योगी सरकार ने पेश किया ऐतिहासिक मेगा बजट

जनप्रवाद ब्यूरो। उत्तर प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बुधवार को विधानसभा में 09 लाख 12 हजार करोड़ 696 करोड़ 35 लाख रुपये का बजट पेश किया। वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में लगभग 12.9 प्रतिशत अधिक है। इस बजट में पूंजीगत परिव्यय 19.5 प्रतिशत है। शिक्षा तथा चिकित्सा के लिए आवंटन कुल बजट का क्रमश: 12.4 प्रतिशत एवं 6 प्रतिशत है। 
कृषि और सम्बद्ध सेवाओं के लिए आवंटन

कृषि और सम्बद्ध सेवाओं के लिए आवंटन कुल बजट का नौ फीसदी है।  वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि इस बजट में 43 हजार 565 करोड़ 33 लाख रुपये की नई योजनाएं सम्मिलित की गयी हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा की सीमा तीन फीसदी रखी गयी है जो 2030-31 तक लागू रहेगी। वर्ष 2016 के मुकाबले डकैती, लूट, हत्या, बलवा और फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में क्रमश: 89 फीसदी, 85 प्रतिशत, 47 फीसदी, 70 फीसदी और 62 फीसदी की कमी आई है।
चिकित्सा शिक्षा के लिए 14 हजार 997 करोड़ 

उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिक्षा के लिए 14 हजार 997 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 37 हजार 956 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। यह पिछले साल की तुलना में 15 फीसदी अधिक है। आयुष सेवाओं के लिए लगभग दो हजार 867 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है। अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास की योजनाओं के लिए 27 हजार 103 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। यह पिछले साल की तुलना में 13 फीसदी अधिक है।
बजट में एमएसएमई सेक्टर की योजनाओं के लिए तीन हजार 822 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है। यह पिछले साल से 19 फीसदी अधिक है। हतकरघा एवं वस्त्रोद्योग की योजनाओं के लिए लगभग पांच हजार 41 करोड़ की व्यवस्था की गयी है। यह पिछले साल की तुलना में पांच गुना अधिक है। 
आईटी योजनाओं के लिए 2059 करोड 
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक की योजनाओं के लिए 2059 करोड रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। पिछले साल की तुलना में या 76 प्रतिशत अधिक है। सड़कों एवं सेतु के निर्माण, चौड़ीकरण एवं अनुरक्षण के लिए 34 हजार 468 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण योजनाओं के लिए 18 हजार 290 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। यह वर्ष 2025-26 की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति हेतु लगभग 22 हजार 676 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।
65 हजार 926 करोड़ रुपये

बजट में ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं के लिए 65हजार 926 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह पिछले साल के मुकाबले आठ फीसदी अधिक है। आवास एवं शहरी नियोजन के लिए सात हजार 705 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। नगर विकास के लिए लगभग 26हजार 514 करोड़ रुपये की व्यवस्था का प्रस्ताव है। एक जनपद एक व्यंजन के लिए 75 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। नागरिक उड्डयन हेतु दो हजार 111 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।पंचायती राज की योजनाओं के लिए लगभग 32 हजार 90 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह पिछले साल की तुलना में 67 फीसदी अधिक है। छुट्टा गोवंश के रखरखाव के लिए 2000 करोड़ रुपये तथा वृहद को संरक्षण केदो की स्थापना के लिए 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत पुरुष एवं महिला घटक हेतु क्रमश: 195 करोड़ तथा 115 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि बेसिक शिक्षा के लिए 77 हजार 622 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। माध्यमिक शिक्षा के लिए 22 हजार 167 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। 
उच्च शिक्षा के लिए लगभग 6591 करोड़ रुपये 


पिछले साल से 15 फीसदी अधिक है। उच्च शिक्षा के लिए लगभग 6591 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्राविधिक शिक्षा के लिए दो हजार 365 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। व्यावसायिक शिक्षा के बजट में पिछले साल के मुकाबले 88 फीसदी की वृद्धि करते हुए लगभग तीन हजार 349 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। महिला एवं बाल विकास की योजनाओं के लिए लगभग 18 हजार 620 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। पिछड़ा वर्ग कल्याण की योजनाओं के लिए तीन हजार 402 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। वहीं अल्पसंख्यक कल्याण की योजनाओं के लिए दो हजार 058 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

यूपी बजट : औद्योगिक और रोजगार विस्तार पर जोर

उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में अवस्थापना, औद्योगिक विकास, एमएसएमई, आईटी, सड़क, सिंचाई और ग्रामोद्योग क्षेत्रों के लिए बड़े वित्तीय प्रावधान किए हैं। बजट में पूंजीगत निवेश के जरिए रोजगार सृजन और औद्योगिक विस्तार पर विशेष बल दिया गया है।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास के लिए 27,103 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष से 13 प्रतिशत अधिक है। मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण एवं नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना के लिए 5,000 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। अटल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत 2,000 करोड़ रुपए तथा एफडीआई और फॉर्च्यून-500 कंपनियों को प्रोत्साहन नीति के क्रियान्वयन के लिए 1,000 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर परियोजना में 35,280 करोड़ रुपए के संभावित निवेश के साथ 200 एमओयू हस्ताक्षरित किए जा चुके हैं, जिससे 53,263 प्रत्यक्ष रोजगार का अनुमान है।उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र के लिए 3,822 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है। ह्यसरदार वल्लभभाई पटेल इम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन योजना के लिए 575 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान हेतु 1,000 करोड़ रुपए तथा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के लिए 225 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। ह्यएक जनपद एक व्यंजनह्ण योजना के लिए 75 करोड़ रुपए का प्रावधान है। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र को इस बजट में विशेष बढ़ोतरी मिली है। इस क्षेत्र के लिए 5,041 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में पांच गुना से अधिक है।सुरेश खन्ना ने आगे बताया कि पावरलूम बुनकरों के लिए 4,423 करोड़ रुपए की फ्लैट रेट विद्युत योजना तथा वस्त्र एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के लिए 150 करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं। पीएम मित्र पार्क योजना के तहत मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जा रहा है। आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के लिए 2,059 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो 76 प्रतिशत अधिक है। उत्तर प्रदेश एआई मिशन के लिए 225 करोड़ रुपए तथा साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र के लिए 95 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान है। प्रदेश में 30,000 करोड़ रुपए के अनुमानित निवेश से आठ डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने और 900 मेगावॉट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। सड़क एवं सेतु निर्माण के लिए 34,468 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं।उन्होंने कहा कि नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर, बाईपास, रिंग रोड, फ्लाईओवर और औद्योगिक लॉजिस्टिक मार्गों के विकास के लिए अलग-अलग मदों में हजारों करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के लिए 18,290 करोड़ रुपए का प्रावधान है, जो 30 प्रतिशत अधिक है। केन-बेतवा लिंक सहित प्रमुख परियोजनाओं से 4.49 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित होने का अनुमान है। 2,100 नए राजकीय नलकूपों और बाढ़ नियंत्रण परियोजनाओं से लाखों किसानों और करीब 49.90 लाख आबादी को लाभ मिलने का दावा किया गया है।