जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। कश्मीर को लेकर अमेरिका का सालों पुराना रुख बदल चुका है। विदेशी मामलों के जानकार इसे मोदी सरकार की बड़ी रणनीतिक जीत बता रहे हैं। यह बातें तब होने लगी जब श्रीनगर पहुंचे अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर ने कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। इसको लेकर एक तरफ जहां पाकिस्तान ने अमेरिकी राजदूत को तलब कर नाराजगी जताई वहीं भारत ने भी पाकिस्तान को उसी की भाषा में करारा जबाव दिया।
अमेरिका राजदूत सर्जियो गोर का बयान
अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर बुधवार को जम्मू-कश्मीर पहुंचे। श्रीनगर में सीएम उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहा सबसे गौर करने वाली बात यह हैकिग यह पहली बार हुआ जब अमेरिका के किसी प्रतिनिधि ने जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र जैसे किसी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। गोर ने कश्मीर मुद्दे का जिक्र करते समय पाकिस्तान का नाम तक नहीं लिया। खास बात यह है कि गोर केवल अमेरिकी राजदूत नहीं, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साउथ और मध्य एशिया के विशेष दूत भी हैं। ऐसे में उनके शब्दों का चयन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बता दें कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात के बाद गोर ने कहा कि पहली बार यहां आना उनके लिए खुशी की बात है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को बेहद खूबसूरत जगह बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के साथ उनकी बहुत अच्छी बैठक हुई है। कुछ मुद्दों पर आगे काम किया जाना है और वह इससे जुड़ी बातों को वॉशिंगटन और दिल्ली लेकर जाएंगे।
सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि नई दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री व प्रशासन ने क्षेत्र को सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि परिस्थितियां इसी तरह बेहतर होती रहीं तो अमेरिका की यात्रा सलाह में बदलाव की संभावना बन सकती है। जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता और यहां मौजूद संभावनाओं को देखते हुए बड़ी संख्या में अमेरिकी पर्यटक यहां आना पसंद कर सकते हैं। गोर का बयान भारत के प्रति अमेरिकी दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का जिक्र न करने पर पाकिस्तान भड़क गया। पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री जलील जिलानी ने इसे अपनी पुरानी नीति का अपमान बताकर कड़ा ऐतराज जताया। पाकिस्तान को सबसे बड़ी मिर्ची इस बात की लगी है कि अमेरिका जैसे सुपरपावर के बड़े अधिकारी ने सार्वजनिक तौर पर कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मान लिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का झूठा प्रोपेगैंडा एक ही झटके में ध्वस्त हो गया। अपनी खीझ मिटाने और दुनिया के सामने अपनी साख बचाने के लिए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में तैनात अमेरिकी उप-राजदूत को फौरन दफ्तर तलब कर लिया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अमेरिकी राजनयिक के सामने अपनी भारी नाराजगी जताई और एक विरोध पत्र सौंपा। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने अपने बयान में कहा कि वह जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा बताए जाने की कड़ी निंदा और स्पष्ट रूप से खारिज करता है। पाकिस्तान ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विवादित क्षेत्र है। इसका अंतिम फैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए।
भारत ने की सख्त कार्रवाई
पाकिस्तान की इस हरकत पर भारत ने सख्त कार्रवाई की है। भारतीय अधिकारियों ने दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर का सुरक्षा घेरा हटाने का फैसला लिया है। हाई कमीशन के बाहर से सामने आए वीडियो में देखा गया कि उच्चायोग के बाहर बाड़े की तरह लगाया गया बाहरी सुरक्षा घेरा हटा दिया गया है। अधिकारियों ने ट्रैफिक बोलार्ड और बैरिकेड्स भी हटा दिए हैं। बता दें कि पहले इस डिप्लोमैटिक परिसर की सुरक्षा के कारण यहां घेरा बनाकर रखा गया था। दूसरी ओर भारत और अमेरिका के रिश्तों पर मशहूर साउथ एशिया एनालिस्ट माइकल कुगेलमैन ने अपनी राय जाहिर की। उन्होंने कहा कि गोर के दौरे और बयान ने भारत-अमेरिका रिश्तों में नई जान फूंक दी है। यह अमेरिका-पाकिस्तान के सुधरते रिश्तों के लिए बड़ा झटका है।





