क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने की दूसरी दुनिया की खोज

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। आस्ट्रेलिया के दक्षिणी क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी यूनिस्क के वैज्ञानिकों की खोज ने दुनियाभर के अंतरिक्ष विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड में पृथ्वी जैसा ग्रह मिला है। उनका मानना है कि यह ग्रह इसांनों के रहने के लायक है।
केपलर स्पेस टेलीस्कोप की मदद

नासा के केपलर स्पेस टेलीस्कोप के डेटा से बड़ी कामयाबी मिली है। हाल ही के दिनों में आस्ट्रेलिया के एस्ट्रोनॉमर ने इसी टेलीस्कोप के डेटा से एचडी 137010 बी नाम का एक ग्रह खोजा है। इसका साइज बिल्कुल पृथ्वी के बराबर है और यहां जीवन होने की संभावना जताई जा रही है। बता दें कि केपलर स्पेस टेलीस्कोप खास तौर पर मिल्की वे गैलेक्सी के एक हिस्से की रिसर्च करने के लिए डिजाइन किया गया था। इस टेलीस्कोप ने इससे पहले भी वैज्ञानिकों को लगातार हैरान करने वाला डेटा उपलब्ध कराया है। यह ग्रह पृथ्वी से लगभग 150 प्रकाश वर्ष दूर मौजूद है। यह सूरज की तरह ही एक तारें का चक्कर लगाता है। साइज में यह पृथ्वी से लगभग 6 फीसदी बड़ा है। यही कारण कि इस ग्रह को व्हेयर अर्थ मीट्स मार्स का नाम दिया गया है। वैसे यह पृथ्वी की तरह की दिखता है लेकिन वैज्ञानिकों कहना है कि यह एक ठंडा ग्रह हो सकता है।
जर्नल लेटर्स में प्रकाशित 

इस ग्रह की खोज आस्ट्रेलिया में दक्षिणी क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी यूनिस्क के वैज्ञानिकों ने की है। इस स्टडी के नतीजे एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में प्रकाशित हुए है। इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने माना है कि यूनिवर्स एक ऐसा ग्रह है, जहां जीवन की उम्मीद हो सकती है। फिलहाल जीवन के सूबूत पक्के करने के लिए वैज्ञानिक इस ग्रह की पड़ताल कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इस ग्रह पर जीवन होने की पक्की पुष्टि हो गई तो एचडी 137010 बी सूरज की तरह किसी तारे के पास स्थित अकेला ऐसा ग्रह होगा, जहां इंसान रह सकते हैं। ऐसे में यह वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी कामयाबी मानी जाएगी। बता दें कि इससे पहले वैज्ञानिकों को इसी तरह का दूसरा ग्रह मिला था। यह एक तारे के चारों ओर चक्कर काट रहा है। कैंब्रिज के वैज्ञानिकों की टीम इसे के-2 -18 बी नाम दिया था। यह टीम अंतरिक्ष ग्रह के वातावरण का अध्ययन कर रही है। उसने यहां ऐसे अणुओं के संकेत खोजे हैं जो पृथ्वी पर पाए जाते हैं और जो सिर्फ़ साधारण सूक्ष्म जीवों से ही पैदा होते हैं। ये दूसरी बार है जब जीवन से जुड़े रसायन किसी ग्रह के वातावरण में मिले हैं। इस बार ये किसी ग्रह में जीवन को लेकर ज्यादा संभावना जगाने वाले अध्ययन है। इस टीम और स्वतंत्र खगोलविदों ने इस बात पर जोर दिया है कि इन नतीजों की पुष्टि के लिए और अधिक डेटा की जरूरत होगी।