अमेरिका और ईरान के बीच डील, कई मुद्दों पर बनी सहमति 

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। आखिरकार अमेरिका और ईरान ने मेमोरेंडेम आॅफ अंडरस्टैंडिंग पर साइन कर दिए। दोनों देशों के बीच लगभग चार महीने से चल रही इस जंग को खत्म करने के लिए कई मुद्दों पर सहमति बनी। फाइनल डील पर 19 जून को साइन होने हैं लेकिन इससे पहले अमेरिका ने ईरान संग इस ड्राफ्ट समझौते को सार्वजनिक कर दिया।
तनाव खत्म होने के ठोस संकेत 

पश्चिम एशिया में 111 दिन से जारी तनाव खत्म होने के ठोस संकेत मिले हैं। जी-7 देशों के सम्मेलन के लिए फ्रांस दौरे पर गए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांसिसी समकक्ष मैक्रों की मौजूदगी में वर्साय में जंग खत्म करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए। ईरान की तरफ से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हस्ताक्षर किए। यह बात अलग है कि पेजेशकियन तेहरान में ही मौजूद रहे और इस प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से पूरा किया गया। जिस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं, इसमें 14 बिंदु शामिल हैं। बता दें कि ट्रंप ने जब युद्ध खत्म करने के लिए समझौते का एलान किया तो ड्राफ्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया था। कुछ रिपोर्ट्स के हवाले से ही डील को लेकर दावे किए जा रहे थे। अब इस समझौते की शर्तें पूरी तरह साफ हो चुकी हैं।
तत्काल और स्थाई रूप से युद्ध पर रोक

एमओयू के पहले पॉइंट में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल और स्थाई रूप से खत्म कर देंगे। दोनों पक्ष अब एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या सैन्याभ्यान शुरू नहीं करेंगे। साथ ही लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का भी सम्मान किया जाएगा। अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। समझौते में कहा गया है कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ लगाए गए अपने नौसैनिक नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह खत्म कर देगा। 
60 दिनों तक निशुल्क मार्ग पर बात

सबसे अहम बात शुल्क को लेकर हुई। इसमें कहा गया है कि ईरान फारस की खाड़ी से ओमान सागर तक जहाजों के लिए 60 दिनों तक निशुल्क और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा।  ईरान, ओमान के साथ बातचीत करेगा ताकि होर्मुज में निर्बाध समुद्री सेवाओं की व्यवस्था तय की जा सके। अमेरिका कम से कम ईरान को 300 अरब डॉलर की फंडिंग देगा। समझौते में कहा गया हे कि अमेरिका, ईरान पर लगाए गए सभी प्रकार के प्रतिबंधों को खत्म करने का वचन देता है। 
परमाणु हथियार है मुख्य पहलू 

एमओयू में एक महत्वपूर्ण पहलू परमाणु हथियार हैं। इस समझौते में कहा गया है कि ईरान पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनी कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री के भंडार के भविष्य के प्रबंधन और निपटान का समाधान एक ऐसे मैकेनिज्म के जरिए किया जाएगा। दोनों पक्षों ने यह भी सहमति व्यक्त की है कि वे यूरेनियम संवर्धन और ईरान की शांतिपूर्ण परमाणु आवश्यकताओं से जुड़े अन्य विषयों पर चर्चा करेंगे। अमेरिका ने यह वादा किया कि ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे संबंधित अन्य उत्पादों के निर्यात के लिए आवश्यक छूट देगा। यानी इनके निर्यात करने का हरी झंडी देगा। अमेरिका ने कहा कि एमओयू के लागू होने पर ईरान की फ्रीज की गई या प्रतिबंधित संपत्तियों को पूरी तरह से रिलीज किया जाएगा। अंतिम बिंदु में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुई इस फाइनल डील को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिलेगी।