टेक सपोर्ट के नाम पर करते थे ठगी, चार गिरफ्तार

जन प्रवाद, ब्यूरो। 
नोएडा। नोएडा की साइबर पुलिस ने टेक सपोर्ट के नाम पर धोखाधड़ी कर विदेशी नागरिकों से ठगी करने वाले एक फर्जी कॉलसेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से बड़ी संख्या में लैपटॉप, मोबाइल व अन्य सामान बरामद किया है। गिरफ्तार अभियुक्त हैकिंग के नाम पर ठगी करते थे। अब तक विदेशी नागरिकों से ये लोग करोड़ों की ठगी कर चुके है। 

नोएडा की थाना साइबर क्राइम पुलिस ने एक फर्जी कॉलसेंटर का पर्दाफाश किया है। इस संबंध में डीसीपी शैव्या गोयल ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि लोकल इंटेलिजेंस के माध्यम से मिली सूचना मिली कि टेक सपोर्ट के नाम पर हैकिंग और डाटा चोरी का भय दिखाकर विदेशी नागरिकों के साथ साइबर धोखाधड़ी की जा रही है। पुलिस ने सूचना के आधार पर छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने चार साइबर अपराधियों को नोएडा के सेक्टर-76 के पास से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार अभियुक्त अभी तक विदेशी नागरिकों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर चुके हैं। अभियुक्तों के कब्जे से बड़ी संख्या में लैपटॉप व मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

पुलिस ने जब उनसे पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि टेक सपोर्ट नाम पर इंटरनेट एवं सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पेड विज्ञापन चलाकर विदेशी नागरिकों को कॉल करने के लिए टोल फ्री नंबर प्रदर्शित किया जाता था। विदेशी नागरिक विज्ञापन देखकर कॉल करते थे। कॉल लैपटॉप पर इंस्टाल सॉफ्टवेयर पर रिसीव होती थी। ये लोग टेक्निकल एजेंट बताकर विदेशी नागरिकों को यह भरोसा दिलाते थे कि आपका कंप्यूटर डिवाइस हैक हो गया है। इसके बाद स्क्रीन शेयरिंग के माध्यम से उनकी स्क्रीन एक्सेस कर बैंकिंग की जानकारी प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद उनकी कंप्यूटर स्क्रीन को ब्लैक कर देते थे। इसके बाद उनके बैंक खातों की रकम जानकर वसूली की प्रक्रिया  शुरू होती थी। विदेशी नागरिकों से 350 से 2000 यूएसडी तक वसूले जाते थे। प्राप्त धनराशि क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से लेकर आपस में बांट लेते थे। डीसीपी ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों में बिलाल पुत्र जाकिर, देव कपाही पुत्र स्व. राजकुमार, अभिषेक मुखेजा पुत्र प्रदीप मुखेजा एवं कुशाग्र पुत्र देवेन्द्र निम्बेकर निवासी रोहिणी दिल्ली शामिल है। पुलिस ने इनके पास से चार लैपटॉप, आठ मोबाइल फोन, चार माइक हैंडफोन एवं दो राउटर बरामद किए हैं। 
बाइट - शैव्या गोयल, डीसीपी, साइबर