जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। भारत ने ओडिशा के तट से एक ऐसा धमाका किया है, जिसकी गूंज ने सीमा पार बैठे दुश्मनों के बंकरों को हिलाकर रख दिया है। भारत ने ऐसी घातक इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया जो प्रति सेकंड 5 किलोमीटर रेंज तक परमाणु बम गिराती है। इसकी सफलता ने चीन और पाकिस्तान को सीधा मैसेज भेजा है कि अगर आंख दिखाई, तो घर में घुसकर मारेंगे।
अग्नि-3 मिसाइल का परीक्षण
भारत ने अपनी रक्षा ताकत को और मजबूत करते हुए अग्नि-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल यानी आईआरबीएम का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किया गया। इस टेस्ट में मिसाइल ने बिल्कुल तय योजना के मुताबिक अपने मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। बता दें कि अग्नि-3 एक न्यूक्लियर क्षमता वाली इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 3,000 से 3,500 किलोमीटर है। इससे भारत दुश्मन देश के अंदरूनी इलाकों में रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है। रक्षा अधिकारियों का कहना है कि सफल परीक्षण ने मिसाइल सिस्टम की विश्वसनीयता और तैयारी की पुष्टि की है। रक्षा सूत्रों के अनुसार लांचिंग के दौरान मिसाइल में सभी ऑपरेशन और टेक्निकल पैरामीटर्स 100 प्रतिशत सटीक पाए गए। डीआरडीओ द्वारा तैयार किया गया यह ब्रह्मास्त्र अब पूरी तरह से अपने शिकार को तबाह करने के लिए तैयार है।
भारतीय रक्षा प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा
बता दें कि अग्नि मिसाइल सिस्टम भारतीय रक्षा प्रणाली का एक प्रमुख हिस्सा है। इससे पहले भारत ने 2025 में अपनी अत्याधुनिक मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया था। यह परीक्षण देश की मिसाइल क्षमता में एक बड़ी कामयाबी मानी गई थी। इसी तरह अग्नि-3 एक इंटरमीडिएट-रेंज की बैलिस्टिक मिसाइल है। यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। इसमें एक साथ कई टारगेट को निशाना बनाने वाली एमआईआरवी जैसी ही समान तकनीक का प्रयोग किया गया है। इस परीक्षण ने पड़ोसी मुल्कों में खलबली मचा दी है। यह मिसाइल सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि इसकी रेंज इतनी भयानक है कि पाकिस्तान का कोना-कोना इसकी जद में है। वहीं, अपनी विस्तारवादी सोच रखने वाला चीन भी अब सुरक्षित नहीं है। अग्नि-3 की मारक क्षमता चीन के बीजिंग और शंघाई जैसे प्रमुख शहरों तक तबाही मचाने का दम रखती है।
अग्नि-3 मिसाइल की खासियत
अग्नि-3 मिसाइल की बड़ी खासियत इसकी स्पीड है। इसकी रेंज 3 से 5 हजार किलोमीटर बताई जा रही है। चूंकि, इस मिसाइल का वजन कम है, इसकी वजह से इसकी रेंज को और बढ़ाया जा सकता है। इसकी स्पीड मैक 15 यानी 18,522 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यानी यह 5 से 6 किलोमीटर प्रति सेकेंड की स्पीड से परमाणु हमला करने में सक्षम है। यह भारत के दुश्मन को पलक झपकाने तक का मौका नहीं देगी। इसकी लंबाई 17 मीटर और वजन 50 हजार किलो है। भारत की अग्नि-3 मिसाइल में रिंग लेजर गाइरोस्कोप इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम भी लगा है। जिसकी खासियत ये है कि मिसाइल उड़ते समय बीच में ही टारगेट बदल सकती है। बता दें कि इससे पहले 3 फरवरी को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने 3 फरवरी को ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रामजेट तकनीक का सफल परीक्षण किया था। इस सफल परीक्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास यह उन्नत तकनीक मौजूद है। यह तकनीक लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के विकास में अहम भूमिका निभाती है। इस तकनीक से संभावित विरोधियों के मुकाबले रणनीतिक बढ़त मिलती है। परीक्षण के दौरान सभी प्रमुख उप-प्रणालियों ने अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन किया। इनमें नोजल-लेस बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोलर शामिल थे।





