जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। देश की सबसे लंबी और सबसे चुनौतीपूर्ण जोजिला टनल का ब्रेकथ्रू पूरा हो गया है। इसके बाद यह सुरंग दोनों छोर से मिल गई और आर-पार खुल गई है। इसके बाद सुरंग को फरवरी 2028 में जनता के लिए खोले जाने की संभावना है। इससे 2 घंटे का सफर महज 30 मिनट में पूरा हो जाएगा।
नितिन गडकरी ने दबाया बटन
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग पहुंचकर ऐतिहासिक बटन दबाया। इसके बाद जोजिला सुरंग के दोनों छोर आपस में मिल गए। यह 14.15 किलोमीटर लंबी सुरंग सिर्फ एक सुरंग नहीं, बल्कि दशकों पुराना बड़ा सपना पूरा हुआ है। यह एशिया की सबसे लंबी सिंगल-ट्यूब बाई-डारेक्शनल सड़क सुरंग है। इसकी कहानी सिर्फ लंबाई और रिकॉर्ड तक सीमित नहीं बल्कि इसमें हिमालय की बफीर्ली चट्टानों से लोहा लेने का रोमांच और भारतीय सेना की रणनीतिक मजबूती छिपी है। यह इंजीनियरिंग का एक ऐसा कारनामा है जिसे अंजाम देने में कई देश घुटने टेक देंगे।
11,578 फीट की ऊंचाई पर टनल
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में 11,578 फीट की ऊंचाई पर बनी 13.14 किलोमीटर लंबी जोजिला टनल का एक विस्फोट के बाद अंतिम ब्रेकथ्रू किया गया। बता दें कि टनल के निर्माण कार्य में ब्रेकथ्रू उस स्थिति को कहते हैं जब टनल की खुदाई दोनों दिशाओं से पूरी हो जाती है। साथ ही सुरंग दोनों ओर आर-पार के लिए खुल जाती है। ऐसे में समझा जा सकता है कि टनल दोनों छोर से खुल गई है। अब इसके जरिए आवाजाही शुरू होगी। यह देश के इंफ्रास्ट्रक्चर के इतिहास में एक अहम पड़ाव होगा। बता दें कि जोजिला टनल दुनिया की सबसे लंबी दो-तरफा सुरंग है। इसके पूरा होने पर कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में कनेक्टिविटी बनी रहेगी। इससे ट्रांसपोर्ट लिंक बेहतर होंगे और इस इलाके का रणनीतिक महत्व और मजबूत होगा।
सफलतापूर्वक भेदी सुरंग
अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के भीतर अंतिम 2.5 मीटर की दूरी को सफलतापूर्वक भेद दिया गया है। इस सफलता ने कश्मीर घाटी और लद्दाख के बीच हर मौसम में संपर्क बना रहेगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि जोजिला टनल केवल एक सुरंग नहीं, बल्कि विकास का एक द्वार है। इस सुरंग के निर्माण के बाद सोनमर्ग से मिनामार्ग तक की लगभग 2 घंटे की यात्रा घटकर मात्र 30 मिनट रह जाएगी। इससे समय और ईंधन की बचत होगी।
व्यापार को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दुर्घटनाएं एवं हिम स्खलन की जोखिम में कमी आएगी। क्षेत्र में पर्यटन और व्यापार को नई गति मिलेगी तथा सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच और अधिक सुदृढ़ होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी यह परियोजना गेम चेंजर साबित होगी। वर्ष भर संपर्क उपलब्ध होने से भारतीय सेना की आवाजाही तथा सेना सामग्री, उपकरणों और रसद की आपूर्ति अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी बन सकेगी, जिससे देश की सामरिक तैयारियों को नई मजबूती मिलेगी। यह परियोजना आल-वेदर कनेक्टिविटी स्थापित कर क्षेत्रीय विकास और राष्ट्रीय एकीकरण को नई शक्ति प्रदान करेगी।
सिविल कार्यों में लगेंगे 7-8 महीने
राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम के अधिकारियों ने बताया कि यह सफलता निर्धारित समय से छह महीने पहले हासिल कर ली गई है। अधिकारियों के मुताबिक, सुरंग को फरवरी 2028 में जनता के लिए खोले जाने की संभावना है। सिविल कार्यों में 7-8 महीने और लगेंगे और उसके बाद बिजली का काम शुरू होगा। यह सुरंग 9.5 मीटर चौड़ी, 7.57 मीटर ऊंची और 13.153 किलोमीटर लंबी है। यह समुद्र तल से लगभग 11,578 फुट की ऊंचाई पर बनाई जा रही है। यह घोड़े की नाल यानी हॉर्सशू के आकार की सिंगल-ट्यूब, दो-लेन वाली सड़क सुरंग है।





