रूस ने जिक-जैक मिसाइल से उठाया पर्दा, मिसाइल का प्रदर्शन कर दुनिया को चौंकाया

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। रूस ने अपनी जिक-जैक मिसाइल का प्रदर्शन कर पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस मिसाइल की खासियत जानकर दुनियाभर के वैज्ञानिक और रक्षा विशेषज्ञ हैरान हैं। ये मिसाइल है जिग-जैग यानी सांप की तरह चलती है। इसे किसी भी देश का रडार पकड़ नहीं सकता है। यह मैक 27 यानी 33,000 किलोमीटर प्रति घंटा की अकल्पनीय स्पीड से वार कर सकती है।
हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल से उठा पर्दा

रूस ने एवनगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल मिसाइल के राज से पर्दा उठा दिया है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह मैक 27 यानी 33,000 किलोमीटर प्रति घंटा की की अकल्पनीय टॉप स्पीड से उड़ने वाला दुनिया का सबसे घातक हथियार है। यह मिसाइल 18,000 किलोमीटर दूर तक सटीक हमला करने में सक्षम है। यह अपने साथ 2 मेगाटन परमाणु पेलोड वजन यानी गोला बारूद ले जा सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिस्टम हवा में जिÞग-जैग रास्ता बदल सकता है। अत्यधिक घर्षण के सयम 2,000 डिग्री तापमान झेलने में सक्षम है। इसकी खास बॉडी प्लाज्मा शील्ड बनाती है। ऐसे में इसके सामने अमेरिक का अरबों में बना थाड समेत दुनिया के सभी रडार और डिफेंस सिस्टम पूरी तरह लाचार हो जाते हैं। 
उड़ता हुआ भूत आया सामने 

रक्षा जानकार इसे पुतिन का उड़ता हुआ भूत बता रहे हैं। यह बैलिस्टिक मिसाइल की तरह सीधे वार नहीं करती है। बल्कि जहरीले सांप की तरह लहराते हुए पल-पल रास्ता बदलती रहती है। ऐसे में इसे ट्रैक कर नष्ट कर पाना नामुमकिन है। बता दें कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जब 2018 में देश के छह सबसे घातक रणनीतिक हथियारों की घोषणा की थी तब एवनगार्ड को रूस की तकनीकी सर्वोच्चता का प्रतीक बताया गया था। दिसंबर 2019 में इसे रूसी सेना में आधिकारिक तौर पर तैनात किया गया।  धीरे-धीरे इस तकनीक को विकसित किया गया। इसे समय मे साथ मारक बनाया गया। अब यही तकनीक एवनगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल मिसाइल के रूप में परिवर्तित हो चुकी है। अगर इस मिसाइल के काम करने के तरीकों की बात करें तो यह चौंकाने वाली प्रक्रिया है। सबसे पहले नई मिसाइल  एवनगार्ड को आरएस-18बी और आरएस-28 सरमत जैसी भारी इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइलों के ऊपर पेलोड के रूप में फिट किया जाता है। इसके बाद इसे अंतरिक्ष की ओर दाग दिया जाता है। निश्चित ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, यह ग्लाइड व्हीकल रॉकेट से अलग हो जाता है। इसके बाद  यह मिसाइलयह पृथ्वी के वायुमंडल की ऊपरी परतों में प्रवेश जाती है। वायुमंडल में पहुंचते ही यह मिसाइल अपना असली खेल और रंग दिखाती है। यह भौतिकी के पारंपरिक नियमों को चुनौती देते हुए दुश्मन के रडार को अंधा कर देती है। इसकी मारक रेंज इतनी ज्यादा है कि अगर इसे रूस से दागा जाए तो यह अमेरिका या दुनिया के किसी भी कोने में सटीक हमला कर सकती है। अन्य मिसाइलों से इसकी तुलना करें तो पारंपरिक मिसाइलें एक फिक्स रास्ते पर चलती हैं। जिससे इसे पकड़ना आसान है।  बता दें कि एवनगार्ड की तैनाती के बाद रूस ने नाटो और अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया है कि उनके द्वारा बनाई गई वैश्विक मिसाइल डिफेंस दीवार अब किसी काम की नहीं रह गई है। ऐसे में कहा जा सकता है कि एवनगार्ड रूस को फर्स्ट स्ट्राइक यानी पहले हमला करने और सेकंड स्ट्राइक यानी जवाब देने दोनों स्थितियों में एकतरफा बढ़त दिलाता है7 अमेरिका ने पिछले कई दशकों में दुनिया भर में जो मिसाइल डिफेंस नेटवर्क तैयार किया था, वह आईसीबीएम के परवलयिक पथ को ध्यान में रखकर बनाया गया था। एवनगार्ड इस नेटवर्क की सबसे बड़ी कमजोरी पर वार करता है। यह वायुमंडल की घनी परतों के ठीक ऊपर यानी करीब 40-100 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ती है। इस ऊंचाई पर न तो अंतरिक्ष वाले अर्ली वार्निंग सैटेलाइट इसे सही से ट्रैक कर पाते हैं और न ही जमीन पर मौजूद शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस मिसाइलें इसे छू सकती हैं। सरल शब्दों में कहें तो एवनगार्ड ने हथियारों की होड़ में डिफेंस की तकनीक को कई साल पीछे धकेल दिया है।