जन प्रवाद, ब्यूरो।
रामपुर। पूर्व मंत्री आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी पर मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। अब जौहर ट्रस्ट पर ईडी की कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी के भवनों के निर्माण में सरकारी विभागों के धन का दुरुपयोग, फर्जी दानदाता, डमी ट्रस्टी और यूनिवर्सिटी के निर्माण में बड़े पैमाने पर काले धन का इस्तेमाल हुआ है। ईडी द्वारा बीते चार साल से इसकी गहन जानकारी जुटाई जा रही थी।
पूर्व में आयकर विभाग की जांच के दौरान ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी के 59 भवनों के निर्माण में महज 45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया था, जबकि जांच में यह करीब 494 करोड़ रुपये मिला था। बड़े पैमाने पर काले धन को ट्रस्ट में डायवर्ट करने से ईडी को मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई का मजबूत आधार मिला है।

सूत्रों की मानें तो जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में आठ सरकारी विभागों का करीब 110 करोड़ रुपये का बजट खर्च किया गया था। आयकर विभाग की जांच में जौहर विश्वविद्यालय में अवस्थापना संबंधी कार्यों में इन विभागों का करीब 150 करोड़ रुपये खर्च होने के प्रमाण मिले थे।
इनमें सीएंडडीएस, लोक निर्माण विभाग, संस्कृति विभाग, ग्राम्य विभाग विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग, नगर विकास और सिंचाई विभाग शामिल थे। जल निगम का दो अलग-अलग मदों में बजट खर्च किया गया था। इससे पुल, सड़क, रिवरफ्रंट, नहर को चौड़ा करने, इमारतों के निर्माण समेत तमाम कार्य कराए गए थे।
सबसे ज्यादा सीएंडडीएस और जल निगम का करीबन 75 करोड़ रुपये और लोक निर्माण विभाग का 13.73 करोड़ रुपये व्यय हुआ था। हालांकि बाद में विभागीय अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा
आजम खां के प्रभाव की वजह से उनकी यूनिवर्सिटी पर सांसद और विधायक निधि का करीब 4.57 करोड़ रुपये भी लगाया गया। मामला हाईकोर्ट में पहुंचने पर पूरी रकम वापस करनी पड़ी थी। यूनिवर्सिटी के अवस्थापना कार्यों के लिए दो दर्जन विधायकों ने अपनी निधि में से 10 लाख रुपये से लेकर 45 लाख रुपये तक दिए थे।
आजम खां की पत्नी एवं तत्कालीन सांसद तजीन फातमा ने अपनी सांसद निधि से तीन बार 22.39 लाख रुपये दिये थे। एमएलसी सरोजनी अग्रवाल ने विश्वविद्यालय के लॉ संकाय में मूट कोर्ट के निर्माण के लिए 45 लाख रुपये और विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना से तीन बार में 50 लाख रुपये दिये थे।

इसी तरह अखिलेश यादव ने अपनी निधि से लॉ संकाय में शौचालय के निर्माण के लिए 20 लाख रुपये, पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी ने लॉ संकाय में डीन व प्रिसिंपल कक्ष के निर्माण के लिए 10 लाख रुपये और विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना के तहत 10 लाख रुपये दिए थे।
यही नहीं ट्रस्ट ने वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक बैंकों में अपनी आय से अधिक नगदी जमा कराई थी। जांच में यह भी सामने आया कि दान की रकम को स्वेच्छा के बजाय जबरदस्ती जमा कराया गया। बिना हिसाब-किताब वाली रकम को दान दिखाकर खाते में जमा कराया गया। ट्रस्ट ने कई वर्षों का अपना आईटीआर भी जमा नहीं किया था।
आपको बता दें कि जिन तत्कालीन विधायकों ने पैसे दिए थे उनमें बुक्कल नवाब ने 40 लाख रुपये, मधु गुप्ता ने 30 लाख रूपये, बलराम यादव ने 15 लाख रुपये, रमेश यादव ने 20 लाख रुपये, राम सुंदर दास ने 20 लाख रुपये, यशवंत सिंह ने 10 लाख रुपये, विजय यादव ने 20 लाख रुपये, अंबिका चौधरी ने 15 लाख, अहमद हसन ने 10 लाख रुपये, लीलावती कुशवाहा ने 50 लाख, एसआरएस यादव ने 25 लाख रुपये, अशोक बाजपेई ने 25 लाख, राम सकल गुर्जर ने 10 लाख रुपये, राम जतन राजभर ने 10 लाख रुपये शामिल थे।
पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिजनों द्वारा संचालित जौहर ट्रस्ट पर मनी लांड्रिंग का शिकंजा कसने लगा है। प्रवर्तन निदेशालय ने बुधवार को जौहर ट्रस्ट से जुड़े भवनों यानी जौहर यूनिवर्सिटी और पदाधिकारियों के ठिकानों पर छापे मारकर अहम सुबूत जुटाए हैं।
ईडी की टीमों ने सहारनपुर में जौहर ट्रस्ट का लेखा-जोखा संभालने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गुप्ता का कार्यालय और आवास पर भी छापा मारा है। दिल्ली में एक सहयोगी ट्रस्ट के ठिकानों को खंगाला गया है। देर शाम तक सभी ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई जारी रही।





