जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। इन दिनों पीली धातु यानी सोने की चर्चा खूब तेज हो गई है। इस बार देश में सोने के बढ़ते दामों के बीच भारत का एक राज्य सोना उगलने की तैयारी में है। कुरनूल जिले के जोन्नागिरी में देश की इतिहास में पहली बार बड़ी प्राइवेट गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग परियोजना की शुरुआत हो चुकी है। वहीं दो अन्य राज्यों की खदानों से भी सोना निकालने की तैयारी हो गई है।
सोना न खरीदने की अपील
पीएम मोदी द्वारा कुछ समय पहले सोना न खरीदने की अपील आपको याद होगी। उन्होनें अमेरिका और ईरान के युद्ध के चलते हो रही परेशानियों के चलते देशवासियों से यह अपील की थी। जिसमें एक साल तक सोना न खरीदने और विदेश यात्रा पर न जाने जैसी अपील शामिल थी। जिसके बाद अचानक पूरे देश में सोने की खपत को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। अब जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त चुका है तो एक बार फिर भारत में सोने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बता दें कि इस बार चर्चा सोने की खपत या कीमतों को लेकर नहीं बल्कि देश के पहले प्राइवेट गोल्ड माइन खुलने को लेकर हो रही है। यह गोल्ड माइन आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले के जोन्नागिरी गांव में शुरू हुई है। जिसके बाद इस गांव का नाम स्वर्णगिरी पड़ गया। माना जा रहा है कि आंध्र प्रदेश के अलावा देश के कई और दूसरे राज्यों में भी जल्द ही ऐसी कई और प्राइवेट गोल्ड माइन खोले जाने का प्लान है।
देश की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन
इस पूरी योजना के बारे में बात करें तो यह आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले के जोन्नागिरी गांव में देश की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन है। इसे करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है। शुरूआती सर्वेक्षणों में यहां 13 टन से अधिक सोने के भंडार की बात कही जा रही है, जबकि आगे की खोज के बाद इस आंकड़े के 42 टन तक पहुंचने की संभावना है। माना जा रहा है कि सरकार आने वाले दिनों में देश में ऐसे और प्राइवेट गोल्ड माइन को अपनी स्वीकृति दे सकती है।
नई उम्मीद लेकर आई है परियोजना
केंद्र सरकार के अनुसार यह परियोजना नई उम्मीद लेकर आई है। योजना के तहत दूसरे साल से यहां सोने का उत्पादन बढ़कर 900 किलोग्राम हो सकता है। आगे चलकर हर साल 2 टन सोना उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। आंध्र प्रदेश सरकार का कहना है कि यह परियोजना केवल स्वर्ण उत्खनन के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसके जरिए करीब 700 लोगों को रोजगार मिलने की भी संभावना है। साथ ही राज्य सरकार को इस परियोजना से बड़ा आर्थिक लाभ भी होगा। सोने के उत्पादन मूल्य पर सरकार को 4 प्रतिशत रॉयल्टी मिलेगी। देखा जाए तो यह परियोजना न सिर्फ खनन क्षेत्र के साथ-साथ स्थानीय विकास, रोजगार और आर्थिक मजबूती के लिहाज से भी एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
अन्य खदानों पर भी बात
इस प्राइवेट सोने की खदान को लेकर अन्य खदानों पर भी बात हो रही है। केंद्र सरकार ने संभावना जताई है कि आंध्र प्रदेश के बाद ओडिशा को भारत का अगला प्रमुख सोना उत्पादक राज्य बनने की संभावना। यहां देवगढ़, क्योंझर और मयूरभंज में भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान सोने के भंडार के मिलने के संकेत हैं। शुरूआती अनुमान के अनुसार लगभग 1,685 किलोग्राम सोने के अयस्क की संभावना जताई जा रही है। इसी तरह कर्नाटक के कोप्पल और रायचूर में सोने की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। इन दो राज्यों के अलावा मध्य प्रदेश में भी संभावित भंडार के संकेत मिले हैं। मध्य प्रदेश के जबलपुर की महाकौशल बेल्ट में सोने की संभावनाएं चर्चा में हैं। अगर यहां सोने की पुष्टि हो जाती है सोने के अलावा यहां तांबा आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिल सकता है। अगर इन तीनों राज्यों की ये खदाने शुरू हो गई तो माना जा रहा है कि देश में सोने के ऊंचे दामों से राहत मिलेगी। बता दें कि भारत सोने की खपत के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश है। भारत में हर साल 700-800 टन सोना खपत होता है। जिसका लगभग 99 प्रतिशत दूसरे देशों से निर्यात किया जाता है। यानी भारत खपत के मामले में सबसे आगे है, लेकिन उत्पादन के मामले में काफी पीछे है।





