मुंबई, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है जो वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित 7.6 प्रतिशत से कम है। आरबीआई ने बुधवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण जिंस की ऊंची कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी चिंताओं से वृद्धि दर नरम रह सकती है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि प्रमुख समुद्री मार्गों में व्यवधान एवं इसके कारण ढुलाई तथा बीमा लागत में वृद्धि से माल निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूती
उन्होंने कहा कि हालांकि सेवा क्षेत्र की निरंतर मजबूती, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों के युक्तिकरण का असर, विनिर्माण क्षेत्र में क्षमता उपयोग में वृद्धि तथा वित्तीय संस्थानों एवं कंपनियों के मजबूत बही-खाते घरेलू मांग को समर्थन देंगे। मल्होत्रा ने कहा, भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी कारक मजबूत वृद्धि और कम मुद्रास्फीति के साथ भरोसे का संकेत दे रहे थे। हालांकि, मार्च में संघर्ष के अन्य क्षेत्रों तक फैलने और बढ़ने से परिस्थितियां प्रतिकूल हो गईं। उन्होंने कहा, मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने राय व्यक्त की है कि संघर्ष की तीव्रता और अवधि तथा ऊर्जा एवं अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान से मुद्रास्फीति और वृद्धि की संभावनाओं के लिए जोखिम बढ़ जाता है। नई जीडीपी श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23) के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत की वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि 2025-26 में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मल्होत्रा ने कहा कि ऊर्जा और अन्य जिंस की ऊंची कीमतें, साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान से आपूर्ति को लगे झटके 2026-27 में घरेलू उत्पादन की गति को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता एवं उसके घरेलू वित्तीय परिस्थितियों पर असर से भी वृद्धि की संभावनाओं पर दबाव पड़ सकता है। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित रणनीतिक व उभरते क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयास भारत की दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाओं के लिए सकारात्मक हैं। मल्होत्रा ने कहा, इन सभी कारकों को ध्यान में रखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वास्तविक जीडीपी से तात्पर्य आधार वर्ष 2022-23 पर आधारित जीडीपी से है। आरबीआई के अनुसार, पहली तिमाही में वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 7.0 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने साथ ही कहा कि हालिया व्यापार समझौतों से माल निर्यात को लाभ मिल सकता है, जबकि सेवा क्षेत्र का निर्यात मजबूत बने रहने की उम्मीद है।





