जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 विचारों, नवोन्मेष और इरादों का एक शक्तिशाली संगम है। प्रधानमंत्री मोदी ने कृत्रिम मेधा (एआई) पर यहां भारत मंडपम में आयोजित प्रदर्शनी इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो का सोमवार को उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में 600 से अधिक उच्च क्षमता वाले स्टार्टअप भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही 13 देशों के मंडप भी स्थापित किए गए हैं, जो एआई क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रदर्शित करते हैं।
स्टार्टअप के लिए महत्वपूर्ण
लगभग 70,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली यह प्रदर्शनी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों, स्टार्टअप, अकादमिक एवं शोध संस्थानों, केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों को एक साथ लाती है। प्रदर्शनी में 13 देशों के मंडप भी हैं जो एआई पारिस्थितिकी में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रदर्शित करते हैं। इनमें आॅस्ट्रेलिया, जापान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, सर्बिया, एस्टोनिया, ताजिकिस्तान और अफ्रीका के मंडप शामिल हैं। यह आयोजन पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस यानी लोग, ग्रह एवं प्रगति विषयवस्तु पर आधारित तीन चक्रों में व्यवस्थित किया गया है। प्रदर्शनी में उच्च संभावना वाले 600 से अधिक स्टार्टअप शामिल हैं जिनमें से कई वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक और आम लोगों के लिए समाधान विकसित कर रहे हैं। ये स्टार्टअप ऐसे कामगार समाधान का प्रदर्शन करेंगे जो पहले से ही वास्तविक दुनिया में लागू हैं।
नवोन्मेष और उद्देश्यों का एक सशक्त संगम
भारत ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 विचारों, नवोन्मेष और उद्देश्यों का एक सशक्त संगम रहा। इसने वैश्विक भलाई के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य को आकार देने में भारतीय प्रतिभा की असाधारण क्षमता को प्रदर्शित किया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सबसे बढ़कर, इस प्रदर्शनी ने मानव प्रगति के लिए जिम्मेदारीपूर्वक, समावेशी रूप से और बड़े पैमाने पर एआई का उपयोग करने को लेकर भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इस प्रदर्शनी में वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियां, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थान एवं शोध संगठन, केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रतिनिधि और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय साझेदार एक मंच पर इकट्ठा हुए हैं।
बिल गेट्स ने एआई विकास की सराहना
माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और गेट्स फाउंडेशन के अध्यक्ष बिल गेट्स ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के तीव्र विकास की प्रशंसा करते हुए कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) और प्रौद्योगिकी के माध्यम से राज्य के विकास में तेजी देखना उत्साहजनक है। अमरावती की अपनी यात्रा के बाद गेट्स ने स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में दक्षिणी राज्य के नवाचारों की प्रशंसा की। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, एन चंद्रबाबू नायडू, गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद। स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में एआई, प्रौद्योगिकी और नवाचारों के माध्यम से आंध्र प्रदेश के विकास को गति मिलते देखना उत्साहजनक है। सोमवार को गेट्स ने अमरावती की नवविकसित राजधानी में कई कार्यक्रमों में भाग लिया, जिसकी शुरूआत मुख्यमंत्री और अन्य लोगों के साथ बातचीत से हुई, शासन में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल पर प्रस्तुतियों का अवलोकन किया और गुंटूर जिले के उंडावल्ली गांव में कृष्णा नदी के किनारे केले के बाग का दौरा भी किया। तकनीकी क्षेत्र के दिग्गज के अनुसार, भारत वैश्विक डिजिटल क्रांति का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नायडू को उनकी महत्वपूर्ण भूमिका का श्रेय दिया। गेट्स ने नायडू की दूरदर्शी सोच की भी जमकर प्रशंसा की और कहा कि माइक्रोसॉफ्ट सहित अधिकांश आईटी विशेषज्ञ तेलुगु राज्यों से हैं।
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भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा अवसर
उद्योग संगठन नैसकॉम में कृत्रिम मेधा (एआई) प्रमुख अंकित बोस ने मंगलवार को कहा कि दुनिया भर में एआई का तेज विकास भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर उत्पन्न कर रहा है और इससे उनके कारोबार पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नौकरियों में कटौती की जगह भारत में कामकाज की प्रकृति बदलेगी क्योंकि कृत्रिम मेधा (एआई) के बढ़ते उपयोग के साथ भूमिकाएं भी बदलेंगी। अंकित बोस ने यहां एआई इम्पैक्ट समिट के एक सत्र से इतर बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण के लिए सरकार और निजी क्षेत्र कदम उठा रहे हैं। बोस ने कहा, आने वाले कुछ महीनों में हम करीब डेढ़ लाख लोगों को कृत्रिम मेधा आधारित विकास कार्यों के लिए सक्षम बनाएंगे। हम सरकार के साथ मिलकर कॉलेज के लिए जरूरी पाठ्यक्रम भी तैयार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तेजी से बढ़ती प्रौद्योगिकी के कारण घरेलू या वैश्विक कंपनियों को सेवाएं देने वाली भारतीय कंपनियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। वास्तव में ये कंपनियां आगे बढ़ेंगी। बोस ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कृत्रिम मेधा के इस्तेमाल के लिए अधिक लोगों की जरूरत है और इसमें भारत की बड़ी ताकत है, हालांकि अल्प अवधि में कुछ उतार-चढ़ाव संभव है। ये टिप्पणियां अहम हैं क्योंकि भारत, सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं का बड़ा निर्यातक है। सत्र में सिफी टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राजू वेगेसना ने कहा कि कृत्रिम मेधा के मोर्चे पर अभी लंबा रास्ता तय करना है। राजू ने भारत में आंकड़ा केंद्रों के लिए बिजली आपूर्ति की उपलब्धता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, कृत्रिम मेधा कोई परियोजना नहीं है, यह एक यात्रा है। इसमें काफी समय लगेगा।





