जन प्रवाद, ब्यूरो।
नोएडा। महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस के बलिदान दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उन्होंने सोशल मीडिया व्हाट्सएप पर लिखा कि भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान देने वाले खुदीराम बोस जी का अदम्य साहस, अटूट देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा। इतनी कम आयु में उन्होंने जिस निर्भीकता और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रप्रेम और त्याग की प्रेरणा है। मां भारती के इस वीर सपूत को मैं नमन करता हूं।
वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस की उनकी पुण्यतिथि पर मंगलवार को श्रद्धांजलि दी। सीएम योगी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने एक संदेश में कहा कि मां भारती के वीर सपूत, महान क्रांतिकारी खुदीराम बोस की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। उन्होंने इसी पोस्ट में कहा कि बोस ने मातृभूमि की मुक्ति के महायज्ञ में मात्र 18 वर्ष की अल्पायु में स्वयं को समर्पित कर संपूर्ण देश को अंग्रेजों के विरुद्ध जागृत किया और उनका त्याग, तेज और तप प्रत्येक भारतीय को ‘राष्ट्र प्रथम’ के पथ पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि ‘‘देश की स्वाधीनता के महायज्ञ में अपने प्राणों की आहुति देने वाले महान क्रांतिकारी अमर शहीद खुदीराम बोस जी के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!’’
उन्होंने कहा कि बोस का सर्वोच्च बलिदान और राष्ट्र के प्रति अगाध प्रेम हर देशवासी के हृदय में सदैव देशभक्ति की अलख जगाता रहेगा।

बता दें कि खुदीराम बोस का जन्म 3 दिसंबर 1889 को मेदिनीपुर पश्चिम बंगाल में हुआ था। वह ब्रिटिश राज के दौरान फांसी पर चढ़ने वाले सबसे कम उम्र के स्वतंत्रता सेनानी थे। बोस को मुजफ्फरपुर के तत्कालीन मजिस्ट्रेट डगलस किंग्सफोर्ड की हत्या की कोशिश के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। बोस और उनके साथी प्रफुल्ल चाकी ने उस गाड़ी पर बम फेंका था, जिसमें उन्हें शक था कि ब्रिटिश न्यायाधीश यात्रा कर रहे थे। इस घटना में दो ब्रिटिश महिलाओं की मौत हो गई थी। खुदीराम बोस को ब्रिटिश सरकार ने 11 अगस्त 1908 को फांसी दी थी।





