जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद तृणमूल कांग्रेसÑ के भीतर ऐसा भूचाल आ गया है, जिसने ममता बनर्जी के राजनीतिक साम्राज्य की नींव हिला दी है। पार्टी से निष्कासित कद्दावर नेता ऋतब्रत बनर्जी अब दीदी के विकल्प के तौर पर नए दादा बनकर उभर रहे हैं। बदले हालात से ऐसा लग रहा है कि ममता बनर्जी अपनी ही पार्टी में बेगानी हो जाएंगी।
पश्चिम बंगाल में नाटकीय घटनाक्रम
पश्चिम बंगाल में नाटकीय घटनाक्रम में मुख्य विपक्षी दल तूणमूल कांग्रेस का नियंत्रण ममता बनर्जी के हाथ से निकलकर अब बागी खेमे के पास चला गया है। राज्य विधानसभा की राजनीति इस समय सिर्फ बयानों या आरोपों में नहीं, बल्कि ठोस संख्या-बल के सुपर नंबर गेम में बदल चुकी है। टीएमसी में बगावत और टूट की कहानी महज जुबानी नहीं रह गई है। यह प्रत्यक्ष दिखाई भी दे रही है। तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में 58 विधायकों का पत्र सामने आने के बाद नई तस्वीर उभरी है। इसने न सिर्फ विपक्ष के नेता पद का समीकरण बदल दिया है, बल्कि बागी गुट दलबदल कानून के खतरे को भी पार कर गया है। यानी टीएमसी की टूट के बाद बागी गुट के किसी सांसद या विधायक की सदस्यता खत्म नहीं होगी।
ऋतब्रत बन सकते हैं प्रतिपक्ष
विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस ने फिलहाल पत्र को स्वीकार कर लिया है। अब असली परीक्षा शुरू होगी। ऋतब्रत को नेता प्रतिपक्ष के समर्थन को लेकर विधायकों के हस्ताक्षर सत्यापन और विधायकों की स्वतंत्र सहमति की जांच होगी। अगर 60 विधायकों का दावा सत्यापित होता है, विपक्ष के नेता पद का विवाद समाप्त हो जाएगा। बागी गुट का नेता ही बंगाल का नेता प्रतिपक्ष बन जाएगा। बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि तृणमूल के टिकट पर निर्वाचित दो-तिहाई से अधिक विधायक उनके साथ हैं। वही अब वास्तविक विधायी दल का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऋतब्रत ने कहा कि फिलहाल 58 विधायक उनके साथ हैं और दो विधायकों का समर्थन है।
राजनीतिक जानकारों का बयान
इस बारे में राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में बागी गुट और ममता बनर्जी, दोनों के सामने कई महत्वपूर्ण विकल्प मौजूद हैं। जिनसे तृणमूल कांग्रेस का भविष्य तय हो सकता है। जिसमें बागी गुट अपनी नई पार्टी बना सकता है। इसके अलावा बागी गुट पार्टी के नाम और विरासत पर दावा ठोकते हुए खुद को असली तृणमूल बता सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ममता बनर्जी अपवनी ही पार्टी में बेगानी हो जाएंगी। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने ऋतब्रत बनर्जी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की राजनीति में लगातार अवसरवाद बढ़ रहा है। कई नेता केवल राजनीतिक लाभ के लिए पाला बदलने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, एक समय में जो काम ममता बनर्जी ने किया था, वही आज उनके साथ हो रहा है।
भाजपा ने टीएमसी ने पर साधा निशाना
दूसरी टीएमसी में संकट को लेकर भाजपा ने भी निशाना साधा। भाजपा ने अब पार्टी की महिला नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर लापता लेडीज नाम से एक पोस्टर साझा कर टीएमसी पर तंज कसा। इस पोस्टर में टीएमसी की कई प्रमुख महिला सांसदों और नेताओं की तस्वीरें लगाई गईं और उन्हें मिसिंग बताया गया। भाजपा का आरोप है कि जब पार्टी संकट में है, तब टीएमसी की कई तेजतर्रार महिला चेहरे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे हैं।





