारत की यह एक सुनियोजित, सीमित और सटीक सैन्य कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य स्पष्ट था, आतंकवाद को उसी की जमीन पर कुचलना। इस ऑपरेशन को सिंदूर नाम देना भारत की सांस्कृतिक और भावनात्मक सोच को दर्शाता है। योजनाबद्ध और सटीक तरीके से किए गए इस ऑपरेशन में भारतीय सैन्य बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों ने 9 लांच पैड तबाह किए। ये आतंकी कैंप भारत में खूनी खेल खेलने वाले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे। यह सिर्फ आतंकी कैंपों पर हमला नहीं था, बल्कि 1971 के युद्ध के बाद पाकिस्तान के अंदर भारत की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई थी।
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रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी
2025 में रक्षा क्षेत्र ने संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और तकनीकी उन्नयन को प्राथमिकता दी। साल 2025-26 में रक्षा बजट बढ़कर 6.81 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह बजट पिछले दशक की तुलना में तीन गुना से अधिक है। इस बजट से थलसेना, वायुसेना और नौसेना की तत्परता बढ़ी, साथ ही एस-400 जैसी एयर डिफेंस सिस्टम, राफेल फाइटर्स, ब्रह्मोस मिसाइलें और स्वदेशी ड्रोन जैसी क्षमताएं मजबूत हुईं। मोदी सरकार ने देश को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए कड़े फैसले लिए। इसका असर साल दर साल देखा गया। रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर कई ऐसे बड़े फैसले लिए जिनसे भारत दुनिया में एक बड़ी सैन्य ताकत बनकर उभरा है। इसके साथ-साथ इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की उड़ान के साथ भारत हथियारों के सबसे बड़े आयातक के बजाय निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बार स्वाधीनता दिवस संबोधन में दस साल में महत्वपूर्ण ठिकानों और आर्थिक सामाजिक प्रतिष्ठानों को हवाई हमलों से बचाने की प्रणालियों वाला सुदर्शन-चक्र तैयार करने की घोषणा की।
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2025 में रिकॉर्ड सौदे
साल 2025 में भारत सरकार ने मेक इन इंडिया मुहिम के तहत लाखों करोड़ रुपये के रक्षा उपकरण खरीदे। रक्षा मंत्रालय ने कुल 2,09,050 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड सौदे किए, जिनमें से लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपये सीधे भारतीय कंपनियों की जेब में गए। इस साल के सबसे चर्चित सौदों में नौसेना के लिए राफेल एम और वायुसेना सेना के लिए एलसीएच प्रचंड शामिल हैं। वहीं सीमा पर चीन की चुनौतियों को देखते हुए जोरावर जैसे हल्के टैंकों और एटीएजीएस जैसी आधुनिक तोपों की खरीद को हरी झंडी दी गई।
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5वीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान
मई 2025 में भारत ने अपने सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट एएमसीए के बजट और मॉडल को मंजूरी दी। यह भारत का पहला 5वीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर विमान होगा जो रडार की पकड़ में नहीं आएगा।
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समंदर के शिकारी
जनवरी 2025 में नौसेना ने कई बड़े स्वदेशी जहाजों को एक साथ शामिल किया। इनके नाम आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस वागशीर शामिल है।
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एटीएजीएस स्वदेशी तोपों से दुश्मन होगा खाक
भारतीय सेना को लंबे समय से आधुनिक तोप की जरूरत थी, जिसे एटीएजीएस ने पूरा किया। ऐसे में 307 स्वदेशी तोपों की खरीद को मंजूरी दी गई। इसकी कीमत लगभग 7,000 करोड़ रुपये आंकी गई। यह 48 किलोमीटर दूर बैठे दुश्मन को धूल चटा सकती है।
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156 हेलिकॉप्टरों का महा-सौदा
