एनवीएस-03 नेविगेशन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण, पीएम मोदी ने दी बधाई

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। अब भारत के पास खुद का मजबूत जीपीएस सिस्टम होगा। इसके लिए इसरो ने श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट के जरिए एनवीएस-03 नेविगेशन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया। पीएम मोदी ने इस उपलब्धि के लिए इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई देते हुए कहा कि इससे भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली मजबूती होगी।
इसरो ने हासिल की महत्वपूर्ण सफलता 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से रात 11 बजकर 51 मिनट पर  जीएसएलवी-एफ18 / एनवीएस-03 मिशन की सफल लांचिंग की। यह लांचिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से की गई। इसरो की बड़ी सफलता पर पीएम मोदी ने शुभकामनाएं देते हुए एक्स पर एक पोस्ट लिखी। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि यह मिशन हमारे स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम, नाविक को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बेहतर क्षमताओं से लैस, एनवीएस-03 महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भर बनने के हमारे प्रयासों को आगे बढ़ाएगा। नेविगेशन ऐसी सेवाओं में मदद करेगा जिनसे हमारे देश के लोगों को लाभ मिलेगा। हमारे अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का समर्पण और उनकी सूझबूझ लगातार हमारे देश को गौरवान्वित कर रही है।
वैज्ञानिकों ने प्रक्षेपण को बताई उपलब्धि

इसरो के वैज्ञानिक भी इस प्रक्षेपण को अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की लंबी छलांग मान रहे हैं। उनके अनुसार महत्वाकांक्षी नेविगेशन उपग्रह एनवीएस-03 को सफलतापूर्वक भूस्थिर स्थानांतरण कक्षा यानी जीटीओ में पहुंचा दिया गया है। यह भारत की अंतरिक्ष और तकनीकी ताकत को प्रदर्शित करने वाला अभियान है। बता दें कि मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए इसरो ने 24 घंटे की उलटी गिनती शुरू की थी। यह उलटी गिनती बृहस्पतिवार रात 11 बजकर 51 मिनट पर शुरू हुई थी। जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट 50 मीटर ऊंचा है। इसका वजन 420 टन है। यह तीन चरणों वाला रॉकेट है। इसी रॉकेट के जरिए  एनवीएस-03 नेविगेशन उपग्रह का सफल प्रक्षेपण किया गया। एनवीएस-03 अगली पीढ़ी के नेविगेशन उपग्रहों की श्रृंखला का तीसरा उपग्रह है। यह भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन एनएवीआईसी का अहम हिस्सा है। इसे भारत का अपना जीपीएस भी कहा जा सकता है। इसका इस्तेमाल कई जरूरी सेवाओं में होता है। इनमें लोकेशन पता करना, रास्ता खोजना और सही समय की जानकारी देना शामिल है। यह उपग्रह भारत और उसकी सीमाओं से करीब 1,500 किलोमीटर दूर तक के इलाके में सटीक जानकारी देने में मदद करेगा। इससे लोकेशन, रास्ते और समय का पता लगाने की सुविधा मिलेगी।
किया गया तकनीकी बदलाव 

इसरो ने इस मिशन में एक बड़ा तकनीकी बदलाव किया है। जनवरी 2025 में एनवीएस-02 मिशन के दौरान एक कनेक्टर में खराबी आ गई थी। इस बार ऐसी समस्या से बचने के लिए उपग्रह में बदलाव किए गए। इसके अलावा उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर सुरक्षा से जुड़े सुधार भी लागू किए गए। इस उपग्रह की सबसे बड़ी खासियत इसमें लगी स्वदेशी परमाणु घड़ी है। इसे भारत में ही बनाया गया है। यह बेहद सटीक समय बताने का काम करती है। इसके अलावा, इसमें नया एल1 सिग्नल भी जोड़ा गया है। इससे आम लोगों के स्मार्टफोन और गाड़ियों में नेविगेशन सेवाएं और बेहतर होंगी। इससे रास्ता खोजने में ज्यादा सटीक जानकारी मिल सकेगी।  यह मिशन केंद्र सरकार की एक देश, एक समय पहल को आगे बढ़ाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित होगा। बता दें कि मोदी सरकार ने 29 अगस्त को विधिक मापविज्ञान भारतीय मानक समय नियम, 2026 अधिसूचित किया था। ये नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद यानी नंवबर में लागू होने वाले हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, सटीक और एक समान समय बहुत जरूरी है। यह दूरसंचार, डिजिटल वित्तीय लेनदेन, बिजली ग्रिड, परिवहन और डेटा केंद्रों के सुरक्षित संचालन का आधार है। एनवीएस-03 का सफल प्रक्षेपण देश को समय की जानकारी के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता से पूरी तरह मुक्त करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।