आईएनएस विक्रांत पर उतरा राफेल एम, फाइटर जेट को मिलेगी न्यूक्लियर वाली शक्ति 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। राफेल फाइटर जेट को लेकर दो बड़ी खबरें सामने आई है। राफेल एम को पहले ही प्रयास में स्वदेशी आईएनएस विक्रांत पर उतारकर नौसेना ने अहम उपलब्धि हासिल की है। वहीं वायुसेना में प्रयोग किए जा रहे राफेल को अब न्यूक्लियर वाली शक्ति मिलने जा रही है। इससे इस फाइटर जेट से परमाणु बम गिराया जा सकेगा।
भारत ने दुनिया को चौंकाया


भारत ने एक कारनामा दिखाकर दिखाकर दुनिया को चौंका दिया है। भारतीय नौसेना ने इसकी फोटो और वीडियो भी जारी किए हैं। बता दें कि गोवा में चल रहे परीक्षणों के दौरान राफेल एम यानी राफेल मरीन फाइटर जेट को स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर सफल लैंडिंग की। खास बात यह है कि ये लैंडिंग पहली कोशिश में ही सफल हो गई। लैंडिंग के एक दिन बाद नौसेना ने इसके फुटेज जारी किए। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह परीक्षण बेहद जरुरी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे इससे पक्का हो जाएगा कि यह जेट स्वेदशी निर्मित कैरियरों के बुनियादी ढांचे के साथ पूरी तरह से अनुकूल है या नहीं। 
दसॉ एविएशन का बनाया लड़ाकू विमान 


बता दें कि राफेल मरीन फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन का बनाया लड़ाकू विमान है। इसे खास तौर पर समुद्र में विमानवाहक पोत से संचालन के लिए तैयार किया गया है। फ्रांस की नौसेना पहले से इसका इस्तेमाल कर रही है। इस विमान का इस्तेमाल हवाई सुरक्षा, समुद्री हमले, निगरानी और जमीन पर मौजूद ठिकानों को निशाना बनाने जैसे अभियानों में किया जा सकता है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री अभियानों को अंजाम देने की क्षमता बढ़ेगी। भारतीय नौसेना के पास फिलहाल दो विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य हैं। रक्षा समझौते के तहत खरीदे जा रहे राफेल मरीन विमानों को दोनों विमानवाहक पोतों से संचालित करने की योजना है। भारत ने 28 अप्रैल 2025 को फ्रांस के साथ करीब 63 हजार करोड़ रुपये का रक्षा समझौता किया था। इसके तहत भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदे जाने हैं। इनमें 22 सिंगल-सीटर और चार ट्विन-सीटर विमान शामिल हैं। इन विमानों की आपूर्ति 2028 के अंत या 2029 की शुरूआत तक होने की संभावना है। यह भारत की ओर से राफेल के नौसैनिक संस्करण की पहली खरीद है। इस सौदे में पायलटों का प्रशिक्षण, फ्लाइट सिम्युलेटर, हथियार, जरूरी उपकरण और लंबे समय तक रखरखाव की सुविधा भी शामिल है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस समझौते में भारतीय हथियारों को राफेल विमानों के साथ जोड़ने के लिए तकनीक हस्तांतरण का प्रावधान भी शामिल है। 
राफेल को मिलेगी न्यूक्लियर पावर 

दूसरी ओर भारतीय वायुसेना की जान राफेल लड़ाकू विमान को अब न्यूक्लियर पावर की ताकत मिलने जा रही है। फॉरवर्ड डिटरेंस योजना के तहत फ्रांस परमाणु क्षमता वाले राफेल लड़ाकू विमानों की सहयोगी देशों में तैनाती पर विचार है। योजना में 10 यूरोपीय देश भी शामिल हैं। राफेल पहले से एएसएमपी-ए परमाणु मिसाइल ले जाने में सक्षम है। इस योजना का मकसद रूस को रोकना है। परमाणु हथियारों का नियंत्रण पेरिस के पास ही रहेगा। इस योजना ने रूस से लेकर अमेरिका तक में खलबली मच गई है। बता दें कि भारत के पास भी फ्रांस का यही राफेल सिस्टम मौजूद है। फ्रांस के इस नए गेम-चेंजर प्लान से राफेल फाइटर जेट्स को असीम मारक क्षमता मिल जाएगी। राफेल केवल एक सामान्य लड़ाकू विमान नहीं बल्कि घातक न्यूक्लियर-टिप वाली एयर-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइल को ले जाने में सक्षम हो जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर युद्ध के हालात बनते हैं, तो राफेल मिनटों में उड़ान भरकर दुश्मन के ठिकानों पर धड़ाधड़ परमाणु हमला कर देगा। समुद्र में तैनात परमाणु पनडुब्बियों के साथ-साथ अब हवा से मिलने वाली यह न्यूक्लियर शक्ति किसी भी दुश्मन देश के सुरक्षा तंत्र को ध्वस्त कर देगी।