जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। लगता है कि ब्रिक्स की सफलता के बाद अमेरिका बौखला गया है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने महत्वपूर्ण विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए मतदान किया है। यह विधेयक ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार देगा। इसमें भारत और अन्य देश शामिल हैं। इस विधेयक से ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों का विस्तार होगा।
डोनाल्ड ट्रंप पर असर
ब्रिक्स सम्मेलन की तस्वीरों का अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर क्या असर हुआ है, इसके रुझान सामने आने लगे हैं। भारत, चीन और रूस के बीच बढ़ती नजदीकी और रूस से भारत की लगातार कच्चे तेल की खरीद ने एक बार फिर अमेरिका का ध्यान भारत की ओर खींचा है। बता दें कि नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में ईरान के साथ भारत की नजदीकी, चीन-रूस के साथ दोस्ताना रिश्तों ने अमेरिका के सिर का दर्द बढ़ा दिया है। यही वजह है कि अमेरिका अब रिपब्लिकन पार्टी के दिवंगत सासंद लिंडसे ओ ग्राहम के नाम पर सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट का बम भारत पर फोड़ना चाहता है। बता कि अमेरिका का ये ऐसा विधेयक है, जिसका असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ सकता है। अमेरिकी सीनेट इस विधेयक को पारित कर चुकी है। इस बिल को आगे बढ़ाने के पक्ष में 214 और इसके खिलाफ 211 वोट पड़े। अब इसे प्रतिनिधि सभा यानि हाउस आॅफ रिप्रेजेंटेटिव्स में चर्चा और मतदान के लिए रखा गया है। बता दें कि इस विधेयक में उन देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान है, जो रूस से तेल खरीदते हैं।
एफटीए पर चल रही है बात
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अगर व्हाइट हाउस इस बिल को मंजूरी देता है, तो इससे भारत और अमेरिका के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच अभी एफटीए यानी मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। भारत सरकार इस घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही है। फिलहाल, व्हाइट हाउस इस बिल को लेकर अमेरिकी सीनेटरों की राय से सहमत नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पत्रकारों को बताया कि भारत की ऊर्जा खरीद नीति राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर द्वारा पेश किए गए संशोधन में चीन, भारत, तुर्की, अजरबैजान, हंगरी का नाम शामिल हैं। इसके अलावा स्लोवाक रिपब्लिक, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक को शामिल करने का प्रस्ताव है। इन देशों पर 100 प्रतिशत ड्यूटी लगाई जा सकती है। हाउस रूल्स कमेटी ने रूस प्रतिबंध अधिनियम में संशोधन सार्वजनिक किए। बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप को हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने से पहले इस बिल को हाउस आॅफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी मिलनी जरूरी थी। पिछले साल ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था। बाद में भारत के साथ व्यापार समझौते की बातचीत आगे बढ़ने पर इसे हटा लिया था। रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना लगभग 2 मिलियन बैरल कच्चे तेल का आयात किया था। अगस्त में नई दिल्ली के कच्चे तेल के आयात में मॉस्को की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत तक पहुंच गईथी। जुलाई की तुलना में भारत का रूस से आयात कम हुआ लेकिन इसके फिर से बढ़ने की उम्मीद है।
भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान
दूसरी ओर भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा है कि अमेरिका भले ही टैरिफ लगा ले, भारत दबाव में नहीं आएगा। रूस से तेल की खरीद जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले अपने 140 करोड़ नागरिकों के हितों को ध्यान में रखकर करता है। वह आगे भी इस पर कायम रहेगा। बता दें कि यह पहली बार नहीं जब रूस से तेल खरीदने पर भारत को निशाना बनाया गया। अमेरिका इस मुद्दे को लेकर भारत को कई बार निशाना बना चुका है। अमेरिका ने आरोप लगाए है कि भारत रूस से तेल खरीद कर यूक्रेन युद्ध में उसकी आर्थिक मदद कर रहा है। अमेरिका ने इसका हवाला देते हुए पिछले साल भारत पर 25 से 50 फीसदी तक टैरिफ लगा दिया था।





