कोलकाता, एजेंसी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को राज्य के 23 में से नौ जिलों में एक भी सीट नहीं मिल सकी, वहीं भाजपा ने सभी 68 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए निर्णायक बढ़त हासिल की। भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने जा रही है। उसने सभी जिलों में पूरी तरह से दबदबा कायम किया और चुनावी परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया। भाजपा ने कुल 206 सीटें जीतकर राज्य विधानसभा में दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया, जबकि 294 सदस्यीय सदन में तृणमूल की सीटें घटकर लगभग 80 रह गईं और उसका 15 वर्षों का शासन समाप्त हो गया।
यह परिणाम भाजपा के लिए पूर्वी भारत के अंतिम बड़े गढ़ में निर्णायक सफलता माना जा रहा है, जिससे ह्अंग, बंग और कलिंग (बिहार, बंगाल और ओडिशा) क्षेत्र में पार्टी का प्रभाव और मजबूत हुआ है। सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन पूर्व मेदिनीपुर जिले में देखने को मिला, जहां भाजपा ने सभी 16 सीटें जीत लीं। यह जिला भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी का मजबूत गढ़ माना जाता है, जिनके प्रभाव से पार्टी ने यहां पूर्ण वर्चस्व स्थापित किया। विश्लेषकों के अनुसार, 2020 में भाजपा में शामिल होने के बाद से अधिकारी का प्रभाव उनके गृह क्षेत्र कांथी और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ता गया, जिसका परिणाम इस चुनाव में स्पष्ट रूप से देखने को मिला।
उत्तर बंगाल के चार पहाड़ी जिलों—दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार—में भी तृणमूल और उसके सहयोगी कोई सीट नहीं जीत सके। यहां की 18 सीटों पर भाजपा का पूरी तरह कब्जा रहा। पूरे उत्तर बंगाल में भाजपा ने 54 में से 40 सीटें जीतकर टीएमसी का आंकड़ा 23 से घटाकर 14 कर दिया। पहाड़ी क्षेत्रों में भाजपा की जीत के बाद ह्यगोरखा टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। गृह मंत्री अमित शाह के बयान को कई नेताओं ने क्षेत्रीय प्रशासनिक ढांचे में बदलाव के संकेत के रूप में देखा है। स्थानीय स्तर पर तृणमूल की सहयोगी पार्टी और भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के नेता अनित थापा ने हार का कारण व्यापक सत्ता-विरोधी लहर को बताया। पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र पुरुलिया, बांकुड़ा और झाड़ग्राम में भी तृणमूल पूरी तरह खाली हाथ रही। पुरुलिया की 9, बांकुड़ा की 12 और झाड़ग्राम की चार सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र में कुड़मी-महतो समुदाय के वोट भाजपा की ओर जाने से तृणमूल को बड़ा नुकसान हुआ। पश्चिम बर्दवान जिले में भी भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए नौ में से छह सीटें तृणमूल से छीन लीं, जबकि बाकी तीन सीटें अपने पास रखीं। स्थानीय तृणमूल कार्यकतार्ओं ने पार्टी की हार का कारण नेताओं की कथित अहंकारपूर्ण कार्यशैलीह्व और जनता से दूरी को बताया। तृणमूल छोड़ कर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले जितेंद्र तिवारी ने इस जनादेश को बंगाल के पुनर्औद्योगिकीकरण, रोजगार सृजन और महिला सुरक्षा की दिशा में जनसमर्थन बताया। तिवारी ने पांडवेश्वर सीट से जीत दर्ज की है।





