वैज्ञानिकों ने खोजा दुर्लभ ब्लैक होल, 433 दिनों में बदल जाती है रोशनी

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने 19 साल की निगरानी के बाद बड़ी सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने ऐसा ब्लैक होल में खोजा है जो 433 दिन में दुर्लभ प्रकाश चक्र को बदल देता है। हैरानी वाली बात यह है कि यह एक बार नहीं होता है बल्कि खगोलीय पिंड की चमक हर 433 दिन में एक समान तरीके से बदलती है। इस दुर्लभ घटना को ऑप्टिकल क्वासी-पीरियोडिक आस्सिलेशन कहा जा रहा है।
हमेशा वैज्ञानिकों को चौंकाता रहता है ब्रह्मांड 

ब्रह्मांड हमेशा वैज्ञानिकों को चौंकाता रहता है। जैसे-जैसे हम ब्रह्मांड के बारे में जानकारी जुटा रह हैं, वैसे-वैसे नए-नए राज सामने आ रहे हैं। बता दें कि ब्लैक होल हमेशा से वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़े रहस्यों में से एक रहे हैं। इनकी ताकत, क्षमता और अन्य गतिविधियों की जांच हमेशा से वैज्ञानिक करते आ रहे हैं। अब भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने मिलकर ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठाने की दिशा में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। सुदूर अंतरिक्ष में स्थित कुछ खगोलीय पिंडों की दूरी इतनी अधिक है कि वहां से निकलने वाले प्रकाश को धरती तक का सफर तय करने में अरबों साल लग जाते हैं। इसी क्रम में, भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों के एक संयुक्त दल ने पिछले 19 वर्षों की अथक निगरानी के बाद एक विशालकाय ब्लैक होल में रोशनी का एक बेहद दुर्लभ और अनोखा चक्र खोज निकाला है। यह क्रांतिकारी खोज ब्लैक होल के व्यवहार और आकाशगंगाओं की कार्यप्रणाली को समझने के नजरिए को पूरी तरह बदल सकती है। वैज्ञानिकों ने इस ब्लैकहोल को 3सी 454.3 नाम दिया है। इसके भीतर बेहद चमकीले क्वासर यानी ब्लेजर में एक रहस्यमय दोहराव वाला पैटर्न खोजा है। होल अर्थ ब्लेजर टेलीस्कोप परियोजना के तहत लगातार 19 वर्षों तक इसके आंकड़ों का बारीकी से अध्ययन किया गया। इस लंबी रिसर्च में यह बात सामने आई है कि इस खगोलीय वस्तु की चमक लगभग हर 433 दिन में एक समान तरीके से बदलती रहती है। विज्ञान की भाषा में इस घटना को आॅप्टिकल क्वासी-पीरियोडिक ऑस्सिलेशन कहा जा रहा है। इसका सीधा सा मतलब यह है कि इस ब्लैक होल से निकलने वाली रोशनी बिना किसी नियम के नहीं, बल्कि एक तय समय यानी लगभग 433 दिन के अंतराल पर बार-बार बढ़ती और घटती है। इस अहम रिसर्च में भारत के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ आब्जर्वेशनल साइंसेज यानी एआरआईईएस के वैज्ञानिकों ने भी बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
454.3 एक ब्लेजर है 3सी 

शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के अनुसार 3सी 454.3 एक ब्लेजर है। यह सक्रिय आकाशगंगाओं का ही एक विशेष और अत्यंत ऊर्जावान रूप है। इन आकाशगंगाओं के केंद्र में एक महाकाय ब्लैक होल स्थित होता है। यह अपने आसपास मौजूद गैस, धूल और अन्य पदार्थों को भीषण गति से अपनी ओर खींच रहा है। इस प्रक्रिया में अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जिससे आकाशगंगा का मध्य भाग यानी एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस अप्रत्याशित रूप से चमकने लगता है। जब इस चमकते हुए केंद्र से निकलने वाली शक्तिशाली ऊर्जा की लपटें या जेट सीधे हमारी पृथ्वी की दिशा में होती हैं, तो उसे ब्लेजर कहा जाता है।
3सी 454.3 का रेडशिफ्ट

वैज्ञानिकों के अनुसार 3सी 454.3 का रेडशिफ्ट 0.86 है। वैज्ञानिक भाषा में इसे समझें तो इसका मतलब है कि इसकी तेज रोशनी अरबों वर्षों की लंबी यात्रा करके हमारी पृथ्वी तक पहुंचती है। इसके केंद्र में मौजूद विशाल ब्लैक होल का द्रव्यमान लगभग 50 करोड़ से लेकर 230 करोड़ सूर्यों के बराबर माना जाता है। इतने विशाल और अत्यधिक सक्रिय ब्लैक होल में लगातार दोहराने वाला यह प्रकाश पैटर्न मिलना हैरानी की बात है। अब यह खोज वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगी कि इस ब्रह्मांड के सबसे ज्यादा ऊर्जावान स्रोत आखिर किस तरह से काम करते हैं। साथ ही भविष्य में ब्लैक होल के आसपास बनने वाली शक्तिशाली जेट्स, उसके चुंबकीय क्षेत्रों और भारी ऊर्जा निकलने की पूरी प्रक्रियाओं को अच्छे से समझा जा सकेगा।