जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। जल, थल और नभ के बाद अब भारत ने अंतरिक्ष में युद्ध की तैयारी तेज कर दी है। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत ऐसा देश बन गया है जो अंतरिक्ष में दुश्मन देश की सैटेलाइट्स और मिसाइलों की जासूसी कर सकता है। इससे भारत के अंतरिक्ष सुरक्षा उपायों को एक नई दिशा मिलेगी।
अंतरिक्ष में तकनीकी छलांग
चीन जिस रफ्तार से अंतरिक्ष में तकनीकी छलांग लगा रहा है, उसने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को नई रणनीतिक चुनौती दी है। भारत के लिए भी चीन की स्पेस टेक्नोलॉजी बड़ा खतरा है। यह बात अलग है कि चीन का दावा रहा है कि उसका स्पेस कार्यक्रम लोगों की भलाई के लिए है, लेकिन वह जिस तकनीक पर वह काम कर रहा है, उनका काफी आसानी से सैन्य इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरी ओर रूस और चीन से अंतरिक्ष में बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिकी स्पेस फोर्स भी लगातार अपनी ताकत में इजाफा कर रही है। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने ऐसी मशीन बना ली है जिसकी सहायता से हजारों किलोमीटर दूर दुश्मनों के सैटेलाइट्स की गतिविधियों को ट्रैक किया जा सकता है। यह अमेरिका का ग्राउंड बेस्ड ताकतवर स्पेस है। यह मुख्य तौर पर रात में सक्रिय रहता है। इस टेलिस्कोप की सहायता से 35,000 किलोमीटर की दूरी तक नजर रखी जा सकती है। वहीं, अब भारत की स्पेस इंडस्ट्री में भी अंतरिक्ष के क्षेत्र में अहम उपलब्धि हासिल की है।
आईएसएस की तस्वीरें ली
अहमदाबाद की कंपनी अजिस्टा स्पेस ने अपने 80 किलोग्राम के सैटेलाइट एएफआर से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन यानी आईएसएस की तस्वीरें ली हैं। यह पहली बार है जब भारत की किसी निजी कंपनी ने अंतरिक्ष से दूसरे स्पेसक्राफ्ट को ट्रैक करके उसकी इमेज कैप्चर की है। इसे इन-आॅर्बिट स्नूपिंग या स्पेस वॉच कहा जा रहा है। इस तकनीक से दुश्मन देशों की सैटेलाइट्स या मिसाइलों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है। भारत के स्पेस एसेट्स की सुरक्षा के लिए यह एक बड़ा कदम है।
अंतरिक्ष में किया गया मुश्किल प्रयोग
अजिस्टा स्पेस कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि यह अंतरिक्ष में किया गया मुश्किल प्रयोग है। उनके एएफआर नामक सैटेलाइट ने आईएसएस को ट्रैक किया और उसकी तस्वीरें लीं। बता दें कि आईएसएस पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर आर्बिट में घूमता है। एएफआर ने दो बार में आईएसएस को कैद किया, जिसमें 15 अलग-अलग तस्वीरें ली। ये तस्वीरें 250 से 300 किलोमीटर की दूरी से ली। सबसे बड़ी बात यह है कि ये तस्वीरें सूरज की उलटी दिशा में ली गई हैं। कंपनी ने पोस्ट किया कि आईएसएस को ट्रैक करके 2.2 मीटर सैंपलिंग वाली इमेज ली है। दो प्रयास किए गए दोनों ही 100 प्रतिशत सफल रहे। यह एएफआर की ट्रैकिंग एल्गोरिदम और इमेजिंग सटीकता को साबित करता है। बता दें कि एएफआर सैटेलाइट को स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट से 13 जून 2023 को लांच किया गया था।
भारत ने भी हासिल की क्षमता
क्षमता केवल महाशक्तियों जैसे अमेरिका, रूस या चीन के पास थी। अब भारत ने भी इसे हासिल कर लिया है। अजिस्टा का कहना है कि एएफआर भारत का एकमात्र ऐसा सैटेलाइट है जो इस तरह का काम कर सकता है। अजिस्टा स्पेस अहमदाबाद, गुजरात में स्थित है। इसकी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी सनंद में होती है। यह एशिया की पहली निजी सैटेलाइट फैक्ट्री है। कंपनी हर साल 50 सैटेलाइट बना सकती है। यह सैटेलाइट्स, स्पेस-बोर्न सिस्टम और पेलोड्स का डिजाइन, विकास, निर्माण और इंटीग्रेशन करती है। कंपनी के कर्मचारी इसरो के 12 से ज्यादा मिशनों में शामिल रहे हैं। भारत के पास अब 50 से ज्यादा आपरेशनल सैटेलाइट्स हैं, जो कम्युनिकेशन, नेविगेशन, अर्थ आब्जर्वेशन और सर्विलांस के लिए हैं। जिसकी कीमत 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। भू-राजनीतिक तनाव में इनकी सुरक्षा जरूरी है। अगर कोई दुश्मन सैटेलाइट पास आए या हमला करे, तब एसएसए से समय पर पता चल जाएगा। यह सफलता भारत की स्पेस इंडस्ट्री को नई ऊंचाई देगी।





