जनप्रवाद ब्यूरो, नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की जानी मानी वरिष्ठ वकील डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने इतिहास रच दिया है। वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) से भारत की पहली 'ओपनली क्वीर' (खुले तौर पर क्वीर) सांसद बन गईं। डॉ. मेनका गुरुस्वामी LGBTQ+ अधिकारों को कानूनी मान्यता दिलाने और संवैधानिक कानून को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका के लिए मशहूर हैं। उच्च सदन में उनका चुनाव सरकार में LGBTQ+ प्रतिनिधित्व को दर्शाता है।
मेनका गुरुस्वामी कौन हैं?
मेनका का जन्म 1974 में हैदराबाद में हुआ था। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड (रोड्स स्कॉलर, BCL और D.Phil) और हार्वर्ड लॉ स्कूल से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक विशिष्ट करियर बनाया। उन्होंने येल लॉ स्कूल, NYU स्कूल ऑफ लॉ और यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो फैकल्टी ऑफ लॉ में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर पढ़ाया है, साथ ही कोलंबिया लॉ स्कूल में बीआर अंबेडकर रिसर्च स्कॉलर और लेक्चरर के रूप में काम किया है, जहां उनका मुख्य जोर संघर्ष के बाद उभरे लोकतंत्रों में संवैधानिक संरचना पर रहा है। गुरुस्वामी वर्तमान में एक जानी-मानी संवैधानिक वकील हैं, जिन्होंने 2018 के सुप्रीम कोर्ट केस में अहम भूमिका निभाई थी। इस केस में धारा 377 के कुछ हिस्सों को रद्द कर दिया गया था, जिससे भारत में समलैंगिकता को प्रभावी रूप से अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया।

सबसे प्रभावशाली विचारकों में
मेनका गुरुस्वामी ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों को मानवाधिकारों के संबंध में परामर्श भी दिया है। साल 2019 में 'फॉरेन पॉलिसी' ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली विचारकों में शामिल किया और वे अपनी साथी वकील अरुंधति काटजू के साथ 'टाइम' पत्रिका की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में भी शामिल हुईं।
19 सांसदों ने ली सांसदी की शपथ
इस बीच NCP-SCP नेता शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले सहित राज्यसभा के 19 नए सदस्यों ने 6 अप्रैल 2026 को पद की शपथ ली।





