जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। इसरो ने एक बार फिर साल 2025 के आखिरी मिशन में इतिहास रच दिया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने 6100 किलोग्राम वजनी ब्लू बर्ड-2 सैटेलाइट को लांच किया। यह मिशन इंटरनेट और कनेक्टिविटी की दुनिया को पूरी तरह से बदल देगा। इसरो की इस उपलब्धि पर पीएम मोदी ने बधाई दी।
बता दें कि अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानी (इसरो) ने 24 दिसंबर अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेस मोबाइल के एक अहम सैटेलाइट को अंतरिक्ष में लॉन्च कर दिया। एलवीएम3-एम6 मिशन के जरिए अमेरिकी कंपनी के कम्युनिकेशन सैटेलाइट ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया। इस ऐतिहासिक मिशन के जरिए अगली पीढ़ी का ऐसे संचार उपग्रह स्थापित किया गया जिसे दुनियाभर में सीधे स्मार्टफोन को उच्च गति वाली सेल्युलर ब्रॉडबैंड सेवा देने के लिए डिजाइन किया गया है। यह विश्व का सबसे भारी कॉमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट भी है। मिशन के तहत अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के 6100 किलो वजनी ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 संचार उपग्रह को 520 किलोमीटर दूर स्थित पृथ्वी की निचली कक्षा में 16 मिनट में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। इसरो ने इसकी लांचिंग के लिए अपने एलवीएम3 रॉकेट का इस्तेमाल किया। बता दें कि इसे इसकी क्षमताओं के चलते बाहुबली रॉकेट भी कहा जाता है। यह लांचिंग व्हीकल की छठवीं उड़ान है। वहीं यह वाणिज्यिक मिशन के लिए तीसरी उड़ान है।
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समझौते के तहत लांचिंग
यह मिशन न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड यानी एनएसआईएल और अमेरिका की कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए समझौते के तहत किया गया। बता दें कि एनएसआईएल इसरो की व्यावसायिक इकाई है। एएसटी स्पेसमोबाइल अपने अगली पीढ़ी के कम्युनिकेशन सैटेलाइट, ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 से दुनिया भर के स्मार्टफोन को सीधे 24 घंटे हाई-स्पीड सेलुलर ब्रॉडबैंड देने के लिए डिजाइन किया गया है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन का उद्देश्य उपग्रह के जरिये सीधे मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। यह नेटवर्क दुनिया में कहीं भी, कभी भी, सभी के लिए होगा। इससे 4जी और 5जी वॉयस-वीडियो कॉल, संदेश, स्ट्रीमिंग और डेटा सेवाएं बिना टॉवर के उपलब्ध होंगी।
पीएम मोदी ने किया ट्वीट
इसरो की सफल लॉन्चिंग पर खुशी जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया। जिसमें पीएम मोदी ने लिखा कि भारत के युवाओं की ताकत से, हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम ज्यादा आधुनिक और असरदार बन रहा है। एलवीएम3 ने भरोसेमंद हैवी-लिफ्ट प्रदर्शन दिखाया है। जिससे हम गगनयान जैसे भविष्य के मिशन के लिए नींव मजबूत कर रहे हैं। कमर्शियल लांच सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं। हम वैश्विक साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं। यह बढ़ी हुई क्षमता और आत्मनिर्भरता को मिला बढ़ावा आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बढ़िया है।
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बिना टॉवर की रेंज में आए मिलेगा सिग्नल
ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह एक अगली पीढ़ी (नेक्स्ट जेन) की प्रणाली का हिस्सा है। इसके सही कक्षा में स्थापित होने के बाद 4जी और 5जी स्मार्टफोन पर सीधे सेल्युलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिलेगी। उपभोक्ता को किसी अतिरिक्त एंटीना या कस्टमाइज्ड हार्डवेयर की जरूरत नहीं होगी। फिलहाल, सेल फोन को 4जी या 5जी नेटवर्क हासिल करने के लिए मोबाइल टावर की जरूरत होती है, लेकिन इस उपग्रह के सफल होने के बाद टावर का काम खत्म हो जाएगा।
बेहतर स्पीड और क्षमता
इस उपग्रह को 5,600 से ज्यादा व्यक्तिगत सिग्नल सेल बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह 120 मेगाबाइट्स प्रति सेकंड तक की अधिकतम गति (पीक स्पीड) मुहैया कराने में सक्षम है। यह स्पीड वॉइस कॉलिंग, मैसेजिंग, तेज डाटा ट्रांसफर और बिना रुकावट की वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए काफी है।
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दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच
चूंकि, उपग्रह पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाने के साथ कुछ सबसे दूरस्थ स्थानों जैसे हिमालय, महासागरों और रेगिस्तानों तक मोबाइल सेवा पहुंचा सकता है, ऐसे में इन क्षेत्रों में 4जी-5जी नेटवर्क सुविधा पहुंचाना आसान हो जाएगा। इससे वैश्विक स्तर पर डिजिटल असमानता को कम भी किया जा सकता है। यह ग्रामीण क्षेत्रों, खुले पानी और उड़ानों के दौरान नेटवर्क कवरेज की खामियों को खत्म कर सकता है। आमतौर पर इन क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति और यहां पहुंच न होने की वजह से पारंपरिक सेल्युलर नेटवर्क यहां फेल हो जाते हैं। इतना ही नहीं आपदा की स्थिति में जब टेलीकॉम इन्फ्रास्ट्रक्चर तूफान, बाढ़, भूकंप, भूस्खलन या दूसरी प्राकृतिक आपदाओं में तबाह हो जाते हैं, तब भी सैटेलाइट नेटवर्क बेहतर रहता है। इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेश यूनियन डाटा के मुताबिक, 2025 तक दुनियाभर में 200 करोड़ लोग अब भी इंटरनेट या नेटवर्क कवरेज के बिना रहने को मजबूर हैं।
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नेटवर्क फैलाने की शुरुआत
कंपनी सबसे पहले अमेरिका में चुनिंदा मोबाइल हैंडसेट में यह सुविधा मुहैया कराने का लक्ष्य रख रही है। हालांकि, बाद में अलग-अलग देशों के नियामकों से मंजूरी मिलने के बाद इसे वैश्विक स्तर पर लांच किया जा सकता है।





