इस हफ्ते इतिहास रचेगी नौसेना, मिलेंगे तीन विध्वंसक युद्धपोत

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। भारतीय नौसेना इस हफ्ते इतिहास रचने जा रही है। सात दिनों के भीतर ही कोलकाता में तीन युद्धपोतों का कमीशन करेगी। ये तीनों युद्धपोत एक से बढ़कर एक हैं। इनकी ताकत जानकार भारतीय जल सीमा में दुश्मन देश घुसने से पहले सौ बार सोचेगा।
नौसेना के पास होगा दुश्मनों का काल 

भारतीय नौसेना इस हफ्ते तीन मारक और दुश्मनों का काल कहे जाने वाले तीन युद्धपोतों को कमीशन करने वाली है। इस कमीशन के बाद भारतीय नौसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा होगा। इसके अलावा चीन और पाकिस्तान की भी टेंशन बढ़ने वाली है क्योंकि समुद्र में भारतीय नौसेना की निगरानी चप्पे-चप्पे पर बढ़ जाएगी। जिन तीन युद्धपोतों को नौसेना कमीशन करने वाली है उनके नाम आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस अग्रे और आईएनएस संशोधक हैं।यह देश के नौसैनिक आधुनिकीकरण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। सूत्रों के अनुसार, समारोह में केंद्र सरकार के एक शीर्ष अधिकारी के शामिल होने की उम्मीद है। यह संभवत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोलकाता यात्रा के साथ ही आयोजित किया जाएगा। कोलकाता में होने वाला समारोह हाल के वर्षों में दूसरा ऐसा अवसर होगा जब तीन अग्रणी नौसैनिक प्लेटफार्मों को एक साथ कमीशन किया जाएगा। इससे पहले ऐसा आयोजन पिछले साल जनवरी में हुआ था, जब प्रधानमंत्री मोदी ने मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में विध्वंसक जहाज आईएनएस सूरत, फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी और पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर को कमीशन किया था।

बेहद मारक है दूनागिरी 

आईएनएस दूनागिरी की बात करें तो यह समंदर के पानी में पहुंचते ही घातक बन जाता है। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित इस श्रेणी का दूसरा फ्रिगेट है। यह फ्रिगेट ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और क्लोज-इन वेपन सिस्टम से लैस है। इसे कंबाइंड डीजल या गैस प्रोपल्शन सिस्टम से पावर मिलती है और इसमें इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम लगा है। वहीं, इस युद्धपोत को 80 महीनों में तैयार करके सौंपा गया है। बता दें कि इससे पहले वाले युद्धपोत, आईएनएस नीलगिरी को तैयार होने में 93 महीने लगे थे। प्रोजेक्ट 17ए के दो और फ्रिगेट, आईएनएस महेंद्रगिरी और आईएनएस विंध्यगिरी, अभी कमीशन किए जाने बाकी हैं।
तटीय सुरक्षा मजबूत करेगा अग्रे

आईएनएस अग्रे के बारे में बात करें तो यह 2013 में स्वीकृत 16-जहाजों वाले अर्नाना श्रेणी के पनडुब्बी रोधी उथले जलयान (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) कार्यक्रम के तहत पांचवां पोत है। तटीय जलक्षेत्र में संचालन के लिए डिजाइन किया गया यह पोत हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर और उन्नत सोनार प्रणालियों से सुसज्जित है। यह प्लेटफार्म विशेष रूप से उथले तटीय जल में पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए तैयार किया गया है। 
सर्वेक्षण पोत से सुरक्षा होगी मजबूत

इसी तरह आईएनएस संशोधक संधायक श्रेणी के सर्वेक्षण पोत कार्यक्रम का चौथा और अंतिम पोत है। 110 मीटर लंबा यह पोत लगभग 3,300 टन भार वहन करता है। स्वायत्त जलमार्ग वाहन यानी एयूवी और दूरस्थ रूप से संचालित वाहन आरओवी से लैस है। यह समुद्र तल मानचित्रण और नौवहन चार्टिंग के लिए उपयोग की जाने वाली उन्नत जलवैज्ञानिक सर्वेक्षण प्रणालियों से सुसज्जित है। ये तीनों पोत मिलकर भारतीय नौसेना की सतही युद्ध, पनडुब्बी रोधी अभियानों और जलवैज्ञानिक सर्वेक्षण में क्षमताओं को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेंगे, जिससे भारत की समुद्री सुरक्षा और परिचालन तत्परता में और वृद्धि होगी।