धरती पर आया रहस्यमयी सिग्नल, वैज्ञानिक बोले खुलेंगे अंतरिक्ष के राज

जनप्रवाद, ब्यूरो, नई दिल्ली। वैज्ञानिकों ने दो टकराती आकाशगंगाओं से निकले अब तक के सबसे शक्तिशाली मेजर यानी माइक्रोवेव लेजर की खोज का दावा किया है। यह बेहद दूर से आने वाली तीव्र और केंद्रित ऊर्जा किरण है। यह रहस्यमयी सिग्नल धरती से 8 अरब प्रकाश वर्ष दूर से आया है। इस खोज से अंतरिक्ष के ऐसे राज खुलेंगे जिससे दुनिया अब तक अंजान थी।
रहस्यों से भरा हुआ है हमारा ब्रह्मांड 


हमारा ब्रह्मांड रहस्यों से भरा हुआ है। कभी-कभी वहां से ऐसे संकेत मिलते हैं, जो वैज्ञानिकों को भी सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि यह किस तरह की घटना है। अब वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष की अनंत गहराइयों में अब तक का सबसे दूर स्थित और चमकीला स्पेस लेजर ढूंढ निकाला है। यह दो विशालकाय आकाशगंगाओं के आपस में टकराने से पैदा हुआ एक मेगामेजर बताया जा रहा है। यह रोशनी 8 अरब प्रकाश वर्ष दूर से आई है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह घटना तब हुई थी जब हमारे ब्रह्मांड की उम्र उसकी वर्तमान आयु की सिर्फ आधी थी। इसका मतलब है कि यह रोशनी तब चली थी, जब ब्रह्मांड की उम्र आज के मुकाबले आधी भी नहीं थी। उस सयम हमारी पृथ्वी का तो जन्म भी नहीं हुआ था। वैज्ञानिकों ने इस घटना को हैटलस जे 142935 नाम दिया है। यह खोज दिखाती है कि ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में आकाशगंगाएं कितनी अशांत और ऊर्जावान हुआ करती थीं।
एक जैसे फोटॉन उत्सर्जित करता है परमाणु 


वैज्ञानिकों के अनुसार लेजर या मेजर बनने की प्रक्रिया मूल रूप से एक जैसी होती है। इसके लिए पहले परमाणुओं को अस्थिर, उच्च ऊर्जा अवस्था में पहुंचाया जाता है। इसके बाद जब प्रकाश कण यानी फोटॉन इन उत्तेजित परमाणुओं से टकराते हैं तो वे अपनी ऊर्जा छोड़ते हुए नए फोटॉन उत्सर्जित करते हैं। यह एक श्रृंखला प्रतिक्रिया पैदा करता है। जिसमें लगातार अधिक संख्या में फोटॉन उत्पन्न होते जाते हैं। चूंकि, हर परमाणु एक जैसे फोटॉन उत्सर्जित करता है, इसलिए पूरी किरण एक ही आवृत्ति यानी फ्रीक्वेंसी की होती है। इसी वजह से एक अत्यंत केंद्रित और सुसंगत बीम बनती है, ठीक लेजर की तरह लेकिन माइक्रोवेव तरंगों के रूप में।
दूरस्थ आकाशगंगाओं का रहस्य

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मेजर दूरस्थ आकाशगंगाओं और उनके केंद्रों में चल रही चरम गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए बेहद उपयोगी होते हैं। इनसे वैज्ञानिक यह समझ सकते हैं कि आकाशगंगाएं कैसे विकसित होती हैं। टकराव के दौरान उनमें क्या भौतिक प्रक्रियाएं चलती हैं। शुरुआती ब्रह्मांड में ऊर्जा का वितरण किस तरह हुआ करता था। इस खोज को ब्रह्मांडीय भौतिकी के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह खोज सिर्फ एक खगोलीय घटना का रिकॉर्ड नहीं, बल्कि ब्रह्मांड के शुरुआती इतिहास को समझने की एक नई खिड़की भी है। इतनी दूर और शक्तिशाली मेजर से वैज्ञानिक यह जान सकते हैं कि आकाशगंगाओं की टक्कर के दौरान गैस और धूल कैसे सघन होती है। साथ ही यह भी जान सकेंगे कि सुपरमैसिव ब्लैक होल के आसपास ऊर्जा कैसे केंद्रित होती है और तारा निर्माण की प्रक्रिया कितनी तीव्र होती है।