सऊदी अरब पर ड्रोन हमले शुरू, अमेरिका ने यात्रा पर लगाई रोक

जनप्रवाद ब्यूरो, नोएडा। सऊदी अरब पर हूति विद्रोहितयों ने मिसाइल के बाद अब ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। इन हमलों से पश्चिमी एशिया में तनाव काफी बढ़ गया है। वहीं अमेरिका ने अपने कर्मचारियों की सऊदी अरब की यात्रा पर रोक लगा दी है। इसी बीच ईरान ने भी अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है।
पश्चिम एशिया में शांति की राह आसान नहीं 

पश्चिम एशिया में शांति की राह आसान नहीं है। यह युद्ध अब और भी भीषण होता जा रहा है। पिछले दो हफ्तों के भीतर जिस तरह का माहौल बना है वह पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है। सऊदी अरब पर हूति विद्रोहियों ने मिसाइल के बाद ड्रोन हमले शुरू कर दिए हैं। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या अल-सरीया ने आनलाइन पोस्ट किए गए एक बयान में कहा कि रियाद में संवेदनशील ठिकानों और लाल सागर के तट पर स्थित सरकारी तेल और गैस कंपनी सऊदी अरामको की यनबू स्थित सुविधाओं पर हमला करने के लिए बड़ी संख्या में बैलिस्टिक, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। याह्या अल-सरीया ने आगे कहा कि ये हमले सऊदी दुश्मन की ओर से यमनी राजधानी सना को निशाना बनाने की आपराधिक कोशिशों के जवाब में किए गए हैं। बता दें कि सना पर हूती विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया है। हूती विद्रोही यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के खिलाफ गृहयुद्ध लड़ रहे हैं। इस सरकार को सऊदी अरब का समर्थन हासिल है। हाल के महीनों में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के भीतर कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इसी सप्ताह उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने यमन के ऊपर उड़ रहे एक सऊदी लड़ाकू विमान को गिरा दिया है। यमन के सैन्य सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच हुई लड़ाई में 48 लोगों की मौत हुई है। इससे पहले पिछले हफ्ते हूतियों ने लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाह शहर मोखा और बाब-अल मंदेब में मौजूद मायून द्वीप पर भी कब्जा किया था। इन दोनों जगहों पर सऊदी अरब के समर्थन वाली यमन की सरकारी सेना का नियंत्रण था। हूतियों के इन द्वीपों पर कब्जे से लाल सागर के समुद्री रास्ते पर उनका दबदबा और मजबूत हो गया है। बाब-अल-मंदेब एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों के लिए शॉर्टकट रास्ता है। यहां से गुजरने के बाद जहाज स्वेज नहर के रास्ते भूमध्य सागर तक पहुंचते हैं। इससे पूरी दुनिया में तेल का संकट गहरा सकता है।
मिसाइल हमले को रोकने का दावा

दूसरी ओर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि हूतियों द्वारा किए गए एक बड़े मिसाइल हमले को रोक दिया है। गठबंधन ने बिश, ताइफ, फरासन और यनबू में नागरिक आबादी और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कोशिशों की भी जानकारी दी है। रियाद में एयरपोर्ट के पास विस्फोट और धुएं का बड़ा गुबार दिखाई देने की खबर भी सामने आई है। सऊदी अधिकारियों के अनुसार इस घटना में किसी के हताहत होने या नुकसान की सूचना नहीं है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि सऊदी ने भले ही एक मिसाइल हमले को रोकने का दावा किया है, लेकिन इससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
अमेरिका ने बड़ा अलर्ट जारी किया 

यमन के हूती समूह के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद सऊदी अरब में सुरक्षा को लेकर अब अमेरिका ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। अमेरिकी मिशन ने सऊदी अरब में काम कर रहे अपने सरकारी कर्मचारियों को ताइफ और यनबू शहरों की यात्रा के लिए विशेष अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम सरकारी काम के साथ-साथ निजी यात्रा पर भी लागू होगा। अमेरिकी मिशन ने कहा कि यह फैसला मौजूदा सुरक्षा स्थिति को देखते हुए लिया गया है। साथ ही सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी नागरिकों से सतर्क रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। हवाई हमले की स्थिति में लोगों को खिड़कियों और कांच के दरवाजों से दूर रहने की सलाह दी गई है। अमेरिका ने लोगों से प्रदर्शन और बड़ी भीड़ से बचने तथा ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने को भी कहा है, जिन्हें सार्वजनिक रूप से अमेरिका से जुड़ा माना जाता है।
वॉशिंगटन को सीधी चुनौती

 

ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के बीच तेहरान ने वॉशिंगटन को सीधी चुनौती दी है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा कि अगर अमेरिका युद्ध को लेकर गंभीर है तो अपने सैनिकों को ईरान की जमीन पर भेजे। उन्होंने सवाल किया कि अमेरिका केवल हवाई हमले करके पीछे क्यों हट रहा है। ईरान ने अमेरिका के सहयोगियों को भी कड़ी चेतावनी दी है। ईरानी सैन्य केंद्रीय कमान ने सरकारी मीडिया पर कहा कि अगर अमेरिका और उसके सहयोगी कोई नया हमला करते हैं तो लगातार जवाबी कार्रवाई होगी। इसी तरह ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने भी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जब तक अमेरिका तेहरान की शर्तें नहीं मानता, तब तक न तो होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाएगा और न ही उसके साथ बातचीत पर विचार किया जाएगा।