जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। दिल्ली में ब्रिक्स समिट के लिए विदेशी नेताओं का आगमन शुरू हो गया है। सबसे पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज सुबह 3 बजकर 15 मिनट पर पालम एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे। वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 सितंबर को दिल्ली आएंगे। पुतिन की यात्रा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताई जा रही है।
भारत मंडपम में कार्यक्रम का आयोजन
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की रौनक दिखने वाली है। जिसमें शामिल होने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कई दिनों पहले ही ऐलान कर दिया था। वे आज सुबह 3 बजकर 15 मिनट पर दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पहुंचे। पुतिन की यह यात्रा भारत और रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताई जा रही है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मुलाकात में रक्षा, ऊर्जा और स्वतंत्र विदेश नीति के मोर्चे पर आज कई बड़े फैसले होने की उम्मीद है। रक्षा गलियारों में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह यात्रा किस तरह दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को नए पायदान पर ले जाएगी। सामरिक सौदे प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन के बीच आज होने वाली द्विपक्षीय बैठक के एजेंडे में रक्षा सहयोग सबसे ऊपर है। रूस के साथ इस संभावित रक्षा सौदे और तकनीक हस्तांतरण पर होने वाली ठोस प्रगति से सैन्य तैयारियों को एक नया आयाम मिलेगा। पुतिन की यात्रा का दूसरा बड़ा स्तंभ ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग होगा। पश्चिमी देशों के तमाम दबावों के बावजूद दोनों देशों के बीच कच्चे तेल का व्यापार और ऊर्जा साझेदारी मजबूत बनी हुई है। राष्ट्रपति पुतिन की इस यात्रा के दौरान भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से जुड़ी वार्ताओं को अंतिम रूप दिए जाने की तैयारी है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पुतिन के दौरे पर कहा कि भारत और रूस एक नए द्विपक्षीय निवेश समझौते को तेजी से अंतिम रूप दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर पहुंचाया जाएगा। फिलहाल दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार करीब 60 अरब डॉलर है।
नागरिक विमानन क्षेत्र पर भी बात
इसके अलावा पुतिन की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस अब भारत के साथ सिर्फ पारंपरिक रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं रहना चाहता। वह नागरिक विमानन क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नई दिल्ली में चल रहे इन्नोप्रोम इंडिया प्रदर्शनी में 120 से ज्यादा रूसी और भारतीय कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। यह आयोजन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हो रहा है। इसमें दोनों देशों के औद्योगिक सहयोग को गति मिलने की उम्मीद है। सबसे ज्यादा चर्चा आईएल-114-300 क्षेत्रीय यात्री विमान को लेकर हो रही है। यह विमान छोटी और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए बनाया गया है। प्रस्तावित सौदों में ओमकम एविएशन के लिए 50 विमान, एयर केरल के लिए 20 विमान और स्लीक एविएशन से जुड़े एमओयू के तहत 35 विमान शामिल हैं। विदेश मामलों और आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर ये समझौते सफल होते हैं तो यह न सिर्फ रूसी विमानों के लिए भारतीय बाजार का दरवाजा खोलेगा बल्कि भारत की क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को भी नई दिशा देगा।
विदेशी मेहमानों का दिल्ली पहुंचना जारी
दूसरी ओर ब्रिक्स के लिए अन्य 10 सितंबर की रात से शुरू हो गया है। सबसे पहले ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा दिल्ली पहुंचे। इस बड़ी बैठक में भाग लेने के लिए कुल 25 बड़े नेता और प्रतिनिधि इस समिट में शामिल होंगे। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो भी दिल्ली पहुंचेगी। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, एनडीबी प्रमुख दिलमा रूसेफ और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के पहुंचने का कार्यक्रम है। नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति काशिम शेट्टीमा दिल्ली पहुंचने वाले हैं। इसी तरह शाम होते-होते पालम पर विदेशी नेताओं की आवाजाही और बढ़ेगी। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान दिल्ली आ रहे हैं। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली आज दिल्ली पहुंचेंगे। साथ ही बुरुंडी के राष्ट्रपति इवरिस्ते नदायिशिमिये, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस देर रात तक दिल्ली पहुंचेंगे।
शी जिनपिंग के दौरे सस्पेंश खत्म
वहीं चीन ने शी जिनपिंग के दौरे को लेकर ऐन वक्त तक सस्पेंस बनाए रखा। आखिरी 48 घंटों में चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से कंफर्म किया गया है कि जिनपिंग भारत दौरे पर आ रहे हैं। बता दें कि शी जिनपिंग का ये भारत दौरा कई वजहों से बेहद खास माना जा रहा है। साल 2019 में वे मामल्लापुरम आए थे। उसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव आए। ऐसे में पूरे 7 साल बाद उनका भारत आना अपने आप में एक बड़ा संदेश दे रहा है। चीन ने भले ही आखिरी 48 घंटे तक सस्पेंस रखकर माइंड गेम खेलने की कोशिश की हो, पर भारत मंडपम में उनकी मौजूदगी ने ये साफ कर दिया है कि आज के दौर में कोई भी बड़ी ताकत भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकती। अब देखना यह होगा कि इस दो दिन के महाजुटान से भारत-चीन के रिश्तों और दुनिया की अर्थव्यवस्था को क्या नई दिशा मिलती है। बता दें कि दिग्गज नेताओं के दिल्ली पहुंचने से अब बांग्लादेश पछता रहा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नई दिल्ली न आने के पीछे का करण बताते हुए बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने बयाद दिया। उन्होंने दावा किया कि तारिक रहमान को ब्रिक्स सम्मेलन के लिए भारत से न्योता नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि तारिक रहमान को बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में न्योता मिला था। जबकि तारिक रहमान को प्रधानमंत्री के रूप में न्यौता भेजा जाना चाहिए था।





