अब तक की सबसे बड़ी खोज, सोने का शहर ढूंढ़ निकाला

जनप्रवाद ब्यूरो। पुरातत्वविदों ने इतिहास की सबसे बड़ी खोज की है। उन्होंने मिस्र के रेगिस्तान में  छिपे 3000 साल पुराने सोने के शहर को ढूंढ निकाला है। सदियों पहले किसी प्राकृतिक आपदा के कारण यह शहर तबाह हो गया था। खोजकर्ताओं के अनुसार यहां पहले सोने की खदानें हुआ करती थी।

मिस्र की सभयता थी सबसे अमीर

पुरानी सभ्यताओं में मिस्र की सभयता सबसे अमीर मानी जाती थी। सदियों पहले यहां से दुनियाभर के देशों के साथ व्यापार हुआ करता था। अब शोधकर्ताओं की खोज ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि यह बात बिल्कुल सच थी।  पुरातत्वविदों ने मिस्र के पूर्वी रेगिस्तान में यह खोज करने में सफलता हासिल की है। इसकी तुलना तूतनखामेन के मकबरे से की जा रही है। इस इलाके की ऊबड़-खाबड़ सरकारी पहाड़ों में पुरातत्वविदों को मिस्र की 3,000 साल पुराना सोने का शहर मिला है। यह एक पुराना एडवांस्ड गोल्ड प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स था। रेत में दबे इस शहर में इंसानों की रोजमर्रा की जिंदगी के निशान भी मिले हैं। ये निशान इतने साफ हैं कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि यह पूरा शहर 3000 साल से रेत के अंदर धंसा हुआ था। यह एक ऐसा शहर है, जो सिर्फ चट्टान में खुदा एक गड्ढा नहीं था, बल्कि ऐसी जगह थी, जहां लोग काम करते थे, पूजा करते थे और व्यापार करते थे।
कई सालों से चल रही थी खुदाई 

बता दें कि इस शहर को ढूंढने के लिए कई सालों से खुदाई चल रही थी। यह शहर लाल सागर में मार्सा आलम के दक्षिण पश्चिम में मौजूद था। इसके बारे में कहा जाता है कि यह जबल सुकरी की साइट 1000 ईसा पूर्व में इंडस्ट्रियल पावर यानी बड़ा औद्योगिक हब हुआ करती था। रिपोर्ट के अनुसार यह खोज मिस्र के टूरिज्म और एंटीक्विटीज मंत्रालय के नेतृत्व में पुराने सोने के शहर को फिर से जिंदा करना नाम के एक लंबे समय से चल रहे प्रोजेक्ट का हिस्सा है। खोजकर्ताओं ने बताया है कि उन्हें जो मिला है, वह बिखरे हुए औजारों और टूटी दीवारों से कहीं ज्यादा है। यह एक लोगों से भरा सोने की खदान दिखता है, जो इसकी इंडस्ट्री के आसपास बना हुआ था। यह खोज मिस्र के सुकारी पहाड़ में की गई है। यह पहाड़ आज भी सोने के लिए जाने जाते हैं। सुकारी पहाड़ से आज भी सोने की खुदाई की जाती है।
एडवांस्ड गोल्ड प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स

स्टेट इन्फॉर्मेशन सर्विस इजिप्ट की आफिशियल वेबसाइट पर इस बारे में विवरण साझा किया गया है। इसके अनुसार ये अवशेष एक बहुत ही सोच-समझकर किया गया आपरेशन दिखाते हैं। सोना बस इकट्ठा नहीं किया गया था। इसे निकाला गया, प्रोसेस किया गया और कुशलता से रिफाइन किया गया। यह खोज इसलिए दिलचस्प है क्योंकि इससे पता चला है कि पुराने काल में भी यह इलाका उन गतिविधियों को अंजाम दे रहा था जिसे आधुनिक समय में मशीनें किया करती हैं। पुरातत्वविदों के अनुसार यह जगह एक एडवांस्ड गोल्ड प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स था। यह जगह पत्थर को पीसने और तोड़ने का केंद्र था, जिनका इस्तेमाल पत्थर के अंदर मौजूद सोने की बारीक नसों को निकालने के लिए किया जाता था। यहां फिल्ट्रेशन बेसिन, सेडीमेंट टैंक और मिट्टी की भट्ठियां भी थीं, जो सोने को गलाने और शुद्ध करने के लिए डिजाइन की गई थीं। इससे पता चलता है कि यह कोई अस्थायी कैंप नहीं था, बल्कि एक व्यवस्थित सोने का खदान था। यहां से न सिर्फ असली फैरोनिक युग के बल्कि रोमन और इस्लामिक समय के भी आर्किटेक्चरल अवशेष मिले हैं।
प्राचीन काल में होता था सोने का व्यापार

मिस्र की इस जगह की खोज के बाद यह तो पता चलता है कि यह साइट प्राचीन काल में सोने का व्यापार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। मिस्र की इस साइट पर टॉलमी कल के सिक्के भी पाए गए है। इन सिक्कों के मिलने के बाद यह अनुमान लगाया गया कि यह भट्टी लंबे समय तक एक्टिव रही थी। यह खोज मिस्र के प्राचीन खनिजों की इंजीनियरिंग को दर्शाती है, जो रेगिस्तान में सोना निकालने के लिए बनाए गए थे।