चीनी के दाम में भारी बढ़ोत्तरी, सरकार के आदेश ने व्यापारियों की बढ़ाई बेचैनी

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। देश के कई खाद्य वस्तुओं समेत चीनी के दाम अचानक बढ़ गए हैं। चीनी के भाव इस समय 65 रुपये प्रति किलो से ज्यादा हो चुके हैं। वहीं सरकार के एक आदेश ने लोगों की बेचैनी बढ़ा दी है। आदेश के अनुसार चीनी कारोबारी 15 से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। ऐसे यह जानना जरुरी हो जाता है कि आखिरकार सरकार ने ऐसा आदेश क्यों जारी किया है।
भारत चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता 
भारत दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। हर बार की तरह इदस बार भी त्योहारी मौसम शुरू होने से पहले ही चीनी के दामों में तेजी आ चुकी है। खुदरा बाजार में चीनी पहली बार 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। कारोबारियों के अनुसार, पिछले 15 दिन में इसके दाम करीब 15 रुपये प्रति किलो तक बढ़े हैं। कारोबारियों का कहना है कि सीजन के अंतिम दौर में चीनी का भंडार कम है। मांग के मुकाबले आपूर्ति घटने से दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इस बारे में चीनी कारोबारियों का कहना हैकि कि बाजार में मांग की तुलना में करीब आधी ही चीनी की आपूर्ति हो पा रही है। आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और दिवाली जैसे त्योहारों से मांग और बढ़ेगी। इससे चीनी के दाम में और तेजी आने की आशंका है। ऐसे में चीनी बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नए आदेश के अनुसार चीनी का स्टॉक रखने के नियम और सख्त कर दिए हैं। अब एक महीने में 10 मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी का इस्तेमाल या कारोबार करने वाले डीलर 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक अपने पास नहीं रख सकेंगे। यह नियम नियम 1 सितंबर से लागू होगा और 30 नवंबर तक जारी रहेगा। बता दें कि सरकार का यह कदम बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए उठाया गया है। बता दें कि त्यौहारी मौसम में घरों के अलावा बिस्किट, मिठाई और दूसरी खाद्य कंपनियां भी इस दौरान चीनी ज्यादा खरीदती हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और जमाखोरी के कारण कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी न हो, और इसी के चलते ये फैसला लिया गया ह। सरकार ने पिछले महीने ही कारोबारियों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की लीमिट 30 दिन कर दी थी। इसके बाद भी कीमतों में तेजी से उछाल दर्ज किया गया। अब सरकार ने इस अवधि को घटाकर सिर्फ 15 दिन कर दी है। थोक कारोबारी और बड़े खरीदार अगर इस नियमों का पालन नहीं करेंंगे तो उन पर कठोर कार्रवाई होगी। एक व्यापारी के अनुसार 15 दिन पहले चीनी 48 से 50 रुपये किलो बिक रही थी। अब इसका भाव बढ़कर 65 रुपये किलो तक पहुंच गया है। कारोबारियों का कहना है कि इस बार चीनी का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले करीब पांच फीसदी कम रहा है। इसका असर बाजार में उपलब्ध भंडार पर पड़ा है। नया पेराई सत्र अक्तूबर के अंत या नवंबर की शुरूआत में शुरू होता है। चीनी मिलों ने अधिक लाभ के लिए गन्ने से चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन को प्राथमिकता दी। पेट्रोल और शराब बनाने वाली कंपनियों की ओर से एथेनॉल की मांग बढ़ने से चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
मिडिल ईस्ट में तनाव का असर 
दूसरी ओर मिडिल ईस्ट में तनाव का असर अब देश में खाद्य पदार्थों पर दिखना शुरू हो गया है। बता दें कि तेल कंपनियों ने मई में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। जून के बाद अमेरिका और ईरान में तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में जब कमी आई तो दाम कम होने का भरोसा बढ़ गया था। अब खाड़ी देशों में तनाव फिर बढ़ने से ईंधन की कीमतों में कमी की उम्मीद टूटने लगी है। भारत के लिए हालात ज्यादा गंभीर हो चुके हैं। देश अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। महंगे कच्चे तेल से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ गई है। इसका असर यह हुआ है कि गेहूं की कीमतों में तेजी आई है। देश की प्रमुख मंडियों में एक महीने में गेहूं के भाव करीब 4 फीसदी तक बढ़ गए हैं। इससे आटा और ब्रेड जैसे जरूरी सामान की कीमत बढ़ने लगे हैं। बता दें कि दुनिया के बड़े गेहूं निर्यातक रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव ने काला सागर क्षेत्र में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय मंडियों तक दिखाई देने लगा है। रसोई की चिंता यहीं खत्म नहीं होती, प्याज भी लोगों की जेब पर दबाव बढ़ाने लगा है। प्याज का औसत खुदरा भाव 37 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। एक महीने पहले प्याज की कीमत 34 रुपये प्रति किलो थी। इस तेजी की वजह खरीफ प्याज की आवक में देरी है। इससे बाजार पर दबाव बढ़ गया है।