इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट ने बनाया गिनीज रिकॉर्ड

जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने 24 घंटे के भीतर छात्रों से कृत्रिम मेधा के जिम्मेदार उपयोग के लिए सर्वाधिक संख्या में प्रतिबद्धताएं हासिल करने का रिकॉर्ड बनाते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। ब्रिटिश रिकॉर्ड संस्था ने बुधवार को यह जानकारी दी। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अधिनिर्णायक प्रवीण पटेल ने घोषणा की कि सम्मेलन के दौरान कुल 2,50,946 प्रतिबद्धताएं हासिल हुईं जबकि लक्ष्य केवल 5,000 का था। इस अवसर पर केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा,  यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना थी जिसके अनुरूप हमने कृत्रिम मेधा (एआई) के जिम्मेदार उपयोग की प्रतिबद्धताएं हासिल करने के लिए स्कूल एवं कॉलेज से संपर्क किया।

19 फरवरी को लोगों के लिए बंद

इंडिया एआई एक्सपो समिट 19 फरवरी को बंद रहेगा और इसके बजाय लोगों के लिए इसे एक अतिरिक्त दिन 21 फरवरी को खोला जाएगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 19 फरवरी को मुख्य शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा,  19 फरवरी को एक्सपो बंद रहेगा। भारी उत्साह के कारण इसे एक दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। यह शनिवार 21 फरवरी को खुला रहेगा। कृष्णा ने कहा कि उद्घाटन सत्र में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सहित 20 राष्ट्राध्यक्ष उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा,  हम प्रतिबंधों के कारण जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं पहुंचाना चाहते, इसीलिए कल एक्सपो न खोलने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले इंडिया एआई एक्सपो समिट का आयोजन 16 से 20 फरवरी के बीच निर्धारित था।
गलगोटियास विश्वविद्यालय का आदेश

एआई समिट एक्सपो में प्रदर्शित रोबोटिक डॉग को लेकर उठे विवाद के बीच गलगोटियास विश्वविद्यालय को अपना स्टॉल तुरंत खाली करने के लिए कहा गया है। इसमें प्रदर्शित प्रौद्योगिकी की उत्पत्ति और स्वामित्व पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय से तुरंत प्रदर्शनी स्थल छोड़ने को कहा गया। आयोजक विश्वविद्यालय से प्रदर्शनी स्थल खाली कराने का प्रयास कर रहे हैं। विवाद उस समय शुरू हुआ जब गलगोटियास विश्वविद्यालय ने प्रदर्शनी में ओरायन नाम का रोबोट डॉग प्रदर्शित किया। आलोचकों का कहना था कि यह विश्वविद्यालय का स्वदेशी नवाचार नहीं है बल्कि चीन में बना एक रोबोट है। इसके बाद विश्वविद्यालय को सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय पर आयातित प्रौद्योगिकी को अपनी बताकर पेश करने के आरोप लगे हैं। गलगोटियास विश्वविद्यालय ने इन आरोपों के बाद बयान जारी किया और कहा,  रोबोटिक प्रोग्रामिंग छात्रों को एआई प्रोग्रामिंग सिखाने और वैश्विक स्तर पर उपलब्ध उपकरणों एवं संसाधनों का उपयोग करके वास्तविक दुनिया के कौशल विकसित करने और उन्हें क्रियान्वित करने के हमारे प्रयास का हिस्सा है, क्योंकि एआई प्रतिभा का विकास समय की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय ने कहा कि उसके संकाय एवं छात्र, उनके खिलाफ चलाए गए दुष्प्रचार अभियान से बेहद आहत हैं। विश्वविद्यालय का मकसद छात्रों को सिखाना और नवाचार पर ध्यान देना है। यह छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और भविष्य के लिए तैयार होने में मदद करने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों तक पहुंच प्रदान करता है। इसमें कहा गया,  नकारात्मकता फैलाने से उन छात्रों का मनोबल गिर सकता है जो वैश्विक प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके नवाचार करने, सीखने और अपने कौशल को विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि इस अभ्यास का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर उपलब्ध मंचों और उपकरणों का उपयोग करके व्यावहारिक एआई प्रोग्रामिंग कौशल प्रदान करना था। इस बीच, बुधवार को प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय के स्टॉल पर कुछ भी प्रदर्शित नहीं किया गया। इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए गलगोटियास विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नेहा सिंह ने पीटीआई-भाषा से कहा,  यह विवाद इसलिए खड़ा हुआ क्योंकि शायद बातों को स्पष्ट रूप से व्यक्त नहीं किया गया और इसके पीछे की मंशा को ठीक से समझा नहीं गया। उन्होंने कहा,  रोबोट डॉग के बारे में हम यह दावा नहीं कर सकते कि हमने इसे बनाया है। मैंने सभी को बताया है कि हमने इसे अपने छात्रों के समक्ष इसलिए पेश किया ताकि वे खुद कुछ बेहतर बनाने के लिए प्रेरित हों। हमारा विश्वविद्यालय कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी प्रदान करके भविष्य के दिग्गज बनाने में योगदान देता है और आगे भी ऐसा करना जारी रखेगा। सरकार द्वारा विश्वविद्यालय को प्रदर्शनी क्षेत्र खाली करने के लिए कहे जाने के बारे में उन्होंने कहा,  मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुझे बस इतना पता है कि आज हम सभी यहां मौजूद हैं।