विधानसभा चुनाव को लेकर मायावती का एलान, गेस्ट हाउस कांड को याद कर कही ये बात

जनप्रवाद ब्यूरो, लखनऊ।  बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आगामी विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ने की खबरों को गुमराह करने की नीयत से फैलायी जा रही फेक न्यूज करार देते हुए बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी अगला चुनाव अपने बलबूते ही लड़ेगी। मायावती ने कहा कि इस तरह की खबरें फैलायी जा रही हैं कि बसपा उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव गठबंधन में लड़ेगी। इसकी आम चर्चा है जो विशुद्ध रूप से लोगों को गुमराह करने की नीयत से फैलायी जा रही फेक न्यूज है। उन्होंने कहा, यह बिल्कुल गलत, झूठ, हवा-हवाई एवं मनगढ़ंत खबर है। ऐसे में नेताओं के साथ-साथ मीडिया को भी इस प्रकार की खबरों से बचना चाहिए।
एआई समिट पर कसा तंज

मायावती ने दिल्ली में हो रही एआई समिट पर भी परोक्ष रूप से तंज किया और कहा, व्यापक देशहित और जनहित की कड़वी हकीकत के बारे में देश व दुनिया को जागृत करके लोकतंत्र एवं संविधान को मजबूती प्रदान करने के बजाय इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम मेधा) को सफलता की कुंजी बताने वाली स्वार्थी चचार्एं हो रही हैं। इस बीच मीडिया जगत में भी किसी न किसी बहाने बसपा के बारे में यह चर्चा है कि पार्टी उत्तर प्रदेश में विधानसभा का अगला चुनाव गठबंधन में लड़ेगी। यह बिल्कुल झूठ है।
साजिश का लगाया आरोप

बसपा सुप्रीमो ने दिल्ली के बंगले पर कहा कि मेरी सुरक्षा के हिसाब से लंबे समय बाद टाइप-8 बंगला अलाट हुआ है। इसे मैंने स्वीकार कर लिया है। लेकिन, कुछ लोग इसके बारे में भी गलत व गुमराह करने वाली बातें फैला रहे हैं। इससे भी लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। 
गेस्ट हाउस कांड में जानलेवा हमला हुआ

उन्होंने कहा कि सपा सरकार व इनके मुखिया के इशारे पर ही दो जून 1995 को लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड में मुझ पर जानलेवा हमला हुआ। इसके बाद 03 जून 1995 को बसपा के नेतृत्व में यूपी में पहली सरकार बनी। उसी समय से सुरक्षा कारणों से मुझे तत्कालीन भारत सरकार द्वारा उच्च सुरक्षा दी गई थी। वह सुरक्षा खतरा कम होने के बजाय अब और भी बढ़ गया है। इस नाते टाइप-8 का बंगला मिला है। बसपा प्रमुख ने कहा कि वह अपनी पार्टी द्वारा अपने बलबूते पर चुनाव लड़ने के बारे में सार्वजनिक तौर पर कई बार ऐलान कर चुकी हैं और खासतौर से नौ अक्टूबर 2025 को बसपा के जन्मदाता एवं संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि के मौके पर लखनऊ में आयोजित महारैली में भी इसकी खुली घोषणा की जा चुकी है। अब ऐसी किसी भी चर्चा या बहस की कोई गुंजाइश नहीं बची है। हालांकि, साजिश के तहत कुछ लोगों और मीडिया के एक वर्ग द्वारा इस तरह की फर्जी खबरें फैलाई जा रही हैं। इसे बसपा विरोधी हथकंडा ही माना जाएगा जिस पर लोगों को ध्यान देने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। 
सपा और भाजपा पर साधा निशाना

मायावती ने कहा कि बसपा कार्यकर्ताओं को यह अच्छी तरह मालूम है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सोच संकीर्ण है। साथ ही, परम पूज्य बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का विरोधी होने के कारण इनका आंबेडकरवादी होना तथा बसपा से गठबंधन करने की नीति केवल चुनावी स्वार्थ है। बसपा प्रमुख ने कहा कि गठबंधन करने से बसपा को केवल नुकसान ही होता है, इसीलिए बसपा के लोग 2027 का विधानसभा चुनाव अकेले ही पूरे जी जान से लड़ेंगे। उन्होंने आरोप लगाया, बसपा कार्यकर्ताओं का ध्यान भटकाने के लिए ही विरोधी पार्टियां घिनौनी साजिशें करती रहती हैं। ऐसे में पार्टी के सभी लोगों से यही अनुरोध है कि वह ऐसी अनर्गल और मनगढ़ंत बातों पर कतई ध्यान ना दें और वह (कार्यकर्ता) हाथी की मस्त चाल की तरह आगे बढ़ते रहें तथा वर्ष 2007 की तरह अकेले ही यह चुनाव लड़कर फिर से बसपा की पूर्ण बहुमत की अपनी सरकार जरूर बनाएं।