जनप्रवाद ब्यूरो। वैज्ञानिकों ने बेहद चौंकाने वाली खोज की है। शोधकर्ताओं ने पाया कि आसमान में भी एक बरमूडा ट्रायंगल है, जिसके नजदीक आते ही सैटेलाइट के टुकड़े हो जाते हैं। वहां ऐसा क्यों होता है, वैज्ञानिक अब तक इस बात का पता नहीं लगा पाए हैं। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि यह इलाका अब धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यानी दुनिया भर के अंतरिक्ष मिशनों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
बरमूडा ट्रायंगल को लेकर चर्चाएं
बरमूडा ट्रायंगल को लेकर अक्सर गायब होते जहाज, लापता विमान और रहस्यमई ताकतों की कहानियां सुनी जाती हैं। किताबों से लेकर हॉलीवुड फिल्मों तक इसे अक्सर एक शापित जगह के तौर पर दिखाया गया है। ऐसा कहा जाता है कि यहां आधुनिक टेक्नोलॉजी भी फेल हो जाती है। अब यह पता चला है कि दक्षिण अटलांटिक के ऊपर पृथ्वी के आंतरिक क्षेत्र में भी एक ऐसी जगह है जिसके नजदीक जाते ही सैटेलाइट नष्ट हो जाते हैं। इस रहस्यमयी जगह को लेकर इतनी कम जानकारी है कि इससे तमाम लोक कथाएं जोड़कर लॉजिक भिड़ाया जाता है। यहां पर दुनिया भर की एजेंसियां प्रयोग कर रही हैं। हर बार कुछ ऐसा पता चलता है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान रह जाते हैं।
पृथ्वी की चुंबकीय ढाल कमजोर
वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि यहां पृथ्वी की चुंबकीय ढाल कमजोर हो जाती है। इस वजह से उपग्रह निष्क्रिय हो जाते हैं। ये दक्षिण अटलांटिक एनोमली यानी विसंगति पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में एक कमजोर बिंदु है जो सैटेलाइट तकनीक में बाधा उत्पन्न करता है और बड़ी खराबी का कारण बनता है। बता दें कि दशकों से वैज्ञानिक और शोधकर्ता इस क्षेत्र को लेकर अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस रहस्य को सुलझाने में मदद नहीं मिली है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि इस बरमूडा ट्रायंगल का क्षेत्र विस्तÞृत रूप ले रहा है।
तेजी से बढ़ रही हैं घटनाएं
वैज्ञानिकों ने पाया है कि ऐसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। 2014 से इसका क्षेत्रफल महाद्वीपीय यूरोप के आधे आकार के बराबर हो गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह शोध इसलिए चौंकाने वाली है क्योंकि इससे हमारे ग्रह के सुरक्षा कवच में लगातार बढ़ते हुए खालीपन को उजागर कर दिया है। यह उपग्रहों को टुकड़े-टुकड़े कर रहा है। बता दें कि दक्षिण अटलांटिक विसंगति यानी एसएए की खोज सबसे पहले 19वीं सदी के आते-आते की गई थी। आज भी यह अराजकता का स्रोत बना हुआ है। मार्च 2016 में जापान की हितोमी (एस्ट्रो एच) एक्स-रे वेधशाला अनियंत्रित रूप से घूमने के कारण नष्ट हो गई थी। इससे जापान को लगभग 273 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। आज भी एसएए अंतरिक्ष में हो रहे प्रयोगों में बाधा डाल रहा है। आसान शब्दों में कहें तो, एसएए हमारे ग्रह के मैग्नेटिक शील्ड में एक कमजोर कड़ी है। इससे सैटेलाइट प्रणालियां बाधित होती हैं और गंभीर खराबी उत्पन्न होती है। एक रिपोर्ट के अनुसार हमारे ग्रह का मैग्नेटिक फील्ड हमारे लिए और पृथ्वी पर मौजूद प्रत्येक जीव के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह हमें ब्रह्मांडीय विकिरण और सूर्य से आने वाले विद्युत आवेशित कणों से बचाता है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी यानी ईएसए ने भी 10 वर्षों से अधिक के चुंबकीय क्षेत्र डेटा का इस्तेमाल करते हुए अध्ययन किया। इसमें भी शोधकर्ताओं ने चिंताजनक रूप से पाया है कि यह घटना बढ़ रही है। बता दें कि हमारी पृथ्वी का मैग्नेटिक फील्ड पिघले हुए लोहे से बना है। यह सतह से लगभग 3000 किलोमीटर नीचे पृथ्वी के बाहरी कोर के रूप में कार्य करता है। यह पिघला हुआ लोहा विद्युत धाराएं उत्पन्न करता है, जो बदले में एक इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड का निर्माण करती हैं। यह सूर्य से आने वाले आवेशित कणों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच बनाता है। इस खास जगह पर यह कवच नष्ट हो रहा है।