मार्च 2025 में भारत ने एचसीएच प्रचंड के लिए 62,700 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक समझौता किया। इसके तहत 156 स्वदेशी हेलिकॉप्टर खरीदे जाएंगे। इनमें से 66 भारतीय वायुसेना को और 90 भारतीय थल सेना को मिलेंगे। यह दुनिया का इकलौता हेलिकॉप्टर है जो सियाचिन जैसी ऊंचाई पर भी हथियार लेकर उड़ सकता है।
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फ्रांसीसी किलर का सौदा
नौसेना की हवाई ताकत को बढ़ाने के लिए भारत ने फ्रांस के साथ राफेल-एम का सौदा किया गया। ये लड़ाकू विमान आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य जैसे विमानवाहक पोतों पर तैनात किए जाएंगे। इस डील की कुल लागत करीब 6 बिलियन डॉलर बताई गई है।
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जोरावर टैंक की खरीद
लद्दाख में चीन के साथ तनाव को देखते हुए भारत ने स्वदेशी हल्के टैंक जोरावर की खरीद का फैसला लिया। यही वजह रही कि 59 टैंकों का पहला ऑर्डर दिया गया है, जबकि 295 और टैंक खरीदे जाएंगे। इसे खास तौर पर पहाड़ों पर तेजी से चलने के लिए बनाया गया है, जहां भारी टैंक नहीं जा सकते।
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अमेरिका से आसमानी जासूस
समुद्री और जमीनी सीमाओं पर नजर रखने के लिए भारत ने अमेरिका से घातक 31 एमक्यू सी गार्जियन ड्रोन खरीदे हैं। ये ड्रोन लगातार 35 घंटे तक हवा में रहकर जासूसी और सटीक हमला कर सकते हैं।
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अमेठी में रक्षा उत्पादन शुरू
रूस के सहयोग से भारत ने अमेठी एचएएल की फैक्ट्री में एके-203 राइफल्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया है। जिसके तहत 6 लाख से अधिक राइफल्स सेना को दी जाएंगी। ये राइफल्स पुरानी इंसास राइफल्स की जगह लेंगी और जवानों को आधुनिक हथियार देंगी।
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पिनाका रॉकेट सिस्टम
2025 में भारत ने स्वदेशी निर्मित पिनाका रॉकेट सिस्टम के नए रेजिमेंट के लिए 2025 में बड़े आॅर्डर दिए। यह सिस्टम सिर्फ 44 सेकंड में 12 रॉकेट दागकर 75 किलोमीटर दूर के इलाके को मलबे में बदल सकता है।
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2026 के लिए बड़े रक्षा सौदे को मंजूरी
रक्षा मंत्रालय ने सेना के तीनों अंगों के लिए 79 हजार करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। इस बजट से मिसाइल, रॉकेट और ड्रोन्स सहित विभिन्न गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों की खरीद होगी। इनमें थल सेना के लिए लोएटरिंग म्युनिशन और पिनाका रॉकेट सहित वायुसेना के लिए अस्त्रा मिसाइल और स्पाइस-1000 बम शामिल हैं। जानकार इसे नए साल की तैयारी बता रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण खरीद परिषद की अहम बैठक हुई। बैठक में सीडीएस जनरल अनिल चौहान और सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों सहित रक्षा सचिव भी मौजूद रहे। बैठक में तीनों अंगों के लिए 79 हजार करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी दी गई। बता दें कि इस पैकेज से न केवल हथियारों और सैन्य साजो सामान की आवश्यकता की पूर्ति होगी बल्कि देश की सैन्य क्षमताओं में बड़ा इजाफा होगा। इस डील के तहत सेना के लिए कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सेना को लोइटर म्यूनिशन सिस्टम मिलेगा। जिससे दुश्मन के अहम ठिकानों पर सटीक हमला करने में मदद मिलेगी। इसी तरह लो-लेवल लाइट वेट रडार की खरीद से दुश्मनों के छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और यूएवी की पहचान और ट्रैकिंग आसान होगी। इसी तरह पिनाका रॉकेट सिस्टम के लिए लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट की खरीद से पिनाका की रेंज और सटीकता बढ़ेगी। जिससे हाई वैल्यू टारगेट को दूर से ही निशाना बनाया जा सकेगा। वहीं, इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम एमके से सीमावर्ती इलाकों और अंदरूनी क्षेत्रों में संपत्तियों को ड्रोन हमलों से सुरक्षा मिलेगी। साथ ही नौसेना के लिए अतिरिक्त हाई ऑल्टिट्यूड लॉन्ग रेंज हेल रिमोटली पायलट एयरक्राफ्ट सिस्टम को लीज पर लेने को भी मंजूरी दी गई है।





