जन प्रवाद, ब्यूरो।
कोलकाता। गुरुवार देर रात निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के उपचुनावों के दौरान तृणमूल कांग्रेस के दोनों विरोधी गुटों को पार्टी का नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया है। इसको लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी भड़क गए। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी को लेकर निर्वाचन आयोग के फैसले पर हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि निर्वाचन आयोग की सांविधानिक जिम्मेदारी लोगों के जनादेश की रक्षा करना है, लेकिन इसके बजाय आयोग उन्हीं ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को पलटती हैं। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही तरीका अपनाया जाता है। भाजपा और निर्वाचन आयोग मिलकर एक पार्टी को बांटने के लिए साथ आते हैं। फिर उसका चुनाव चिह्न छीन लिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब एक पूरी पार्टी ही चुराई जा सकती है, तो यह हैरानी की बात नहीं है कि करोड़ों भारतीयों के वोट भी चुराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि हर राजनीतिक पार्टी की लड़ाई है। यह हर उस मतदाता की लड़ाई है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।
बता दें कि गुरुवार को निर्वाचन आयोग के फैसले की आलोचना की थी। आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के गुटों को पश्चिम बंगाल के उपचुनावों में पार्टी का नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया था।
कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि निर्वाचन आयोग ने अपनी सांविधानिक जिम्मेदारी से पीछे हटने का काम किया है। कांग्रेस ने यह भी कहा था कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का नाम और चुनाव चिह्न जब्त करना मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘देर रात जन्मदिन का तोहफा’ है।

निर्वाचन आयोग ने एआईटीसी के दोनों विरोधी गुटों को उपचुनावों के दौरान पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं करने को कहा है। आयोग ने दोनों से शुक्रवार सुबह तक अपनी पसंद के नाम और चुनाव चिह्न देने को कहा है।
बता दें कि निर्वाचन आयोग ने गुरुवार रात अपना अंतरिम आदेश जारी किया था। आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के नेताओं को सुनने के बाद कहा कि इस मामले पर चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत आयोग को विस्तार से फैसला करना होगा।

अपने अंतरिम आदेश में आयोग ने कहा कि दस्तावेजों में उपलब्ध पूरी जानकारी पर उचित विचार करने के बाद आयोग की राय है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में दो विरोधी समूह हैं। एक का नेतृत्व सुश्री ममता बनर्जी कर रही हैं और दूसरे का नेतृत्व श्री अरूप रॉय कर रहे हैं। आयोग ने कहा कि दोनों समूह अब खुद को पार्टी बता रहे हैं। इसलिए इस मामले पर 1968 के चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश के पैराग्राफ 15 के तहत आयोग को विस्तार से फैसला करना होगा।
आयोग ने कहा कि दोनों विरोधी गुटों को समान स्थिति में रखने के लिए और उनके अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अंतरिम आदेश दिया गया है। आयोग ने कहा कि यह आदेश मौजूदा उपचुनावों के लिए लागू रहेगा।





