जन प्रवाद, ब्यूरो।
नई दिल्ली। अमेकिा-ईरान के बीच चल रही तनातनी को दो माह से अधिक का समय बीत चुका है। हालांकि, युद्ध पर विराम लगा है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से भारत सहित कई देश ईंधन संकट से जूझ रहे हैं। पेट्रोल-डीजल के साथ ही एलपीजी गैस की किल्लत से कई देश परेशान हैं। ईंधन की कमी के साथ ही दरों में भी इजाफा किया गया है। ऐसे में ईरान ने एक नई धमकी दे दी है। सूत्रों की मानें तो ईरान समुद्र के अंदर इंटरनेट केबल पर निशाना बना रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आ रही विभिन्न कंपनियों की केबल पर ईरान टोल वसूलने की बात कह रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे बिछी उन केबल्स को निशाना बना सकता है, जिनके माध्यम से खाड़ी देशों, एशिया और यूरोप के बीच डेटा ट्रांसफर होता है। वहीं ईरान दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों से इन केबल्डस के एवज में टोल टैक्स वसूलने की तैयारी कर रहा है। ईरानी रेवलूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) से जुड़े मीडिया और सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इसकी धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि हम इंटरनेट केबल्स पर शुल्क लगाएंगे।

ईरान के इस प्लान के तहत गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजन जैसी दिग्गज कंपिनयों से इन केबल्स का इस्तेमाल करने पर टोल वसूलेगा। समुद्र के अंदर पड़ी इन केबल्स की मरम्मत और रखरखाव का काम विशेष रूप से केबल ईरान कंपनियों को ही दिया जाएगा। ईरान का कहना है कि अगर टैक कंपनियों ने ईरानी कानून को नहीं माना तो इस रूट के इंटरनेट ट्रैफिक को ठप किया जा सकता है। अगर कहीं ईरान ने इंटरनेट केबल्स को ठप कर दिया तो खाड़ी देशों के साथ-साथ भारत सहित पूरा एशिया और यूरोप का डेटा ट्रांसफर का काम ठप हो जाएगा। वर्तमान में सारा बिजनेस इंटरनेट पर ही टिका हुआ है। अगर ऐसा हुआ तो देशों में दोहरी मार पडेÞगी। ऐसे में आर्थिक स्थिति न सिर्फभारत की बल्कि सभी देशों की ढीली पड़ जाएगी। इससे महंगाई बढ़ेगी साथ ही भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। इसलिए यह जरूरी हो गया है कि अमेरिका और ईरान को जल्द ही आपस में कोई ठोस हल निकालने की आवश्यकता है।





