जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। खगोलविदों ने ब्रह्मांड में एक बेहद अजीब ग्रह सीजे 3098 बीकी खोज की है। यह ग्रह अपने तारे की घूमने की दिशा से ठीक उल्टी दिशा में परिक्रमा कर रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह ग्रह लगभग 136 डिग्री के झुकाव पर चक्कर काट रहा है। इस अजीब बर्ताव के पीछे किसी दूसरे भारी ग्रह या तारे का हाथ नहीं मिला है।
अक्सर जब हम किसी ज्योतिषी से मिलते हैं तो वह बताता है कि आपकी कुंडली में इस ग्रह की चल वक्री यानी उल्टी हो चुकी है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में कई ग्रहों को बहुत ही शुभ ग्रह माना जाता है। ये ग्रह प्रेम, सौंदर्य, धन, आकर्षण और भौतिक सुख-सुविधाओं आदि का कारक माने जाते हैं। जब यही ग्रह राशि वक्री यानी उल्टी चाल चलते हैं तो इसका असर सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ता है। यह बातें अभी तक केवल ज्योतिष शास्त्र में सुनने को मिलती थी। अब लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने एक नए ग्रह का पता लगाया है। यह ग्रह अपने तारे के घूमने की दिशा के ठीक विपरीत चक्कर लगा रहा है। इस अनोखे ग्रह को सीजे 3090 बी नाम दिया गया है। अध्ययनकर्ताओं ने एनआईआरपीएस नियर इंफ्रारेड स्पेक्ट्रोग्राफ से मिले डेटा का एनालिसिस किया। इसमें पता चला है कि इस ग्रह की आॅर्बिट लगभग 136 डिग्री झुकी हुई है। इसका मतलब यह है कि यह ग्रह सच में उल्टी दिशा में घूम रहा है।
आकार में यह नेप्च्यून के बराबर एक छोटा ग्रह है। सामान्य तौर पर अंतरिक्ष में सभी ग्रह अपने तारे की दिशा में ही घूमते हैं। यह ग्रह लगभग 136 डिग्री के झुकाव के साथ पूरी तरह उल्टी चाल चल रहा है। इस खोज ने ग्रह बनने के सदियों पुराने मॉडल्स पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बता दें कि हमारा सौरमंडल में ग्रहों का निर्माण गैस और धूल के विशाल बादलों से होता है। जब कोई तारा बनता है तो उसके चारों तरफ घूमती हुई डिस्क से ही ग्रह तैयार होते हैं। इसी वजह से ग्रह अपने तारे के घूमने की दिशा को ही अपना लेते हैं। हमारे सौरमंडल के सभी प्रमुख ग्रह इसी प्राकृतिक नियम का पालन करते हैं। वहीं इस ग्रह ने नियमों को पूरी तरह से नकार दिया है। ग्रह की इस चाल पर वैज्ञानिकों का कहना है कि जब भी कोई उल्टा घूमता ग्रह मिलता है, तो वे किसी बाहरी शक्ति को जिम्मेदार मानते हैं। आमतौर पर कोई भारी भरकम ग्रह या पास का कोई दूसरा तारा ऐसी स्थिति पैदा करता है। किसी बड़े आॅब्जेक्ट का ग्रैविटेशनल खिंचाव छोटे ग्रह को उसकी सामान्य कक्षा से भटका देता है। समय बीतने के साथ यह खिंचाव ग्रह को इतना झुका देता है कि वह उल्टा घूमने लगता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह रिसर्च बस यहीं तक सीमित रहने वाली नहीं है। रिसर्च टीम ने इस सिस्टम में ऐसे ग्रह की तलाश तेज कर दी है जिसके प्रभाव से यह ग्रह उल्टा घूम रहा है। यानी इस ग्रह के आसपास अन्य ग्रह भी मौजूद हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई थी कि उन्हें कोई छिपा हुआ बड़ा ग्रह मिल जाएगा। वहीं नई थ्योरी के अनुसार इस तारे ने अपने आसपास से गैस और धूल की एक दूसरी डिस्क खींची होगी। यह दूसरी डिस्क पहले वाली डिस्क से बिल्कुल अलग दिशा में घूम रही थी। अगर इस ग्रह का जन्म उस दूसरी डिस्क से हुआ है, तो इसकी उल्टी दिशा स्वाभाविक हो सकती है। इसका मतलब यह है कि यहां कोई हिंसक टक्कर नहीं हुई थी। यूनिवर्सिटी आॅफ जेनेवा के प्रोफेसर विंसेंट बोरियर का कहना है कि किसी दूसरी डिस्क से नए सिस्टम का बनना एक बेहद रोमांचक विचार है। इससे पता चलता है कि आसपास का माहौल ग्रहों की बनावट पर गहरा असर डालता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस सफलता से भविष्य में दूसरे मंद तारों के आसपास छिपे ग्रहों को समझना बेहद आसान हो जाएगा। इससे हमें अपनी गैलेक्सी के सबसे आम तारों के बारे में कई नई जानकारियां मिलेंगी। वैज्ञानिकों ने इस खोज को एक और अहम पहलू से जोड़ दिया है। उनके अनुसार पुरानी थ्योरीज यह मानती थीं कि ग्रहों का जन्म एक शांत और व्यवस्थित माहौल में होता है। यह नई खोज इशारा करती है कि तारों के आसपास की शुरुआत काफी उथल पुथल भरी हो सकती है।





