डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट के नए डेटा से वैज्ञानिक भी हैरान

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट के नए डेटा ने वैज्ञानिकों को हिलाकर रख दिया है। इससे बेहद चौंकाने वाली जानकारी समाने आई है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि ब्रह्मांड का निर्माण एक साथ नहीं हुआ बल्कि यह   अलग-अलग टुकड़ों में विकसित हुआ है।
ब्रह्मांड की पूरी जानकारी नहीं 

ब्रह्मांड इतना विशाल है कि इसकी पूरी जानकारी आज तक वैज्ञानिक नहीं कर पाए हैं। इसका निर्माण कैसे और किन परिस्थतियों में हुआ यह भी रहस्य का विषय बना हुआ है। हमारे ब्रह्मांड का आकार कैसा है? इस सभी सवालों के जवाब में तमाम विचार सामने आ चुके हैं। अब जो नया शोध सामने आया है वह पुराने शोध से बिल्कुल अलग है। डार्क एनर्जी स्पेक्ट्रोस्कोपिक इंस्ट्रूमेंट यानी डीईएसआई के नए डेटा ने वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है। इस इंस्ट्रूमेंट ने करीब 11 बिलियन लाइट-इयर्स दूर फैली 47 मिलियन गैलेक्सीज का एक विशाल मैप तैयार किया है। इस नए मैप के एनालिसिस के बाद वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि हमारा ब्रह्मांड हर दिशा में एक जैसा नहीं दिखता है। एस्ट्रोनॉमर फ्रांसिस्को साइलोस लाबिनी और मार्को गैलोप्पो ने इस स्टडी को पूरा किया है। उनके मुताबिक ब्रह्मांड को लेकर हमारी अब तक की सोच पूरी तरह गलत साबित हो सकती है। 
नेचर जर्नल में छपी स्टडी 

नेचर जर्नल में छपी इस स्टडी ने साइंस के सबसे बुनियादी कॉस्मोलॉजिकल प्रिंसिपल को सीधी चुनौती दी है। बता दें कि पुराने अध्ययन में वैज्ञानिकों का मानना था कि बड़े पैमाने पर देखने पर पूरा ब्रह्मांड एक जैसा ही नजर आता है। नए रिसर्च ने इसी दावे पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया है। अभी तक वैज्ञानिक कॉस्मोलॉजिकल प्रिंसिपल के आधार पर ही स्पेस की हर गुत्थी को सुलझाते आए हैं। यह नियम कहता है कि बहुत बड़े पैमाने पर ब्रह्मांड में मैटर हर तरफ एक समान रूप से फैला हुआ है। यह कोपरनिकन प्रिंसिपल पर आधारित है जो मानता है कि ब्रह्मांड में कोई भी आॅब्जर्वर स्पेशल नहीं है। इसका मतलब यह हुआ कि आप ब्रह्मांड के किसी भी कोने से देखें तो यह एक जैसा दिखता है। वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात पर बहस कर रहे थे कि ब्रह्मांड किस लेवल पर जाकर एक जैसा दिखने लगता है। पुराने रिसर्च में कॉस्मिक बैकग्राउंड रेडिएशन ने इस बात का समर्थन किया था कि ब्रह्मांड हर तरफ एक समान है। नए रिसर्च ने सारे पुराने दावों को खारिज कर दिया है।
खास टूल का उपयोग 

वैज्ञानिकों ने इस बार एंगुलर डिस्ट्रीब्यूशन आफ पेयरवाइज डिस्टेंसेस यानी एडीपीडी नाम के एक खास टूल का उपयोग किया है। यह टूल बिना किसी पुराने मॉडल के सीधे दिशाओं के जुड़ाव को मापता है। इस टूल की मदद से जो नतीजे सामने आए हैं उसने वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए। इस नए रिसर्च में पाया गया है कि गैलेक्सीज का फैलाव गीगापार्सेक स्केल पर भी एक जैसा नहीं है। इसका मतलब यह है कि गैलेक्सीज उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़े पैमाने पर आपस में झुंड बना रही हैं। यह पैमाना पिछले अनुमानों से करीब 1,000 गुना ज्यादा बड़ा है। रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों ने लिखा कि यह नतीजे इस बात का सीधा सबूत हैं कि ब्रह्मांड में खिंचाव हमारी सोच से कहीं ज्यादा बड़े पैमाने पर मौजूद है। नए अध्ययन के सामने आने के बाद कॉस्मोलॉजी की दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है। साथ ही वैज्ञानिक ब्रह्मांड के पूरे ढांचे को नए सिरे से समझने की कोशिश में जुट गए हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि गीगापार्सेक स्केल पर भी गैलेक्सीज आपस में जुड़ी हुई हैं। यह खोज आइंस्टीन के समीकरणों और डार्क मैटर की थ्योरी में बड़े बदलाव को दर्शाती है। साइंस की भाषा में इसे एनीसोट्रोपिक कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि आप जिस दिशा में देखेंगे आपको अलग नजारा दिखेगा। इस खोज के बाद अब वैज्ञानिकों को अल्बर्ट आइंस्टीन के फील्ड समीकरणों के नए हल तलाशने होंगे। इसके साथ ही डार्क मैटर की थ्योरी में भी बड़े बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है।