जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। भारतीय नौसेना पहली बार दो चरणों में ऐतिहासिक युद्धाभ्यास करने जा रही है। इस अभ्यास में 65 देश भाग लेंगे। इसी बीच भारतीय नौसेना ने एक और उपलब्धि हासिल कर ली है। आपात स्थिति में समुद्र के अंदर ही पनडुब्बी को ठीक किया जा सकेगा। एचएसएल ने पहली बार स्वदेशी वेसल तैयार की है।
नौसैनिक युद्धाभ्यास की मेजबानी
भारत मिलन-2026 नौसैनिक युद्धाभ्यास की मेजबानी करने जा रहा है। ऐसे में भारतीय नौसेना ने 15 फरवरी को थाईलैंड, आस्ट्रेलिया और श्रीलंका के नौसैनिक जहाजों का स्वागत किया। हर दूसरे वर्ष आयोजित होने वाले इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। मिलन अभ्यास के दौरान इस बार 65 देशों के प्रतिनिधित्व के साथ 19 विदेशी युद्धपोतों सहित 71 जहाजों की भागीदारी देखने को मिलेगी। मिलन अभ्यास 19-20 फरवरी को बंदरगाह चरण में और 21-25 फरवरी को बंगाल की खाड़ी में समुद्री चरण में होगा। बता दें कि आईएनएस विक्रांत पहले ही विशाखापत्तनम पहुंच चुका है। यह इस भव्य आईएफआर का हिस्सा होगा। इस नौसैनिक युद्धाभ्यास में अमेरिका, रूस, फ्रांस और जापान सहित कई देशों के साथ संयुक्त अभ्यास होगा। हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी में 25 तटीय देशों के नौसेना प्रमुख शामिल होंगें। समुद्री डकैती, आपदा राहत और अवैध गतिविधियों से निपटने के लिए साझा कार्यप्रणाली पर भी चर्चा होगी। बता दें कि मिलान सैन्य अभ्यास, जिसकी शुरुआत 1995 में केवल चार देशों के साथ हुई थी। अब विश्व भर की 65 नौसेनाएं इसका हिस्सा होंगी।
नौसेनाओं के लिए बसाया मिलन विलेज
पूर्वी नौसेना कमान ने इस अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में हिस्सा लेने वाली नौसेनाओं के लिए मिलन विलेज भी बसाया है। इसका उद्घाटन फ्लैग आफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला ने किया। नौसेना के अनुसार मिलन विलेज को पिछले अनुभवों को देखते हुए बनाया गया है। यहां इस अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में हिस्सा लेने आये देशों के प्रतिनिधियों और नौसेना के लोगों को दोस्ती और भाईचारे का माहौल मिलेगा। यह मिलन विलेज विभिन्न देशों के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक लेन-देन के लिए एक हब के तौर पर काम करेगा। यहां अलग-अलग तरह की भारतीय विरासत और परंपरा की एक गहरी झलक दिखेगी। यहां स्थानीय कलाकारों के पारंपरिक लोक नृत्य और भारत की जीवंत कलात्मक विरासत को दिखाने वाले कल्चरल ग्रुप होंगे। मिलन विलेज में नौसेना के यादगार सामान, हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम प्रोडक्ट्स के कई तरह के स्टॉल लगाए गए हैं। इसके अलावा गांव में आने वाले लोगों को भारत के अलग-अलग तरह के क्षेत्रीय स्वाद और जायके मिलेंगे।
समुद्र में रिपेयर होगी पनडुब्बी
समुद्री अभ्यास मिलन के बीच भारत ने एक और उपलब्धि हासिल की है। हिंद महासागर में आपात स्थिति में समुद्र के अंदर भारतीय नौसेना के पनडुब्बी में कोई तकनीकी खराबी आती है तो उसे ठीक करने के लिए पनडुब्बी को सतह पर आने की जरूरत नहीं होगी। पहली बार हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड यानी एचएसएल ने स्वदेशी निर्मित डाइविंग सपोर्ट वेसल यानी जहाज तैयार किया है। एचएसएल ने जहाज को नौसेना को सौंप दिया है कि जबकि दूसरे का ट्रायल चल रहा है। पीआईबी देहरादून की ओर से मीडिया भ्रमण कार्यक्रम के दौरान एचएसएल के जनसंपर्क अधिकारी इनायत तुला वेग ने इसकी जानकारी दी। उनके अनुसार एचएसएल ने पहली बार नौसेना के लिए डाइविंग सपोर्ट वेसल तैयार किया है। इस जहाज से एक ट्यूब के माध्यम से नियंत्रित दबाव में छह सदस्यों को समुद्र के अंदर भेजा जाता है। जो 48 घंटे तक सुरक्षित इस ट्यूब के अंदर रह कर पनडुब्बी में आई खराबी को ठीक कर सकते हैं।





