सोलर तूफान से बचाएगा यह प्लान, वैज्ञानिकों ने बना दी प्लाज्मा की दीवार

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। वैज्ञानिकों ने खतरनाक सोलर तूफान से धरती को बचाने के लिए एक अनोखा प्लान बनाया है। बोस्टन यूनिवर्सिटी के ब्रायन वॉल्श की टीम ने स्टॉर्मवॉल कॉन्सेप्ट पेश किया है। इसके तहत अंतरिक्ष में छह सैटेलाइट्स से केमिकल स्प्रे करके एक आर्टिफिशियल प्लाज्मा दीवार बनाई जाएगी।
सूरज से निकलते हैं खतरनाक सोलर तूफान 

जब भी सूरज से खतरनाक सोलर तूफान निकलते हैं वैज्ञानिक इसको लेकर अलर्ट हो जाते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि इनसे पृथ्वी के साथ-साथ अंतरिक्ष कार्यक्रमों को नुकसान पहुंचने का डर लगा रहता है। यहां देखने वाली बात यह है कि यह प्रक्रिया एक बार नहीं बल्कि बार-बार होती है। ऐसे में इस अंतरिक्ष से आने वाले खतरे को रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने नया प्लान तैयार किया है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब सूरज से निकलकर खतरनाक सोलर तूफान हमारी पृथ्वी की ओर बढ़ता है तब हमारी पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र यानी मैग्नेटोस्फीयर इसकी रक्षा करता है। यह प्राकृतिक कवच सूरज की खतरनाक किरणों को रोक लेता है। अब वैज्ञानिकों ने सोलर तूफान को रोकने के लिए बहुत ही अनोखा प्लान तैयार किया है।
ब्रायन वॉल्श के नेतृत्व में शोध

बोस्टन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक ब्रायन वॉल्श के नेतृत्व में एक टीम ने स्टॉर्मवॉल नाम का एक नया कॉन्सेप्ट पेश किया है। इस नए सिस्टम के तहत अंतरिक्ष में कई स्पेसक्राफ्ट भेजे जाएंगे। ये स्पेसक्राफ्ट सूरज से आने वाले खतरनाक सोलर तूफान के रास्ते में केमिकल्स का छिड़काव करेंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार इस तकनीक के जरिए खतरनाक जियोमैग्नेटिक तूफान के असर को आधे से ज्यादा कम किया जा सकता है। इससे हमारे सैटेलाइट, जीपीएस और बिजली ग्रिड पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। स्पेस वेदर जर्नल में ब्रायन वॉल्श और उनकी टीम का यह रिसर्च प्रकाशित किया गया है। इस मुद्दे पर ब्रायन वॉल्श ने कहा कि लोग हमेशा सोचते हैं कि अंतरिक्ष बहुत बड़ा है और सूरज बहुत विशाल है। ऐसे में हमें सिर्फ बैठकर सब झेलना होगा। इन पुरानी धारणाओं को नई नकनीक ने मानने से इनकार कर दिया है।
आॅर्बिट में तैनात होगा जियोसिंक्रोनस 

इस नए कॉन्सेप्ट के तहत छह स्पेसक्राफ्ट को जियोसिंक्रोनस आॅर्बिट में तैनात किया जाएगा। यह स्पेसक्राफ्ट अपने साथ बेरियम, लिथियम, सोडियम या कैल्शियम जैसे मैटेरियल्स लेकर जाएंगे। इन केमिकल्स को सॉलिड या लिक्विड फॉर्म में स्पेसक्राफ्ट के अंदर सुरक्षित रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर कमांड मिलते ही इन्हें गैस के रूप में वेपोराइज कर दिया जाएगा। जब खतरनाक सोलर तूफान धरती की तरफ आएगा तो मिशन कंट्रोलर्स इन स्पेसक्राफ्ट को केमिकल रिलीज करने का आॅर्डर देंगे। जैसे ही स्पेसक्राफ्ट से यह केमिकल बाहर निकलेगा, सूरज की रोशनी इसे तुरंत वाष्पीकृत कर देगी। इससे यह पूरा मैटेरियल एक इलेक्ट्रिकली चार्ज्ड प्लाज्मा क्लाउड यानी बादल में परिवर्तित हो जाएगा। यह आर्टिफिशियल प्लाज्मा मैग्नेटोस्फीयर के उस हिस्से की तरफ बढ़ेगा, जिसका सामना सीधे सूरज से होने वाला है। इससे हमारी धरती की चुंबकीय सीमा ज्यादा मोटी और मजबूत हो जाएगी।
तकनीक का सबसे बड़ा फायदा 

इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह किसी एक देश के लिए नहीं बल्कि पूरी पृथ्वी के लिए काम करेगी। बता दें कि मैग्नेटोस्फीयर पूरी दुनिया को कवर करता है, इसलिए स्टॉर्मवॉल भी पूरी पृथ्वी के लिए एक कलेक्टिव शील्ड बनेगी। ब्रायन वॉल्श के अनुसार अगर इसे बनाया और तैनात किया जाता है, तो यह धरती के सभी लोगों की मदद करेगा। इसे इस तरह नहीं बनाया जा सकता है जिससे यह सिर्फ एक देश या सैटेलाइट्स के एक ग्रुप की रक्षा करे। इसके अलावा इस सिस्टम से धरती को कोई पर्यावरणीय नुकसान भी नहीं होगा। रिसर्च में बताया गया है कि यह आर्टिफिशियल प्लाज्मा लंबे समय तक नहीं रहेगा। यह प्लाज्मा लगभग छह घंटे के भीतर सोलर विंड के साथ बह जाएगा। यह पृथ्वी के वायुमंडल में वापस प्रवेश नहीं करेगा, जिससे हमारा पर्यावरण पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।