जनप्रवाद ब्यूरो, टीम। दुनिया में जारी युद्धों में ड्रोन वॉरफेयर की बढ़ती भूमिका को देखते हुए भारतीय सेना भी बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब सेना अपने अग्रिम मोर्चों को मानव रहित हवाई प्रणालियों यानी यूएवी से पूरी तरह लैस करेगी। यह निर्णय ऐसे ही नहीं लिया गया है। भारत में टर्बोजेट पॉवर वाला ड्रोन बन रहा है। यह पलक झपकते ही दुश्मन पर हमला कर देगा।
चार दिवसीय कमांडर सम्मेलन
दिल्ली में चल रहे चार दिवसीय कमांडर सम्मेलन में मल्टी डोमेन ऑपरेशंसके माहौल में ड्रोन के व्यापक उपयोग पर चर्चा की जा रही है। इस चर्चा में पाया गया कि हाल के संघर्षों ने यह साफ किया है कि छोटे और सस्ते ड्रोन युद्ध की दिशा बदल सकते हैं। ऐसे में अग्रिम मोर्चों पर हमलावर ड्रोन की तैनाती और उनके संचालन की रणनीति तैयार की जाएगी। दुश्मन के ड्रोन को बेअसर करने के लिए अधिक ड्रोन-रोधी तकनीकें शामिल करने पर भी बात चल रही है। बता दें कि साल 2026 को इयर आफ नेटवर्किंग एंड डाटा
सेंट्रिसिटी घोषित करने के बाद यह सेना का पहला बड़ा सम्मेलन है। सेना का जोर ड्रोन से मिलने वाले डाटा को रीयल-टाइम में कमांड सेंटर्स तक पहुंचाने और सटीक स्ट्राइक सुनिश्चित करने पर है। सम्मेलन का फोकस मल्टी डोमेन आपरेशंस पर भी है। जिसमें थल, जल और नभ के साथ ही साइबर और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में एकीकृत युद्ध लड़ने की क्षमता विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
भारत में नई पीढ़ी के बनाए ड्रोन
बता दें कि भारत में नई पीढ़ी के ड्रोन भी बनाए जा रहे हैं। जिसमें कई निजी रक्षा कंपनियां भी शामिल हैं। हाल ही में देश के एक प्राइवेट डिफेंस स्टार्टअप ने अटैक ड्रोन यानी टर्बोजेट लोइटरिंग मुनिशन बनाने की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार टर्बोजेट लोइटरिंग मुनिशन एक ऐसा सिस्टम है जिसे लंबी दूरी और हाई-स्पीड सटीक हमलों के लिए डिजाइन किया गया है। बता दें कि कंपनी पहले से ही 1000 किमी रेंज वाले अनमैन्ड अटैक ड्रोन पर काम कर रही है। नए प्रोजेक्ट का फोकस बेहद तेजी से हमला करने वाले हथियार विकसित करने पर है। टर्बोजेट ड्रोन की बात करें तो यह सामान्य ड्रोन से अलग है। सामन्य ड्रोन जहां पारंपरिक पिस्टन-चालित इंजन से ताकत पाते हैं, वहीं नया ड्रोन टर्बोजेट इंजन से उड़ान भरता है। पारंपरिक ड्रोन स्पीड की जगह हवा में लंबे समय तक रहने को प्राथमिकता देते हैं। नए टर्बोजेट ड्रोन को दुश्मन के इलाके में बेहद तेजी से पहुंचने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध वातावरण तैयार
देश में ही विकसित किए जा रहे इस सिस्टम को इलेक्ट्रॉनिक युद्ध वातावरण में भी पूरी क्षमता से काम करने के लिए विकसित किया गया है। इसका मतलब है कि टर्बोजेट ड्रोन जैमिंग और सिग्नल व्यवधान का सामना भी कर सकता है। यह भारी सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्र में भी मिशन को अंजाम दे सकता है। टर्बोजेट ड्रोन की रेंज 100 किलोमीटर होगी। यह तेजी से लक्ष्य तक पहुंचने के अलावा एआई की मदद से खुद ही लक्ष्य की पहचान कर सकता है। साथ ही यह लक्ष्य पर हमला करने के लिए काफी समय तक उसके ऊपर मंडरा भी सकता है। लगभग 100 किलोमीटर की ऑपरेशनल रेंज वाले इस सिस्टम को अग्रिम पंक्ति के पीछे तैनात किया जा सकता है। इसकी रेंज जमीनी सेना के लिए इसे एक फोर्स मल्टीप्लायर बना देती है। सेना इसकी मदद से दुश्मन के कमांड पोस्ट और मोबाइल रडार जैसी सुविधाओं को निशाना बना सकती है। नए टर्बोजेट प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी खासियत दिन-रात काम करने वाला सेंसर सूट है। यह इसे चलते-फिरते लक्ष्य पर भी सटीक हमला करने की क्षमता देता है। टर्बोजेट ड्रोन हमले से पहले लक्ष्य की स्वयं ही पुष्टि करने में भी सक्षम है। बता दें कि भारतीय सेना भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए अपनी ड्रोन युद्ध की क्षमता बढ़ा रही है। सेना का लक्ष्य अपने हर सैनिक को ड्रोन आॅपरेट करने में माहिर बनाना है। साथ ही हर रेजिमेंट और बटालियन को विभिन्न प्रकार के ड्रोन से लैस किया जा रहा है। आने वाले समय में टर्बोजेट ड्रोन भी सेना के हथियार जखीरे का हिस्सा बन सकता है।




