जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली। दुनिया के सबसे ताकतवर टेलीस्कोप ने वो खोज लिया जो अब तक कभी नहीं देखा गया था। पृथ्वी से 650 प्रकाश वर्ष दूर हुई इस खोज से पता चला कि मौत का तांडव करने वाले ब्लैक होल के पास कैसे तारे जन्म ले लेते हैं। साथ ही यह भी पता चला कि केवल पृथ्वी के नीचे ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष में भी गैस का भरपूर भंडार है।
सबमिलीमीटर एरे यानी एएलएमए से बड़ी सफलता
दुनिया के सबसे बड़े रेडियो टेलीस्कोप एरे अटाकामा लार्ज मिलीमीटर /सबमिलीमीटर एरे यानी एएलएमए से बड़ी सफलता हासिल की है। खगोलविदों ने हमारी अपनी आकाशगंगा यानी मिल्की वे के केंद्र में स्थित एक बड़े रहस्य से पर्दा उठा दिया है। इस रिसर्च के दौरान गैस और धूल के उन उलझे हुए धागों को देखा गया है, जो अब तक इंसानी नजरों से ओझल थे। यह पहली बार है जब सेंट्रल मॉलिक्यूलर जोन के ठंडे गैस के भंडार को इतनी बारीकी से दुनिया के सामने रखा गया। 650 प्रकाश वर्ष चौड़े इस इलाके की यह तस्वीर एएलएमए द्वारा खींची गई अब तक की सबसे बड़ी और विस्तृत इमेज है। इस खोज का सबसे अहम मकसद यह समझना है कि हमारी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद विशालकाय ब्लैक होल सैजिटेरियस ए स्टार के पास सितारे कैसे जन्म लेते हैं और कैसे खत्म हो जाते हैं।
केंद्रीय हिस्सा बेहद खतरनाक
वैज्ञानिकों ने खोज में पाया कि मिल्की वे का केंद्रीय हिस्सा बेहद खतरनाक और अजीबोगरीब स्थितियों वाला इलाका है। यूरोपीय दक्षिणी वेधशाला की टीम मेंबर एशले बार्न्स के अनुसार यह जगह हमारी आंखों के लिए अदृश्य है, लेकिन अब इसकी बारीकी से जानकारी सामने आ गई है। यह ब्रह्मांड का इकलौता ऐसा गैलेक्टिक केंद्र है, जो पृथ्वी के इतना करीब है कि हम उसे इतनी गहराई से देख सकते हैं। खोज में पाया गया कि सेंट्रल मॉलिक्यूलर जोन में ठंडी गैसों का छोटा-मोटा नहीं बल्कि एक विशाल जाल बिछा हुआ है। यह आपस में टकराकर और सिमटकर भारी मात्रा में धूल के बादल बनाते हैं। इन्हीं बादलों से नए सितारों का जन्म होता है। साथ ही इसकी ग्रैविटी के कारण इन तारों में चमक आती है। वैज्ञानिकों के अनुसार आकाशगंगा के किनारों पर भी तारे बनते हैं, लेकिन ब्लैकहोल के पास यह प्रक्रिया बेहद आक्रामक और तेज होती है। एसीईएस प्रोजेक्ट के लीडर स्टीव लॉन्गमोर ने इस खोज को लेकर बेहद चौंकाने वाली बात कही। उन्होंने कहा कि मिल्की वे के केंद्र में ब्रह्मांड के कुछ सबसे बड़े सितारे मौजूद हैं। ये सितारे बहुत तेजी से अपना जीवन जीते हैं और बहुत जल्दी मर जाते हैं। इनका अंत बहुत ही शक्तिशाली सुपरनोवा या हाइपरनोवा धमाकों के साथ होता है। इन धमाकों से निकलने वाली ऊर्जा पूरे इलाके के माहौल को बदल देती है।
ब्रह्मांड के अतीत की झलक

गैस के भंडार के बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि इस क्षेत्र की परिस्थितियां बिल्कुल वैसी ही हैं, जैसी शुरुआती ब्रह्मांड की आकाशगंगाओं में रही होंगी। यानी इस तस्वीर को देखकर हम ब्रह्मांड के अतीत की झलक भी देख सकते हैं। यह वैसा ही है जैसे पृथ्वी पर पेड़-पौधे और मानव का जीवन काल निर्धारित होता है ठीक उसी तरह ब्लैकहोल के पास पैदा होने वाले तारे समय आने पर समाप्त हो जाते हैं। इससे पता चलता है कि सृष्टि का चक्र केवल धरती पर हीं बल्कि अंतरिक्ष में भी काम करता है।





