पाकिस्तान की फिर हुई फजीहत, आतंकवाद पर नहीं दे पाए जवाब

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। बड़बोले पाकिस्तान की एक बार फिर बड़ी फजीहत हुई है। यूएनजीए में कश्मीर मुद्दे पर नई दिल्ली को घेरने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान के पीएम शाहबाज शरीफ को पेटल गहलोत ने जमकर सुनाया। गहलोत ने आतंकवाद, ओसामा बिन लादेन, पीओके और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर पाकिस्तान को जब घेरा तो  शहबाज शरीफ की बोलती बंद हो गई। वे बिना जवाब दिए भाग निकले। संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की बड़ी फजीहत हुई है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से जब लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद को लेकर सवाल किया गया तो उनकी बोलती बंद हो गई और वह जवाब दिए बिना निकल गए। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने 23 मिनट के भाषण में कश्मीर मुद्दा उठाते हुए शहबाज ने कहा कि इसका न्यायपूर्ण और निष्पक्ष समाधान जरूरी है। पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में अमेरिका की चापलूसी की साथ ही भारत के खिलाफ झूठ का पुलिंदा पढ़ा। उनके इस स्पीच पर भारत ने राइट टू रिप्लाई के तहत करारा पलटवार किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद, सेना के शासन, अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से बार-बार दोहराए जाने वाले झूठ सच नहीं बन जाते। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। पाकिस्तान को हमारे केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर नहीं बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके की बात करनी चाहिए कि वहां कितने बुरे हालात हैं। जनता सड़कों पर है। लोग पाकिस्तान से अलग होना चाहते हैं, लेकिन वहां की सरकार बंदूक की नोक पर लोगों पर अत्याचार कर रही है।

पेटल गहलोत ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के बयान को बेतुका बताते हुए कहा कि दुनिया को 9/11 आतंकी हमले के संदर्भ को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में सेना की प्रमुख अकादमी के बिल्कुल करीब रह रहा था। इसके अलावा भारत की प्रतिनिधि ने पाकिस्तान की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गहरे सवाल उठाए।  पेटल गहलोत ने पाकिस्तान में इस्तेमाल होने वाले शब्द फॉर्म 47 सरकार से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग जिसे खुद फॉर्म 47 सरकार यानी धांधली की सरकार कहते हैं, उससे ऐसी ही उम्मीद की जा सकती है। बता दें कि फॉर्म 47 एक ऐसा दस्तावेज है, जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र के अनकन्फर्म्ड नतीजों की जानकारी होती है। इसमें डाले गए और रद्द किए गए वोटों की संख्या का विवरण शामिल है। यह अंतिम वेरिफिकेशन से पहले तैयार किया जाता है। फरवरी 2024 के आम चुनाव के बाद इमरान खान की पार्टी पीटीआई और अन्य आलोचकों ने आरोप लगाया कि फार्म 47 में दर्ज वोटों की संख्या मतदान केंद्रों पर दर्ज फार्म 45 के आंकड़ों से मेल नहीं खाती थी। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि फार्म 47 तैयार करते समय चुनाव नतीजों में हेरफेर की गई। जिससे पीटीआई समर्थित उम्मीदवारों की जीत छीन ली गई।

इसके अलावा महासभा की बैठक के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की यात्रा के दौरान शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद के आतंकी कनेक्शन पर जवाब देने के बजाय चुप्पी साधना मुनासिब समझा। मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में शहबाज को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पहुंचते देखा गया। इसी दौरान कुछ पत्रकारों ने सवाल दाग दिया-प्रधानमंत्री, आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे? शहबाज ने इसका कोई जवाब नहीं दिया। कुछ देर बाद जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से बाहर निकल रहे थे, तो यह मुद्दा फिर से उठाया गया। रिपोर्टरों ने पूछा-आप लश्कर सरगना हाफिज सईद पर मुकदमा कब चलाएंगे? शहबाज ने एक बार फिर जवाब देने से इन्कार कर दिया और पत्रकारों के बीच से गुजर गए। उल्लेखनीय है कि हाफिज सईद पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है और भारत के मोस्ट-वांटेड आतंकियों में शुमार है। वह 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में आरोपी है। हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लश्कर के पाकिस्तान स्थित गुर्गों ने अंजाम दिया था। एजेंसी के पूरक आरोपपत्र में हाफिज सईद को आरोपित के तौर पर नामजद किया गया है। संयुक्त राष्ट्र ने उसे वैश्विक आतंकी घोषित कर रखा है। अमेरिका सरकार की ओर से भी उस पर एक करोड़ डालर का इनाम रखा गया है।