दिशा बदलकर उलटा घूमने लगा धूमकेतु, भयानक विस्फोट के साथ होगा अंत

जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। खगोलिय घटनाओं में दिलचस्पी रखने वालों के लिए बहुत अच्छी खबर सामने आई है। पहली बार एक धूमकेतु अपनी दिशा बदलने के बाद उलटी दिखा में घूमने लगा है। यह सूर्य के बेहद करीब पहुंच रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि भयानक विस्फोट के साथ इस अनोखे धूमकेतु का अंत होने वाला है।
चमकीली पूंछ वाला धूमकेतु 

अपनी चमकीली पूंछ वाले धूमकेतु हमेशा से खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे हैं। अब ऐसे ही धूमकेतु ने अपने क्रिया कलापों से वैज्ञानिकों को चौंका दिया है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार नासा ने इस धूमकेतु या, कॉमेट की दिशा बदलते देखी है। यह धूमकेतु बृहस्पति परिवार का बताया गया है। खगोलशात्रियों के अनुसार ऐसा पहली बार देखा गया है। हबल टेलीस्कोप के डेटा की मदद से इस अनोखी और हैरान कर देने वाली घटना के बारे में पता चला है। इसके बारे में बताया जा रहा है कि इस कॉमेट का न्यूक्लियस यानी केंद्र बहुत छोटा है। यह केवल 1 किलोमीटर जितने साइज का है। वैज्ञानिकों के अनुसार न्यूक्लियस छोटे होने कारण यह पलटी मारने में सक्षम हुआ है। यह अनोखी घटना है। 
41पी/टटल-गियाकोबिनी-क्रेसाक नाम

इस धूमकेतु का नाम 41पी/टटल-गियाकोबिनी-क्रेसाक है। रास्ता बदलने की वजह से यह सूर्य के बेहद करीब पहुंच गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यदि सूर्य के कोरोना के भीतर अत्यधिक गर्मी के कारण यह धूमकेतु विघटित नहीं होता है, तो अप्रैल की शुरूआत में इतना चमकीला हो सकता है कि इसे असानी से देखा जा सकता है। यह अभी भी पर्याप्त शक्तिशाली दूरबीन से सूर्यास्त के समय पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम क्षितिज से लगभग 30 डिग्री ऊपर देखा जा सकता है। जैसे-जैसे यह सूर्य के निकट आ रहा है इसकी चमक तेजी से बढ़ जा रही है। 23 से 29 मार्च तक रिकॉर्ड किए गए डेटा में इसकी चमक तेजी से बढ़ती जा रही है। 
5 साल में आता है धूमकेतु

बता दें कि यह धूमकेतु भीतरी सौरमंडल में हर 5 साल में आता है। जब 2021 में यह सूर्य के करीब आया तो इसकी गति एकदम से धीमी हो गई। इस बार पलटी मारने के बाद इसकी गति धीमी होने के बजाए तेज हो गई। अचानक इसने उल्टी दिशा में घूमना शुरू कर दिया। वैज्ञानिकों के अनुसार एक बड़े विस्फोट के साथ अब इस अनोखे और शानदार धूमकेतु का अंत होने वाला है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि जब कोई धूमकेतु सूर्य के निकट आता है, तो उसकी गर्मी से जमी हुई बर्फ सीधे गैस में परिवर्तित होने लगती है। इस प्रक्रिया को उर्ध्वपातन कहा जाता है। ज्यादा गैस बनने से अंतरिक्ष में ब्लास्ट हो जाता है। इसी साथ ही सूर्य के करीब जाने वाले धूमकेतु का अंत हो जाता है। 
क्रूट्स सनग्रेजिंग परिवार का सदस्य 

डेटा के अनुसार यह धूमकेतु क्रूट्स सनग्रेजिंग परिवार का सदस्य है। बता दें कि इस परिवार के धूमकेतु सूरज के बहुत करीब से गुजरते हैं। इतिहास के कई चमकीले और शानदार नजारा दिखाने वाले धूमकेतु इसी परिवार से आए हैं। 20वीं सदी में भी एक चमकदार धूमकेतु सूर्य के करीब आया था। इसने पूर्णिमा के चांद जितना उजाला किया था। सूर्य करीब पहुंचते ही इसके हजारों टुकड़े हो गए थे। ये अंतरिक्ष में आज भी तैर रहे हैं।