समुद्री के नीचे बन गया क्रेटर, वैज्ञानिकों ने कर दी बड़ी भविष्यवाणी

जन प्रवाद, ब्यूरो।
नोएडा। 10 साल पहले वैज्ञानिकों को अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ में अचानक एक रहस्यमयी छेद दिखाई दिया। यह छेद इतना बड़ा है कि इसमें पूरा का पूरा एक देश समा जाए। क्षेत्रफल की दृष्टि यह स्विट्जरलैंड के बराबर है। वैज्ञानिकों ने लंबे रिसर्च के बाद इस गड्ढे के बनने का कारण खोज निकाला है।

इंडियन डिफेंस रिव्यू में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाली जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार 10 साल पहले जब भीषण सर्दी पड़ रही थी उसी दौरान अंटार्कटिका के दक्षिणी महासागर मौड राइज क्षेत्र के ऊपर एक विशालकाय गड्डा दिखाई दिया। इस क्रेटर को देखते ही दुनियाभर के वैज्ञानिक और अध्ययनकर्ता यहां पहुंचने लगे। वे सभी इस खास क्षेत्र को लेकर शोध करने लगे। इस दौरान क्षेत्र में हुए बदलावों को जांचा परखा गया। अब वैज्ञानिकों ने इस क्रेटर यानी गड्डे के राज से पर्दा उठा दिया है। वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तरी सागर के नीचे मौजूद विशाल क्रेटर 43 से 46 मिलियन साल पहले ही बन चुका था। बता दें कि यह भले ही 43 से 46 मिलियन साल पहले बना था, लेकिन इसकी खोज 10 साल पहले ही हुई थी। तब से इसके बनने को लेकर तरह-तरह की खोज होती रही। वैज्ञानिकों के अनुसार यह किसी एस्टेरॉयड या धूमकेतु की टक्कर की वजह से बना था। इस टक्कर से एक भीषण सुनामी पैदा हुई थी, जिसकी लहरें 100 मीटर यानी 328 फीट ऊंची थीं।

रिसर्च में दावा किया गया है कि समुद्र तल से टकराने वाले यह उल्कापिंड 160 मीटर का था। इसके धरती से टकराते ही मेगा-सुनामी आ गई थी। एडिनबर्ग की हेरियट-वॉट यूनिवर्सिटी के डॉक्टर उइसडीन निकोलसन के नेतृत्व में नेचुरल एनवायरनमेंट रिसर्च काउंसिल के सहयोग से यह रिसर्च पूरी की गई थी। रिसर्च टीम का हिस्सा रहे वैज्ञानिकों ने अनुसार इस टक्कर के कुछ ही मिनटों के भीतर चट्टानों और पानी की 1.5 किलोमीटर ऊंची एक दीवार बन गई। यह बाद में ढहकर समुद्र में समा गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सुनामी लंदन के मशहूर ऐतिहासिक स्थल बिग बेन से ज्यादा ऊंची रही होगी। वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च पर बात करते हुए कहा कि अध्ययन में अत्याधुनिक सीस्मिक इमेजिंग का प्रयोग किया गया है। समुद्र में बने एक तेल के कुएं से नमूने लेकर जांच की गई। नमूनों की जांच करने पर दुर्लभ शॉक्ड क्वार्ट्ज और फेल्डस्पार मिले। वैज्ञानिकों के अनुसार इनका निर्माण तभी होता है जब कोई उल्कापिंड बिना किसी रोक-टोक के सीधे धरती से टकरा जाए। यानी इस एस्टेरॉयड या धूमकेतु को अंतरिक्ष की कोई भी ग्रह गुरुत्वाकर्षण शक्ति प्रभवित नहीं कर सकी। यह अंतरिक्ष से चलने के बाद सीधा पृथ्वी पर गिरा था। डॉक्टर निकोलसन ने कहा कि यह क्रांतिकारी अध्ययन है। इससे सिल्वरपिट क्रेटर की उत्पत्ति से जुड़े दशकों पुराने रहस्य को सुलझाने में मदद मिलेगी। साथ ही धरती और अंतरिक्ष के कई रहस्य उजागर हो सकते हैं।