जन प्रवाद, ब्यूरो।
नोएडा। डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई ध्रुवास्त्र मिसाइल अब पूरी तरह से तैयार है। भारतीय सेना के बेडे में इसे जल्द ही शामिल जाएगा। ध्रुवास्त्र हेलीकॉप्टर से दागी जाने वाली मिसाइल है। यह नाग एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का आधुनिक संस्करण है। यह ऊंचे स्थानों पर दुश्मन का काम तमाम कर देगी। इसके निर्माण होने से भारतीय वायु और थल सेना दोनों की मारक क्षमता में इजाफा होगा।

बता दें कि ध्रुवास्त्र भारत के इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम का भी भाग है। वर्ष 1980 में इस मिसाइल की परिकल्पना डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने की थी। इसके जमीन और मैन पोर्टेबल जैसे कई संस्करण बनकर तैयार हो चुके हैं। धु्रवास्त्र इनका ही अत्याधुनिक वर्जन है। इसकी थर्ड जरनेशन फायर और फॉरगेट प्रणाली इसे सबसे ज्यादा ताकतवर बनाती है। एक बार लक्ष्य साधने के बाद यह पीछे मुड़कर नहीं देखती और दुश्मन को नष्ट करके ही दम लेती है। सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह खराब मौसम और रात के अंधेरे में भी दुश्मन को ढूंढ लेती है और उसके खत्म कर देती है। इसकी एक खास बात और है। यह पहले ऊंचे आसमान में जाती है उसके बाद ऊपर से नीचे की तरफ आकर दुश्मन को नेस्तनाबूत कर देती है। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है। इसे रुद्र और प्रचंड जैसे अटैक हेलीकॉप्टरों द्वारा दागा जाता है।





