नयी दिल्ली, एजेंसी। उच्चतम न्यायालय ने अवैध निर्माण एवं आवासीय संपत्तियों का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को मेरठ में 16,000 से अधिक संपत्तियां सील करने और अनधिकृत निर्माण ढहाने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की पीठ ने मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में उन जमीनों की प्रकृति की विस्तृत जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग भी गठित किया है, जहां ये अवैध आवासीय कॉलोनियां विकसित हुई हैं। पीठ ने उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अध्यक्ष पी. गुरुप्रसाद की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा, ‘‘वस्तु स्थिति रिपोर्ट पढ़ने के बाद हमें यह जानकर हैरानी और चिंता हुई कि उल्देपुर में सैकड़ों अवैध आवासीय कॉलोनियां बन गई हैं।’’ पीठ ने कहा कि विभाग ने मेरठ के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण एवं सर्वेक्षण किया है। रिपोर्ट के अनुसार शहर को चार क्षेत्रों-जोन-ए, जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी-में बांटा गया है। पीठ ने 21 सितंबर के अपने आदेश में कहा, ‘‘जोन-ए में निरीक्षण और सर्वेक्षण के लिए तैनात 16 दल ने 16,726 निर्माण पूरी तरह अवैध या अनधिकृत पाए हैं।
इनमें 12,907 आवासीय, 874 आवासीय एवं गैर-आवासीय दोनों तरह के और 2,945 गैर-आवासीय निर्माण हैं।’’ न्यायालय अवैध निर्माण कार्यों के संबंध में पूर्व में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किए जाने से जुड़ी अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा है। उसने अधिकारियों को जोन-ए में चिह्नित सभी 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, ‘‘इस प्रक्रिया में पहला कदम वहां रहने या काम करने वाले लोगों से परिसर खाली कराना और इन सभी 16,726 अवैध निर्माणों को सील करना है। हम इसी के अनुसार निर्देश देते हैं। संभव है कि इनमें से कुछ इमारतें जर्जर हालत में हों और उनके गिरने से लोगों की जान जा सकती है। हम किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं चाहते। इसलिए तत्काल कार्रवाई जरूरी है। हम सभी चारों जोन के संबंध में शीघ्र कार्रवाई करने का निर्देश देते हैं।’’ पीठ ने कहा कि यदि दुर्भाग्यवश ऐसी कोई घटना होती है जिसमें निर्दोष लोगों की जान जाती है तो इसके लिए संबंधित सरकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। न्यायालय ने कहा कि रिपोर्ट में जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी की स्थिति का उल्लेख नहीं है, इसलिए इन तीन क्षेत्रों में अवैध निर्माणों की संख्या की जानकारी उसके पास नहीं है। पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई पर संबंधित प्राधिकारी को जोन-बी, जोन-सी और जोन-डी के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी। उसने कहा, ‘‘हालांकि, जोन-ए में अवैध निर्माणों को चिह्नित किया जा चुका है, इसलिए अब उन्हें ढहाने के लिए उचित कार्रवाई की जाए।’’ न्यायालय ने निर्माण ढहाने की कार्रवाई जारी रखने और अगली सुनवाई तक इस संबंध में ताजा वस्तु स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया। उल्देपुर के संबंध में पीठ ने कहा कि रिपोर्ट से पता चलता है कि शुरुआत में सील की गईं 44 संपत्तियों के मालिकों को नोटिस जारी किए गए थे। पीठ ने कहा कि इन 44 संपत्तियों में से 20 को ढहाया जा चुका है और उनका अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल भी रोक दिया गया है। पीठ ने कहा, ‘‘हम अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि सील की गई 44 संपत्तियों में से शेष 24 को भी जल्द से जल्द ढहाया जाए।’’ पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) धूलिया की अध्यक्षता वाला न्यायिक आयोग इस बात की भी जांच करेगा कि मेरठ विकास प्राधिकरण पांच वर्ष से अधिक समय तक निष्क्रिय क्यों रहा, जिससे इन अवैध आवासीय कॉलोनियों को विकसित होने का मौका मिला। आयोग यह भी पता लगाएगा कि क्या ये अवैध आवासीय कॉलोनियां मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की मिलीभगत से बनाई गईं और वह इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा। न्यायालय ने मामले को दिसंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने और उसके निर्देशों के तहत की गई कार्रवाई पर विस्तृत वस्तु स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया।





