जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। इसरो की एक रिपोर्ट ने भारत समेत दुनिया के कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्तूबर से दिसंबर तक 3 चक्रवात का खतरा मंडरा रहा है। सबसे परेशान वाली बात यह है कि ये तूफान 83 प्रतिशत ज्यादा शक्तिशाली होंगे। इन चक्रवातों के समय तेज हवाओं के साथ होगी भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
एल नीनो ले रहा है विस्तार
एल नीनो अब भारत के लिए केवल दक्षिण-पश्चिम मानसून तक सीमित खतरा नहीं रह गया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी दी है कि यह जलवायु घटना बहुत मजबूत एल नीनो का रूप ले सकती है। यह फरवरी 2027 तक जारी रह सकती है। इसका प्रभाव व्यापक होगा। इसकी जद में दुनिया के कई देश आएंगे। इसमें भारत भी शामिल होगा। लंबे समय तक बने रहने वाला एल नीनो मानसून के बाद की बारिश, जलाशयों का जलस्तर, मिट्टी की नमी, सर्दियों के तापमान तथा रबी फसलों की बुवाई और उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, बारिश के मौसम से सर्दियों की ओर बढ़ते समय यह देश की वायु प्रदूषण की समस्या को भी और जटिल बना सकता है।
इसरो ने बेहद खतरनाक चेतावनी दी
अब इसरो ने बेहद खतरनाक चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार देश के तटीय इलाकों के लिए आने वाले तीन महीने बेहद संवेदनशील होंगे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने उपग्रहों और मौसम निगरानी प्रणालियों से मिले डाटा के आधार पर चेतावनी जारी की है कि अक्तूबर से दिसंबर के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में तीन शक्तिशाली चक्रवाती तूफान बन सकते हैं। इसरो ने आगाह किया है कि चक्रवात के साथ तेज हवाएं, भारी बारिश और समुद्र में ऊंची लहरें आ सकती हैं। इसरो के अनुसार, चक्रवातों की ताकत का सूचकांक 44 साल के औसत से 83 फीसदी ज्यादा रह सकता है। इसका मतलब यह है कि ये चक्रवात पहले के मुकाबले ज्यादा तबाही मचा सकते हैं। रिपोर्ट में अक्तूबर-दिसंबर के लिए 1 करोड़ 30 लाख का पीडीआई पावर डिसिपेशन इंडेक्स बताया गया है। 1982-2025 के दौरान औसत पीडीआई 71 लाख रहा है। बता दें कि पीडीआई एक ऐसा वैज्ञानिक पैमाना है जो किसी चक्रवात की विनाशकारी क्षमता, उसकी अवधि और संख्या को मिलाकर उसकी कुल ऊर्जा का आकलन करता है। पीडीआई की इकाई नॉट्स क्यूब होती है। रिपोर्ट में 1982 से 2025 तक उत्तर हिंद महासागर में मानसून सीजन के बाद आए चक्रवातों की संख्या और उनके पीडीआई का अध्ययन किया गया है। इस अवधि में पीडीआई का औसत 7.15 नॉट्स क्यूब रहा। 2026 के अक्तूबर-दिसंबर में यह 13.06 नॉट्स क्यूब तक पहुंचने का अनुमान है। इससे यह पता चलता है कि इस बार के चक्रवात बेहद खतरनाक होंगे। इसरो की चेतावनी के बाद केंद्र सरकार, मौसम विभाग और तटीय राज्यों के आपदा प्रबंधन विभागों ने स्थिति पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी है। मौसम विभाग ने कहा कि जैसे ही हमें किसी चक्रवात के आने का अंदेशा या सूचना होगी तुंरत तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए चेतावनी जारी की जाएगी। बता दें कि चक्रवात के समय मछुआरों और समुद्र में काम करने वाले लोगों के लिए भी ऐसे मौसम महत्वपूर्ण हैं।





