बुधवार सुबह सम्राट चौधरी सीएम पद की शपथ लेंगे

जनप्रवाद ब्यूरो, पटना।
बिहार राज्य के गठन के बाद पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है। नीतीश कुमार के इस्तीफा के बाद अब उनकी जगह सम्राट चौधरी बिहार के नए सीएम होंगे। उन्हें बीजेपी विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। वे  बुधवार को 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उन्होंने नब्बे के दशक में अपनी राजनीतिक पारी का आगाज किया था। सात साल में उन्होंने वह बुलंदी छू ली जो बड़े-बड़े नेता नहीं छू पाए। वे भले ही राबड़ी देवी की आरजेडी सरकार में सबसे युवा मंत्री रहे और मांझी की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने, लेकिन सियासत में बड़ी पहचान भाजपा में ही मिली।

मुख्यमंत्री बनने तक का सफर
16 नवंबर, 1968 को जन्म लेने वाले सम्राट चौधरी ने बहुत कम उम्र में राजनीति शुरू की थी। वैसे भी वह बचपन से राजनीति को देखते-समझते रहे हैं, क्योंकि उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार की एक बड़ी राजनीतिक पहचान रहे। शकुनी चौधरी बिहार में लंबे समय तक मंत्री रहे हैं। सम्राट चौधरी ने 1990 के दशक में आरजेडी से अपने सियासी सफर की शुरुआत की।  उनको राजनीति में आए हुए अब करीब 35 साल हो चुके हैं। उन्होंने राजनीति में बड़ा वक्त राष्ट्रीय जनता दल के साथ गुजारा। वह राबड़ी देवी की सरकार में भी मंत्री रहे थे। 2018 में वे भाजपा में शमिल हुए। 2020 में जैसे ही चुनाव के बाद सुशील कुमार मोदी को भाजपा ने बिहार से हटाकर दिल्ली भेजा तो सम्राट के लिए जैसे राहें खुल गईं। सम्राट चौधरी ने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह बिहार भाजपा की पहचान बन चुके हैं। 2019 में जब नित्यानंद राय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे तो सम्राट को उनका डिप्टी बनाया गया था। इस बार सम्राट चौधरी बिहार विधानसभा की तारापुर सीट से विधायक बने हैं। तारापुर मुंगेर जिले में है। सम्राट चौधरी मूल रूप से मुंगेर जिले के तारापुर में ही लखनपुर के रहने वाले हैं। मुंगेर जिला पहले बहुत बड़ा था, जिसमें बेगूसराय, खगड़िया, शेखपुरा, लखीसराय आदि भी थे। शकुनी चौधरी की पहचान तारापुर के कारण मुंगेर से खगड़िया तक से जुड़ी है। मतलब, इन इलाकों के लोग इन्हें अपना मानते हैं। सम्राट के साथ भी यही है।